जबलपुर हादसे को क्रूज पायलट ने कहा 'प्राकृतिक आपदा', बताई आखिरी पलों की कहानी
खतरे को भांपते हुए क्रूज पायलट महेश ने होटल के रिसेप्शन डेस्क से तुरंत रेस्क्यू बोट भेजने के लिए कहा क्योंकि मुसीबत एकदम नजदीक थी। इस दौरान हम पैसेंजर को लाइफ जैकेट बांटने लगे।

मध्य प्रदेश के जबलपुर में नर्मदा नदी पर बने बारगी डैम में क्रूज बोट के पलटने से अबतक 11 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। क्रूज बोट के पायलट ने इस पूरी घटना को 'प्राकृतिक आपदा' करार दिया है। पायलट का नाम महेश पटेल है और उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम में पीड़ित परिवार से माफी भी मांगी है लेकिन जिम्मेदारी लेने से बचते हुए भी दिखाई दे रहे हैं।
एनडीटीवी में छपी एक खबर के मुताबिक, महेश पटेल ने बताया है कि 'जब हम रवाना हुए थे, तब मौसम सुहावना था। हालांकि, जैसे ही हम उस स्थान पर पहुंचे, तेज हवाएं चलने लगीं। मैंने तुरंत नाव को वापस मोड़ दिया, लेकिन तूफान तेजी से बढ़ा, लहरें डेक पर टकराने लगीं और नाव में पानी भरने लगा।
वहीं खतरे को भांपते हुए महेश ने होटल के रिसेप्शन डेस्क से तुरंत रेस्क्यू बोट भेजने के लिए कहा क्योंकि मुसीबत एकदम नजदीक थी। इस दौरान हम पैसेंजर को लाइफ जैकेट बांटने लगे।
'पानी इंजन रूम में घुसने लगा था'
लाइफ जैकेट को लेकर उन्होंने कहा कि ‘लोग अक्सर लाइफ जैकेट पहनने से इनकार कर देते हैं। वे बोट में डांस कर रहे थे और इसी वजह से उन्होंने जैकेट नहीं पहनी हुई थी। यहां तक कि तीव्र लहरें होने के बावजूद भी वे जमकर जमकर आनंद ले रहे थे। हवाएं तेज हुईं तो पानी इंजन रूम में घुसने लगा था तभी मुझे एहसास हो गया था बोट का डूबना तय है। हम किनारे से ज्यादा दूर नहीं थे लेकिन मुझे यह भी एहसास हो गया था कि हम वहां तक नहीं पहुंच पाएंगे।’
'खुद तैरकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा'
वहीं हादसे में जिंदा बचे लोगों के इस दावे पर कि उन्होंने पायलट को खतरे को लेकर पहले ही आगाह कर दिया तो और बोट को वापस मोड़ने के लिए कहा था, इस बारे में उनसे किसी ने बात नहीं की। उन्होंने कहा, 'ईश्वर साक्षी है, किसी ने मुझे यह नहीं बताया कि हवा तेज हो रही है, नाव को वापस किनारे पर ले जाओ। मैं शारीरिक तौर पर किसी की जान नहीं बचा सका, लेकिन मेरा मुख्य ध्यान इसपर था कि सभी लोग लाइफ जैकेट पहन लें। मैं खुद तैरकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा था।'
वहीं पीटीआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि 'कुछ लोगों ने अपनी लाइफ जैकेटे एक तरफ रख दी थीं और उन्हें पहना नहीं था। मेरा केबिन ऊपरी डेक पर है, इसलिए जब पानी तेजी से अंदर आने लगा तो मैं निचले डेक की स्थिति का पूरी तरह से जायजा नहीं ले सका। हम जहाज पर 70 से 75 लाइफ जैकेट का पूरा स्टॉक रखते हैं। इसलिए, जब भी कोई यात्री आता है, उन्हें लाइफ जैकेट पहनने के निर्देश दिए जाते हैं।'
बोट में करीब 40 लोग थे सवार
पायलट का कहना है कि उसके पास क्रूज बोट को चलाने के लिए वैध लाइसेंस है जिसे गोवा से हासिल किया था। आपको बता दें कि बोट में करीब 40 लोग सवार थे।
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