मैं ट्रेजरी ऑफिसर बोल रहा हूं, आपकी पेंशन दिलवा दूंगा; MP में रिटायर्ड डीएसपी से ही लाखों की ठगी
भोपाल में रिटायर्ड डीएसपी ही साइबर ठगों के शिकार हो गए। पेंशन और एरियर निकवाने का लालच देकर ठगों ने पीड़ित से लाखों की ठगी कर ली। पुलिस ने मामले का खुलासा कर दिया है।

भोपाल में रिटायर्ड शासकीय कर्मचारियों और अधिकारियों को ठगी के लिए निशाना बनाने वाले गिरोह का आखिरकार भोपाल क्राइम ब्रांच ने खुलासा कर दिया है। गिरफ्तार आरोपी ने इंदौर में रहने वाले रिटायर्ड डीएसपी के साथ ठगी स्वीकार ली है। आजाद नगर पुलिस जल्द ही उसे प्रॉडक्शन वारंट पर इंदौर लाएगी। आरोपी ने खुद को ट्रेजरी ऑफिसर बताकर रिटायर्ड डीएसपी से ही लाखों की ठगी कर दी। उसने पीड़ित को भरोसा दिया कि वह उसकी पेंशन और एरियर का पैसा निकलवा देगा।
डीएसपी के पद से रिटायर हुए पवनपुरी (पालदा) निवासी ध्यानूराव बच्चन (65) से 13 अक्टूबर को ठगी हुई थी। साइबर अपराधी ने कॉल कर उनसे बात की और खुद को ट्रेजरी कार्यालय (भोपाल) में पदस्थ अफसर डीके तिवारी बताया। उसने पेंशन प्रकरण की चर्चा की और ध्यानूराव से आधार व पैन कार्ड सहित अन्य जानकारी ले ली।
लाखों की ठगी
वाट्सएप पर लिंक भेजी और एरियर आदि निकालने का झांसा देकर लिंक के माध्यम से फर्जी एप इंस्टाल करवाते हुए सवा दो लाख रुपए से ज्यादा ठग लिए। परसों रात आजाद नगर पुलिस ने केस दर्ज किया था। मामला जांच में था कि इस बीच अन्य शासकीय कर्मचारियों और अधिकारियों से भी इसी तरह ठगी के मामले सामने आए।
भोपाल क्राइम ब्रांच ने जांच के बाद एक आरोपी प्रशांत कुमार पिता झारखंडी मंडल (32) निवासी अपूर्वा अपार्टमेंट थाना सदर, रांची (झारखंड) को गिरफ्तार कर लिया है। मूलत: ग्राम घोमारज़ थाना मोहनपुर, देवघर (झारखंड) के अपूर्वा कुमार ने पूछताछ में इंदौर के रिटायर्ड डीएसपी ध्यानूराव बच्चन से ठगी स्वीकार ली है। गिरफ्तारी की सूचना पर आजाद नगर पुलिस भोपाल पहुंची थी। पुलिस ने रिमांड पर चल रहे आरोपी की गिरफ्तारी ले ली है। अब उसे पूछताछ के लिए प्रॉडक्शन वारंट पर इंदौर लाया जाएगा।
45 हजार लोगों से 90 करोड़ की ठगी
इंदौर में साइबर ठगी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। पुलिस के जागरूकता अभियान और चेतावनी के बावजूद इस साल अब तक करीब 45 हजार लोगों से करीब 90 करोड़ रुपये की ठगी हो चुकी है। वहीं, ठगी में रिकवरी की राशि बहुत कम है।
डीपी पर लगा मध्यप्रदेश शासन का लोगो
बच्चन बोले, मैंने आरोपी की डीपी देखी तो उस पर मध्यप्रदेश शासन का लोगो था। उसने सेंट्रल पेंशन अकाउंटिंग ऑफिस न्यू दिल्ली की लिंक भेजी थी। उसे असली मानकर मैंने क्लिक कर जानकारी अपलोड कर दी। 16 अक्टूबर की शाम बैंक के दो मैसेज आए।
रिपोर्ट –हेमंत




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