लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेंगे..., इन अफसरों को किया सस्पेंड; इंदौर पानी कांड पर CM मोहन यादव
इस मामले में सीएम मोहन यादव ने एक्शन लेते हुए कहा- इस घटना में सरकार लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। इसके साथ ही अधिकारियों के निलंबन और हटाने के निर्देश दिए हैं।

इंदौर में दूषित पानी पीने से अब तक 15 लोगों की मौत होने का दावा सामने आ चुका है। हालांकि इंदौर के CMHO की तरफ से 4 मौतों की पुष्टि हुई है। इस मामले में सीएम मोहन यादव ने एक्शन लेते हुए कहा- इस घटना में सरकार लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। इसके साथ ही अधिकारियों के निलंबन और हटाने के निर्देश दिए हैं।
इन अफसरों को किया गया सस्पेंड
सीएम मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ट्वीट करते हुए लिखा- "इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल के कारण हुई घटना में राज्य सरकार लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। इस संबंध में कठोर निर्णय लिये जा रहे हैं।" उन्होंने आगे लिखा- “निगम के अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया, पीएचई के प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित किया गया है। इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को भी हटाने के निर्देश दिए गए हैं।”
सरकार ने कोर्ट में कहा- अब स्थिति काबू में है
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में शुक्रवार को राज्य सरकार ने कहा कि कि इंदौर के भागीरथपुरा स्वास्थ्य संकट को "लोक स्वास्थ्य आपातकाल" के रूप में लिया गया है तथा आपातकालीन उपायों और निरंतर निगरानी के बाद स्थिति सफलतापूर्वक काबू में आ गयी है। रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार तक कुल 294 मरीज स्थानीय अस्पतालों में भर्ती हुए जिनमें से 93 लोगों को छुट्टी दे दी गई है यानी 201 मरीज अब भी भर्ती हैं जिनमें से 32 व्यक्ति गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में हैं।
4, 10 और 15- मौत के आंकड़ों में आ रहा अंतर
रिपोर्ट में बताया गया कि भागीरथपुरा क्षेत्र में 28 और 31 दिसंबर के बीच उर्मिला (60), तारा (65), नंदलाल (70) एवं हीरालाल (65) की डायरिया से मौत हुई है तथा अन्य मृतकों की संख्या का अभी पता नहीं चल सका है। हालांकि इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें दूषित पानी के कारण फैले डायरिया के प्रकोप से 10 मौतों की जानकारी मिली है। उधर, स्थानीय नागरिकों ने इस प्रकोप के कारण छह माह के बच्चे समेत 15 लोगों के दम तोड़ने का दावा किया है। वैसे इस दावे की स्वास्थ्य विभाग ने पुष्टि नहीं की है।




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