‘घर आते ही लग जाती थी गले’… इंदौर जल कांड में 2 साल की बच्ची की दर्दनाक मौत, न दवा काम आई न दुआ
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप ने दो साल की मासूम सिया प्रजापति की जान ले ली। ‘लड्डू’ नाम से पुकारे जाने वाली सिया इस जल त्रासदी की सबसे कम उम्र की पीड़ितों में से एक थी। उसकी मौत के बाद परिवार गहरे सदमे में है।

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप ने दो साल की मासूम सिया प्रजापति की जान ले ली। ‘लड्डू’ नाम से पुकारे जाने वाली सिया इस जल त्रासदी की सबसे कम उम्र की पीड़ितों में से एक थी। उसकी मौत के बाद परिवार गहरे सदमे में है।
पहले सुधार हुआ, लेकिन फिर बिगड़ गई तबीयत
सिया के पिता सूरज प्रजापति ने बताया कि 27 दिसंबर को बेटी को दस्त की शिकायत हुई थी। परिवार को आशंका है कि उसने दूषित पानी पिया था। शुरुआत में इलाज से हालत में सुधार हुआ, लेकिन कुछ दिन बाद तबीयत फिर बिगड़ गई। पहले उसे सरकारी चाचा नेहरू अस्पताल में भर्ती कराया गया, फिर हालत गंभीर होने पर सरकारी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल रेफर किया गया।
पूरे शरीर में फैल गया संक्रमण
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टरों ने बताया कि संक्रमण पूरे शरीर में फैल गया था और सिया के लीवर में पस भर गया था, जिसे लीवर एब्सेस कहा जाता है। इसके साथ ही उसे निमोनिया जैसी अन्य जटिल समस्याएं भी थीं। तमाम कोशिशों के बावजूद 10 फरवरी को उसकी मौत हो गई।
घर आते ही लग जाती थी गले….
पिता सूरज कहते हैं, “मेरी बेटी बहुत चंचल थी। घर आते ही दौड़कर गले लग जाती थी। हम उन पलों को कैसे भूलें?” उन्होंने बताया कि इलाज के दौरान आयुष्मान कार्ड सक्रिय कराने में भी परेशानी हुई। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई थी। बेटी की मौत के अगले दिन उन्हें कार्ड सक्रिय होने की सूचना मिली। हालांकि सरकारी अस्पतालों में इलाज मुफ्त मिला, लेकिन कुछ दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ीं।
अब तक 35 मौत का दावा, जांच जारी
स्थानीय लोगों का दावा है कि इस प्रकोप में अब तक करीब 35 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि सभी मौतें सीधे तौर पर दूषित पानी से नहीं जुड़ी थीं। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
मामले की जांच मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित एक सदस्यीय आयोग कर रहा है, जिसकी अध्यक्षता पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता कर रहे हैं। लेकिन सिया के परिवार के लिए कोई भी मुआवजा उनकी ‘लड्डू’ को वापस नहीं ला सकता।




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