भोजशाला पूजा की जगह नहीं... हाई कोर्ट के फैसले पर दिग्विजय सिंह ने फिर उठाए सवाल
भोजशाला परिसर को मंदिर घोषित करने के मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को अस्पष्ट बताते हुए कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने एकबार फिर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एएसआई को मंदिर का कोई सबूत नहीं मिला।

भोजशाला पर हाई कोर्ट के फैसले को अस्पष्ट बताते हुए कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा है कि एएसआई को वहां मंदिर का कोई सबूत नहीं मिला। भोजशाला पूजा की जगह नहीं है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की ओर से जमा की गई एक रिपोर्ट में यह बताया गया था कि उस जगह पर मंदिर का कोई सबूत नहीं मिला था। हाई कोर्ट का आदेश बहुत अस्पष्ट है। मौजूदा वक्त में पूरे देश में सांप्रदायिक तनाव का माहौल पैदा किया जा रहा है।
दिग्विजय सिंह ने ग्वालियर में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि यह मंदिर है या मस्जिद… इस मुद्दे के दो पहलू हैं। ASI द्वारा संरक्षित स्मारक की जगह पूजास्थल नहीं होता है। जब उमा भारती सीएम थीं तब सरकारी वकील (सुमित्रा महाजन के पति) ने ASI की रिपोर्ट दी थी। इस रिपोर्ट में लिखा था कि भोजशाला में कहीं भी मंदिर होने के प्रमाण नहीं मिले। यह बात 2004 से 2006 के बीच की है।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की ओर से यह बताया गया था कि उस जगह पर मंदिर का कोई सबूत नहीं मिला। आज पूरे देश में सांप्रदायिक तनाव का माहौल पैदा किया जा रहा है। यह उसी का अंग है। हाई कोर्ट का आदेश बहुत अस्पष्ट है। हाई कोर्ट के फैसले के बारे में अध्ययन किया जा रहा है। जब तक अध्ययन पूरा ना हो जाए। उस पर कोई भी बात कहना उचित नहीं है।
यह पहली बार नहीं है जब दिग्विजय सिंह ने भोजशाला पर आए फैसले पर सवाल उठाया है। बीते शुक्रवार को दिग्विजय सिंह ने कहा था कि ASI संरक्षित स्मारक में पूजा या इबादत की अनुमति पर अब सुप्रीम कोर्ट ही फैसला करेगा। भोजशाला एएसआई संरक्षित स्मारक है। क्या ऐसे स्मारक के अंदर पूजा या इबादत हो सकती है यह सुप्रीम कोर्ट तय करेगा। यह भी अध्ययन की बात है कि भोजशाला परिसर में एएसआई सर्वेक्षण रिपोर्ट में सरस्वती की मूर्ति का कोई उल्लेख नहीं है।
नियम-कानूनों का होना चाहिए पालन
दिग्विजय सिंह का कहना था कि विवादित परिसरों से जुड़े विषयों में नियम-कानूनों का पालन किया जाना चाहिए। वाराणसी की ज्ञानवापी, संभल की शाही जामा मस्जिद और मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मुकदमे सुप्रीम कोर्ट में पहले से लंबित हैं। ऐसे समय जब देश आर्थिक और सामाजिक चुनौती से गुजर रहा है हिंदू-मुस्लिम के मुद्दे उठाना उचित नहीं है।
विश्व हिन्दू परिषद का पलटवार
वहीं दिग्विजय सिंह के बयान पर पलटवार करते हुए VHP नेता विनोद बंसल ने कहा कि अभी दो दिन पहले जो दावा कर रहा था कि वह सनातनी है, अब ऐसा बयान दे रहा है। जब भी ऐसे विवादित बयान दिए जाते हैं तो कांग्रेस न तो सहमति जताती है और न ही असहमति… इन पापी धोखेबाज लोगों का झूठ अब सबके सामने बेनकाब हो रहा है। हिंदू-विरोधी बयान देना कांग्रेस के लिए कोई नई बात नहीं है। यह कांग्रेस की पुरानी परंपरा है। कांग्रेस का DNA हमेशा से हिंदू-विरोधी रहा है।




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