इंदौर क्राइम ब्रांच को बड़ी कामयाबी, लॉरेंस गैंग का सदस्य गिरफ्तार; मांगी थी 10 करोड़ की फिरौती
इंदौर क्राइम ब्रांच को लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े नेटवर्क की जांच में बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने उज्जैन जिले के महिदपुर से सचिन शर्मा उर्फ सचिन आर्य नाम के युवक को गिरफ्तार किया है।

इंदौर क्राइम ब्रांच को लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े नेटवर्क की जांच में बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने उज्जैन जिले के महिदपुर से सचिन शर्मा उर्फ सचिन आर्य नाम के युवक को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी गैंग से जुड़े संदिग्ध लोगों के लगातार संपर्क में था और मोबाइल में कई नंबर कोडवर्ड के जरिए सेव कर रखे थे।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी का नाम गैंग से जुड़े राजपाल के संपर्क में आने के बाद सामने आया था। क्राइम ब्रांच ने जब तकनीकी निगरानी और कॉल डिटेल के आधार पर जांच आगे बढ़ाई तो सचिन की गतिविधियां संदिग्ध मिलीं। इसके बाद टीम ने दबिश देकर उसे महिदपुर से हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने पहले पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की और राजपाल से किसी भी तरह के संबंध होने से इनकार करता रहा। हालांकि, जब पुलिस ने उसके मोबाइल फोन की फॉरेंसिक और तकनीकी जांच की तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।
किस नाम से सेव किया था लॉरेंस का नंबर
जांच में पता चला कि आरोपी ने लॉरेंस बिश्नोई का नाम सीधे सेव करने के बजाय एलवी नाम के कोडवर्ड से नंबर सेव कर रखा था। इतना ही नहीं, कई अन्य संदिग्ध नंबर 007 जैसे कोड नामों से सेव मिले, जिससे पुलिस को शक है कि गैंग के सदस्य पहचान छिपाने के लिए विशेष कोड भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे।
क्राइम ब्रांच की जांच में यह भी सामने आया कि सचिन केवल राजपाल ही नहीं, बल्कि कसरावद जेल में बंद कुलदीप नामक आरोपी के भी संपर्क में था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी गैंग के लिए किस तरह का काम करता था और उसके जरिए किन-किन लोगों तक नेटवर्क फैला हुआ है।
दो महीने में पांचवीं धमकी, शहर में बढ़ता गैंग का नेटवर्क
चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले दो महीनों में यह गैंग का इंदौर में पांचवां धमकी भरा कॉल है। इससे पहले भी कई कारोबारियों और संस्थानों को निशाना बनाया जा चुका है। लगातार हो रही इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि गैंग शहर में अपनी जड़ें जमाने की कोशिश में है और पुलिस की पकड़ से अभी दूर है।
SIT और क्राइम ब्रांच अब तक बेअसर
शुरुआती जांच में क्राइम ब्रांच पूरी तरह नाकाम साबित हुई, जिसके बाद डीजीपी कैलाश मकवाणा ने विशेष जांच दल (SIT) गठित किया। इस टीम की कमान एडीजी डी. श्रीनिवास वर्मा को सौंपी गई, जबकि डीआईजी राहुल लोढा को भी शामिल किया गया। टीम ने इंदौर, भोपाल और अशोकनगर की केस डायरी खंगाली, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है।
रिपोर्ट -हेमंत




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