एमपी राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस विधायकों का कर्नाटक कूच, क्या कहता है संख्याबल का गणित?
एमपी में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की आशंका के चलते कांग्रेस ने अपने 35 विधायकों को बेंगलुरु भेज दिया है। तीन सीटों के इस चुनाव में मुकाबला पेचीदा हो चला है। क्या कहता है संख्याबल का गणित?

ए में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले ही सियासी सरगर्मी चरम पर है। कांग्रेस ने सेंधमारी के खतरे को देखते हुए अपने विधायकों को बेंगलुरु भेज दिया है। राज्य की तीन सीटों में से 2 पर भाजपा और तीसरी पर संख्या बल के कारण कांग्रेस की जीत तय है लेकिन भाजपा ने एक अतिरिक्त उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। फिलहाल एक सीट पर जीत के लिए कांग्रेस के पास पर्याप्त वोट हैं जबकि भाजपा को अतिरिक्त उम्मीदवार के लिए कुछ अन्य मतों की जरूरत होगी।
कांग्रेस की मध्यप्रदेश इकाई के मीडिया सेल के अध्यक्ष मुकेश नायक ने बताया कि 35 विधायकों का पहला जत्था अपने परिवार के सदस्यों के साथ विशेष विमान से बेंगलुरू के लिए रवाना हो गया है। बाकी विधायक शाम तक रवाना हो जाएंगे। विपक्ष के नेता उमंग सिंघार भी कांग्रेस विधायकों के साथ गए हैं। वहीं उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस विधायकों को पार्टी शासित किसी प्रदेश में ले जाया जाएगा क्योंकि भाजपा उनके विधायकों को खरीदने का प्रयास कर रही है।
उमंग सिंघार ने कहा कि पार्टी के कुछ विधायकों ने उन्हें बताया है कि भाजपा के लोग 'नोटों से भरी थैली' लेकर उनसे संपर्क करने आए थे लेकिन उन्होंने उन्हें लौटा दिया। सिंघार ने दावा किया कि 18 तारीख को मतदान के दिन भाजपा की साजिश विफल होगी। वहीं सौंसर से विधायक विजय रेवानाथ चौरे ने कहा कि सभी विधायक भोपाल से बेंगलुरु जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा विधायकों को तोड़ने का प्रयास कर रही है।
बता दें कि एमपी में जिन 3 सीटों पर चुनाव चुनाव हो रहे हैं उनमें से 2 पर भाजपा की जीत तय है जबकि संख्या बल के लिहाज से तीसरी सीट पर कांग्रेस का पलड़ा भारी है। लेकिन भाजपा ने तीसरी सीट पर भी उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। भाजपा ने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और राज्य इकाई के सचिव रजनीश अग्रवाल को मैदान में उतारा है। यही नहीं उसने तीसरी सीट पर एमपी मछुआरा कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट पर दांव लगाया है।
कांग्रेस को झटका, नटराजन का पर्चा खारिज
कांग्रेस ने पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था। लेकिन मंगलवार को उनका नमांकन खारिज कर दिया गया। मीनाक्षी नटराजन पर आरोप था कि उन्होंने हलफनामे में एक मामले की जानकारी छिपाई थी। राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए चुनाव लड़ रहे बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट ने रिटर्निंग ऑफिसर के पास शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि नटराजन ने तेलंगाना में उनके खिलाफ दर्ज एक मामले की जानकारी जानबूझकर छिपाई।
क्या आरोप?
तेलंगाना की एक अदालत में नटराजन पर एक आपराधिक मामला लंबित है। इसका जिक्र हलफनामे में नहीं किया गया है। इसी आधार पर रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन खारिज कर दिया है। इससे पहले, सोमवार देर रात सिंघार के आवास पर पार्टी नेताओं की एक बैठक हुई जिसमें करीब 60 विधायक शामिल हुए। पार्टी का एक विधायक बैठक में शामिल नहीं हुआ क्योंकि वह दिल्ली में था जबकि वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने ऑनलाइन माध्यम से इसमें हिस्सा लिया।
क्या कहता है संख्याबल का गणित?
मौजूदा वक्त में एमपी की कुल 230 सदस्यीय विधानसभा में सदस्यों की संख्या 229 है। इनमें भाजपा के 164 और कांग्रेस के 64 विधायक हैं जबकि एक सीट भारत आदिवासी पार्टी के पास है। दतिया सीट से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द हो चुकी है जिस वजह से एक सीट रिक्त है। श्योपुर जिले के विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर हाई कोर्ट की रोक है।
सागर जिले की बीना सीट से विधायक निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने के लिए एमपी हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। ऐसे में यह संभावना है कि वह भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करें। सप्रे ने सोमवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात की थी।
राज्यसभा की 3 सीटों पर हर उम्मीदवार को जीत के लिए 58 वोटों की जरूरत है। इस हिसाब से दो सीटें जीतने के लिए भाजपा को 116 वोट की जरूरत है। कुल 164 में से 116 वोट देने के बाद भाजपा के पास 48 वोट बचेंगे। तीसरी सीट जीतने के लिए उसे 58 वोट चाहिए यानी भाजपा को 10 अतिरिक्त मतों की जरूरत है। निर्मला सप्रे और भारत आदिवासी पार्टी के विधायक कमलेश डोडियार के मत यदि भाजपा को मिले तो उसकी संख्या 50 तक पहुंच सकती है।
इसके बावजूद जीत के लिए BJP को तीसरे कंडिडेट के लिए कम से कम आठ और मतों की जरूरत होगी। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा इसकी पूर्ति कांग्रेस खेमे में सेंध लगाकर करने का प्रयास कर रही है। सप्रे का रुख और मल्होत्रा के मतदान पर लगी रोक की वजह से कांग्रेस का प्रभावी आंकड़ा 62 पर सिमट सकता है। हालांकि, चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस के पास जरूरी संख्या से चार वोट अधिक हैं। मध्यप्रदेश की राज्यसभा की तीन सीटों के लिए 18 जून को मतदान होगा। सोमवार को नामांकन का आखिरी दिन था।




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