Maha Aarti to be held at Dhar Bhojshala on Friday after 721 years; administration on alert धार भोजशाला में 721 साल बाद शुक्रवार को होगी महाआरती, प्रशासन अलर्ट; इलाके में सुरक्षा चाक-चौबंद, Madhya-pradesh Hindi News - Hindustan
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धार भोजशाला में 721 साल बाद शुक्रवार को होगी महाआरती, प्रशासन अलर्ट; इलाके में सुरक्षा चाक-चौबंद

हिंदू समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि 22 मई को सकल हिंदू समाज के लोग धानमंडी चौराहे पर एकत्रित होंगे और वहां से लगभग एक किलोमीटर पैदल यात्रा करते हुए भोजशाला पहुंचेंगे। परिसर में मां सरस्वती की विधिवत पूजा-अर्चना करने के बाद  महाआरती की जाएगी।

Wed, 20 May 2026 11:27 PMSourabh Jain लाइव हिन्दुस्तान, धार, मध्य प्रदेश
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धार भोजशाला में 721 साल बाद शुक्रवार को होगी महाआरती, प्रशासन अलर्ट; इलाके में सुरक्षा चाक-चौबंद

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला को देवी सरस्वती का मंदिर घोषित किए जाने और फिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा यहां हिंदू समुदाय को पूजा-अर्चना और अन्य गतिविधियों के लिए प्रवेश की अनुमति दिए जाने के बाद 22 मई को पहला शुक्रवार पड़ने वाला है, जिसे लेकर प्रशासन बेहद सावधानी बरत रहा है। दरअसल बीते कई सालों में यह पहला शुक्रवार रहेगा जब मुस्लिम समुदाय के लोगों को यहां नमाज पड़ने की अनुमति नहीं रहेगी, वहीं दूसरी तरफ हिंदू संगठनों ने 721 साल बाद शुक्रवार को भोजशाला परिसर में महाआरती और दिन भर पूजा-अर्चन करने की तैयारी की है। ऐसे में किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए प्रशासन ने इलाके में चप्पे चप्पे पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और कड़ी निगरानी रखने की तैयारी की है।

इस आयोजन को लेकर आयोजित पत्रकार वार्ता में हिंदू नेता अशोक जैन ने कहा कि लगभग 721 वर्षों के बाद शुक्रवार के दिन हिंदू समाज को भोजशाला में अधिकारपूर्वक पूजन का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि राजा भोज द्वारा निर्मित मां सरस्वती मंदिर पर वर्ष 1305 में आक्रमण के बाद से हिंदू समाज इसके लिए संघर्ष कर रहा था।

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प्रशासन ने बुलाई शांति समिति की बैठक

अदालत का फैसला आने के बाद इस पहले शुक्रवार को लेकर प्रशासन भी सख्ती व सावधानी बरत रहा है, इस दौरान तैयारियों की जानकारी देते हुए एसपी सचिन शर्मा ने कहा कि सभी नागरिकों, धर्मगुरुओं और आगंतुकों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की गई है। उन्होंने कहा कि बिना अनुमति किसी भी नई परंपरा या धार्मिक गतिविधि की शुरुआत नहीं की जाएगी। इस दौरान उन्होंने सोशल मीडिया पर भी कड़ी नजर रखते हुए भ्रामक और भड़काऊ पोस्ट करने वालों पर तुरंत कड़ा ऐक्शन लेने की बात भी कही। इस दौरान पुलिस ने लोगों से किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान नहीं देने और प्रशासन का पूरी तरह सहयोग करने की भी अपील की।

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अब सिर्फ भोजशाला, नाम से हटा कमाल मौला मस्जिद

उधर शुक्रवार को होने वाले कार्यक्रमों की जानकारी देने के लिए बुलाई प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठन के नेताओं ने बताया गया कि ASI द्वारा उच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद परिसर के नाम में भी परिवर्तन करते हुए उसे केवल 'भोजशाला' कर दिया गया है। आयोजकों ने बताया कि इससे पहले की ASI की व्यवस्था के अनुसार शुक्रवार के दिन हिंदू समाज के भोजशाला परिसर में प्रवेश पर रोक थी तथा मुस्लिम समाज को नमाज पढ़ने की अनुमति दी जाती थी। इसी वजह से जब कभी शुक्रवार को बसंत पंचमी पड़ती थी तो उस दिन भी विवाद की स्थिति बन जाती थी।

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एक किलोमीटर लंबी पदयात्रा कर भोजशाला पहुंचेंगे

इस दौरान हिंदू समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि 22 मई को सकल हिंदू समाज के लोग धानमंडी चौराहे पर एकत्रित होंगे और वहां से लगभग एक किलोमीटर पैदल यात्रा करते हुए भोजशाला पहुंचेंगे। परिसर में मां सरस्वती का विधिवत पूजन-अर्चन एवं महाआरती की जाएगी। आयोजन को लेकर क्षेत्र में उत्साह का वातावरण है। प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।

आंदोलन से जुड़े दीपक बिडकर और सोनू गायकवाड़ ने बुधवार को बताया कि साल 1997 से भोजशाला की मुक्ति और गौरव पुनर्स्थापना के लिए अभियान चलाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि 15 मई 2026 को उच्च न्यायालय इंदौर द्वारा दिए गए निर्णय के बाद इस दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है।

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मंगलवार को भी उमड़ी थी श्रद्धालुओं की भारी भीड़

इससे पहले हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद मंगलवार को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भोजशाला में पहुंचे थे और यहां उन्होंने पूजा अर्चना की थी। इस दौरान श्रद्धालुओं ने सरस्वती वंदना के अलावा हनुमान चालीसा का पाठ किया था, साथ ही भजन व हवन-कीर्तन करते हुए मिठाइयां बांटी थीं और पटाखे छोड़ने और शंख बजाने जैसे काम भी किए थे।

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