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इंदौर में हुई मौतों के पीछे 'सीवर पानी वाले' बैक्टीरिया, अब तक क्या पता चला? अपडेट

देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा में पेयजल पाइपलाइन में सीवर का पानी मिलने से 10 लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों बीमार हैं, जिस पर मानवाधिकार आयोग और हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है।

Sat, 3 Jan 2026 09:34 AMAnubhav Shakya इंदौर, हिंदुस्तान टाइम्स
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इंदौर में हुई मौतों के पीछे 'सीवर पानी वाले' बैक्टीरिया, अब तक क्या पता चला? अपडेट

देश के सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर में एक ऐसी त्रासदी सामने आई है जो दिल दहला देने वाली है। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल ने कहर बरपाया है, जहां सीवर जैसी गंदगी वाले बैक्टीरिया पानी में घुस गए। इस पानी को पीने से कम से कम 10 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 200 से ज्यादा मरीज अस्पतालों में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। हजारों लोग उल्टी-दस्त से पीड़ित हैं। पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।

कैसे हुआ ये हादसा?

सब कुछ शुरू हुआ 25 दिसंबर से, जब लोगों ने पानी में अजीब सी बदबू और गंदगी की शिकायत की। लेकिन सुनवाई नहीं हुई। जांच में पता चला कि मुख्य पेयजल पाइपलाइन में लीकेज था, और ऊपर बने एक शौचालय का गंदा पानी सीधे सप्लाई में मिल गया। लैब रिपोर्ट्स ने कन्फर्म किया कि पानी में वो बैक्टीरिया मिले जो आमतौर पर सीवर और मानव अपशिष्ट में पाए जाते हैं। महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि शुरुआती टेस्ट में असामान्य बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है, लेकिन पूरी कल्चर रिपोर्ट का इंतजार है।

एक स्थानीय निवासी ने कहा, 'पिछले कई हफ्तों से समस्या थी, लेकिन 25 दिसंबर को हालात बिगड़ गए। पानी पीते ही पेट में आग सी लगती थी।'

इंदौर जल त्रासदी

मौतों का बढ़ता आंकड़ा और मरीजों की तादाद

आधिकारिक तौर पर मौतें 4 बताई जा रही हैं, लेकिन मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने खुद माना कि उन्हें 10 मौतों की जानकारी है। स्थानीय लोग तो 14 तक का दावा कर रहे हैं। अब तक 2456 से ज्यादा लोग उल्टी-दस्त के शिकार हुए, 162 से अधिक अस्पताल में भर्ती। कई मरीज ICU में हैं, और इलाका लगभग खाली हो चुका है। परिवार वाले अपनों का इलाज कराने अस्पतालों में डेरा डाले हुए हैं।

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सरकार पर उठे सवाल, NHRC और हाईकोर्ट की सख्ती

लोगों की शिकायतों को नजरअंदाज करने का खामियाजा अब भुगतना पड़ रहा है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वत: संज्ञान लिया और मध्यप्रदेश सरकार को नोटिस थमा दिया। दो हफ्ते में पूरी रिपोर्ट मांगी गई है। आयोग ने कहा, 'निवासियों ने कई दिनों से गंदे पानी की शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।' इंदौर बेंच ऑफ मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने भी सरकार से घटना की पूरी डिटेल्स मांगी हैं। कोर्ट ने साफ पानी की सप्लाई और मरीजों का इलाज सुनिश्चित करने के आदेश दिए।

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सीएम की मदद और कार्रवाई

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हर मृतक के परिवार को 2 लाख रुपये की सहायता और सभी मरीजों का मुफ्त इलाज घोषित किया। लीकेज ठीक करने, पाइपलाइन साफ करने और नई लाइन बिछाने का काम तेजी से चल रहा है। कुछ अधिकारियों को सस्पेंड भी किया गया है।

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