इंदौर में दस्त से पीड़ित 12 और मरीज सामने आए, अब तक 23 मौत का दावा; 10 अभी भी ICU में भर्ती
मध्य प्रदेश के इंदौर में दस्त से पीड़ित 12 और नए मरीज सामने आए हैं। 29 दिसंबर को उल्टी और दस्त का प्रकोप शुरू होने के बाद से 434 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। इनमें से 395 को छुट्टी दे दी गई है। अभी 39 मरीज अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं, जिनमें से 10 आईसीयू में हैं।

मध्य प्रदेश के इंदौर में दस्त से पीड़ित 12 और नए मरीज सामने आए हैं। अधिकारियों ने बताया कि दूषित पेयजल आपूर्ति से फैले गैस्ट्रोएंटेराइटिस के प्रकोप के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग ने 4827 लोगों की जांच की है। सोमवार को इंदौर के एक स्वास्थ्य केंद्र में दस्त से पीड़ित कम से कम 12 नए मरीज पाए गए। भागीरथपुरा क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्रों के ओपीडी में आए 12 मरीजों में से तीन को अस्पतालों में रेफर कर दिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि 29 दिसंबर को उल्टी और दस्त का प्रकोप शुरू होने के बाद से 434 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। इनमें से 395 को ठीक होने के बाद छुट्टी दे दी गई है। वर्तमान में 39 मरीज अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं, जिनमें से 10 आईसीयू में हैं।
भागीरथपुरा में दूषित पेयजल के सेवन से फैले संक्रमण के कारण अब तक प्रशासन ने 7 मौतों की पुष्टि की है, जबकि स्थानीय लोगों का दावा है कि छह महीने के शिशु सहित 23 मरीजों की मौत हो चुकी है। मौत की संख्या को लेकर विरोधाभासी दावों के बीच प्रशासन ने प्रभावित 18 परिवारों को 2 लाख रुपए प्रति परिवार का मुआवजा वितरित किया है।
नगर निगम के अधिकारियों ने पहले कहा था कि भागीरथपुरा क्षेत्र में एक पुलिस चौकी के पास मुख्य पेयजल आपूर्ति पाइपलाइन में रिसाव पाया गया था, जहां शौचालय का निर्माण किया गया है। उनका दावा था कि इस रिसाव के कारण पेयजल दूषित हो गया।
भारत का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर, अपनी जल जरूरतों के लिए नर्मदा नदी पर निर्भर है। नगर निगम द्वारा बिछाई गई पाइपलाइनों के माध्यम से 80 किलोमीटर दूर स्थित पड़ोसी जिले खरगोन के जलुद से नर्मदा का पानी इंदौर लाया जाता है और घरों में सप्लाई किया जाता है।
मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर में नल कनेक्शन के माध्यम से एक दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति की जाती है। राज्य सरकार ने पिछले शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को बताया था कि भागीरथपुरा हेल्थ संकट को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी के रूप में वर्गीकृत किया गया है। आपातकालीन उपायों और निरंतर निगरानी के बाद स्थिति सुधर रही है।




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