राज्यसभा चुनाव में BJP की ‘तीसरी चाल’ से कांग्रेस इतनी बेहाल; ‘कैद’ किए जाएंगे विधायक
मध्य प्रदेश में राज्यसभा का चुनाव बेहद रोचक हो गया है। भाजपा की ओर से तीसरा उम्मीदवार उतारे जाने के बाद कांग्रेस पार्टी को क्रॉस वोटिंग की आशंका सता रही है। इसलिए विधायकों को अब कर्नाटक शिफ्ट किया जा रहा है।

मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की 'तीसरी चाल' से कांग्रेस बेहद चिंतित हो गई है। एक दिन पहले तक सभी विधायकों को एकजुट बताती रही कांग्रेस को अब उनकी वफादारी पर पूरा यकीन नहीं रहा। यही वजह है कि पार्टी अपने विधायकों को मध्य प्रदेश से कर्नाटक शिफ्ट कर रही है। आज दोपहर सभी विधायकों को चार्टर्ड प्लेन से कर्नाटक ले जाया जाएगा।
सभी विधायकों को बेंगलुरु में किसी होटल या रिजॉर्ट में रखने की तैयारी है। बताया जा रहा है कि उनके पास फोन भी नहीं होगा। पार्टी नहीं चाहती कि राज्यसभा चुनाव के दिन तक इनका संपर्क किसी से हो। 18 जून को राज्यसभा चुनाव में वोटिंग के दिन ही इन्हें वापस लाया जाएगा। तब तक विधायक बाहरी संपर्क से दूर, एक तरह से 'कैद' में ही रखे जाएंगे।
केवट से मुकाबला दिलचस्प
मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव हो रहा है। वोटों के गणित को देखते हुए भाजपा के दो प्रत्याशियों तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल की जीत निश्चित मानी जा रही है। लेकिन इनकी जीत के बाद बचे हुए वोटों को लेकर भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार पर दांव लगा दिया। कांग्रेस के पास भले ही अपने एक उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के लिए पर्याप्त वोट हैं पर हाल के सालों में हुए कुछ घटनाक्रम को देखते हुए कांग्रेस किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती है। विधायकों की टूट-फूट से बचने के लिए पार्टी ने उन्हें 9 दिन के लिए राज्य से दूर करना ही बेहतर समझा।
किसके पास कितने विधायक
इस समय मध्यप्रदेश विधानसभा में कुल 229 विधायक हैं। इनमें भाजपा के 164 और कांग्रेस के 64 विधायक हैं, जबकि एक सीट भारत आदिवासी पार्टी के पास है। दतिया सीट से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द हो चुकी है, जिस वजह से एक सीट खाली है। श्योपुर जिले के विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर हाई कोर्ट की रोक है। सागर जिले की बीना सीट से विधायक निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने के लिए मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका लगाई गई है। ऐसे में यह संभावना है कि वह इस चुनाव में भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करें। सप्रे ने सोमवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात भी की है।
भाजपा के पास 8-10 वोट कम
राज्यसभा की तीन सीट पर प्रत्येक उम्मीदवार को जीत के लिए 58 वोटों की जरूरत है। इस हिसाब से दो सीट जीतने के लिए भाजपा को 116 वोट की जरूरत है। कुल 164 में से 116 वोट देने के बाद भाजपा के पास 48 वोट बचेंगे। तीसरी सीट जीतने के लिए उसे 58 वोट चाहिए यानी भाजपा को 10 अतिरिक्त वोट की जरूरत है। निर्मला सप्रे और भारत आदिवासी पार्टी के विधायक कमलेश डोडियार के मत भाजपा को मिले लें तो उसकी संख्या 50 तक पहुंच सकती है। इसके बावजूद जीत के लिए उसे कम से कम 8 और मतों की आवश्यकता होगी।




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