ईरान-इजरायल में छिड़ी जंग, मध्य प्रदेश के केला किसान क्यों हुए बेहाल? आखिर क्या है वजह
बड़वानी के केले देश ही नहीं बल्कि विदेश में भी मशहूर हैं। विशेषकर ईरान, इराक, इजरायल, बहरीन, तुर्की और यूएई भेजे जाते हैं। नर्मदा का पानी और उपजाऊ मिट्टी के वजह से यहां के केलों का स्वाद काफी अलग होता है।

इजरायल-ईरान युद्ध को शुरू हुए 6 दिन से ज्यादा हो चुके हैं। अबतक इस युद्ध में दोनों देश एक दूसरे पर लगातार हमलावर हैं। युद्ध का असर मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के केला किसानों पर भी देखने को मिल रहा है। नर्मदा नदी के किनारे बसा इस जिले की मिट्टी काफी उपजाऊ होती है। यहां दूर-दूर तक केले के हरे-भरे खेत नजर आते हैं। यहां के किसान रमजान के महीने का बेसब्री से इंतजार करते हैं क्योंकि यही वह समय होता है जब यहां से भारी संख्या में केले खाड़ी देशो और मिडिल ईस्ट में सप्लाई होते हैं। लेकिन इस साल किसानों के चेहरों पर उदासी है।
ईरान-इजरायल संघर्ष और खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव ने केलों के निर्यात पर नकारात्मक असर डाला है। सप्लाई चेन बुरी तरह से प्रभावित है, जिले के हजारों किसानों निर्यात पर निर्भर रहते हैं। मुनाफे से भरपूर व्यापार अब अचानक धीमा पड़ गया है। व्यापारी माल आगे नहीं भेज पा रहे हैं, जिसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है। किसानों के सामने चुनौती है कि वे अपनी फसल को बेच दें या अपनी आंखों के सामने खराब होता देखें।
विदेश में भी मशहूर हैं केले
बड़वानी के केले देश ही नहीं बल्कि विदेश में भी मशहूर हैं। विशेषकर ईरान, इराक, इजरायल, बहरीन, तुर्की और यूएई भेजे जाते हैं। नर्मदा का पानी और उपजाऊ मिट्टी के वजह से यहां के केलों का स्वाद काफी अलग होता है। युद्ध के वजह केले 8 से 9 रुपये किलो बिक रहे हैं जो कि कुछ हफ्ते पहले तक 25 रुपये किलो के भाव से बिक रहे थे। केले के मौजूदा दाम उगाने की लागत से भी कम है।
दिल्ली ग्वालियर जैसे शहरों की ओर रुख
बड़वानी में केलों से भरे ट्रक बंदरगाहों पर जाने की बजाय अब दिल्ली ग्वालियर जैसी शहरों की ओर रुख कर रहे हैं ताकि नुकसान की कुछ भरपाई हो सके। यहां के बाजारों में पहले ही केलों की भरमार रहती है ऐसे में बड़वानी के किसानों को मनचाहा दाम नहीं मिल पा रहा।
होर्मुज स्ट्रेट बंद, तेल सप्लाई प्रभावित
आपकों बता दें कि ईरान ने अमेरिका, इजरायल और यूरोपीय जहाजों के लिए होर्मुज स्ट्रेट बंद किया हुआ है। इससे तेल सप्लाई चेन भी प्रभावित हो रही है। हालांकि अमेरिका ने भारत को रूस से तेल '30 दिन की छूट दी है।' अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की सप्लाई बनाए रखने के लिए अमेरिका ने ये कदम उठाया है।




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