इंदौर पेयजल त्रासदी के बाद एक्शन मोड में सीएम, अधिकारियों को दिए ये निर्देश
इंदौर के भागीरथपुरा में नर्मदा नदी की पाइपलाइन में ड्रेनेज लाइन का पानी मिल जाने से सप्लाई का पानी गंदा हो गया था। नतीजन सैकड़ों लोग बीमार पड़ गए, जिससे डायरिया और उल्टी का गंभीर प्रकोप फैल गया था। करीब 1400 लोगों पर इसका असर दिखा।

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल त्रासदी के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा है कि नागरिकों को साफ और सुरक्षित पानी सप्लाई करने की जिम्मेदारी शहरी प्रशासन की है। सीएम ने इसके साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में किसी भी सूरत में दूषित पानी की सप्लाई न हो।
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से डायरिया फैलने के बाद सात लोगों की मौत के हो गई थी। सीएम ने शनिवार को शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में एक साथ 'स्वच्छ जल अभियान' शुरुआत की। उन्होंने कहा कि पीने के पानी की क्वालिटी की रेगुलर जांच होनी चाहिए और अगर उसमें गंदगी पाई जाती है, तो तुरंत वैकल्पिक इंतजाम किए जाने चाहिए। यह एक बड़ी चुनौती है, लेकिन इसे गंभीरता से लेना होगा ताकि मध्य प्रदेश के देश के लिए एक मिसाल पेश कर सके।
जिम्मेजारी निभाए अधिकारी
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से निभाने का आग्रह करते हुए यादव ने कहा कि सरकार सभी को शुद्ध पीने का पानी मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध है। बता दें कि इंदौर के भागीरथपुरा में नर्मदा नदी की पाइपलाइन में ड्रेनेज लाइन का पानी मिल जाने से सप्लाई का पानी गंदा हो गया था। नतीजन सैकड़ों लोग बीमार पड़ गए, जिससे डायरिया और उल्टी का गंभीर प्रकोप फैल गया था। करीब 1400 लोगों पर इसका असर दिखा।
कांग्रेस ने की ये मांग
कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई ने इंदौर में दूषित पेयजल त्रासदी के मामले की जांच सेवानिवृत्त रिटायर्ड चीफ जस्टिस से कराए जाने की मांग की है ताकि दोषियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सके। कांग्रेस की मध्यप्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा है कि कांग्रेस सरकार नर्मदा नदी का ‘अमृत’ इंदौर लेकर आई थी मगर बीजेपी सरकार ने उसे जहर में तब्दील कर दिया।




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