Due to flawed Health system of MP, woman gave birth on the street at 2 AM in the biting cold. MP का लचर हेल्थ सिस्टम; 108 नहीं आई, कड़ाके की ठंड में रात दो बजे बीच सड़क हुई महिला की डिलिवरी, Madhya-pradesh Hindi News - Hindustan
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MP का लचर हेल्थ सिस्टम; 108 नहीं आई, कड़ाके की ठंड में रात दो बजे बीच सड़क हुई महिला की डिलिवरी

महिला दर्द से तड़प रही थी, जिसके बाद उसकी आवाज सुनकर आसपास के लोग वहां पहुंच गए और इसी दौरान पठारी की महिला चौकीदार हरी बाई मौके पर पहुंचीं और मानवता की मिसाल पेश करते हुए हालात संभाले।

Fri, 30 Jan 2026 09:36 PMSourabh Jain लाइव हिन्दुस्तान, विदिशा, मध्य प्रदेश
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MP का लचर हेल्थ सिस्टम; 108 नहीं आई, कड़ाके की ठंड में रात दो बजे बीच सड़क हुई महिला की डिलिवरी

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले से मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख देने वाली घटना सामने आई है, जहां लचर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की वजह से एक गर्भवती महिला की जान पर बन आई। महिला आधी रात को कड़ाके की ठंड में बीच सड़क पर प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी, लेकिन कोई सरकारी सुविधा वहां मौजूद नहीं थी। जिसके बाद एक महिला चौकीदार ने वहां आकर स्थिति को संभाला और मोबाइल टॉर्च की रोशनी में महिला का प्रसव कराते हुए उसकी जान बचाई। इस दौरान आसपास के लोगों ने महिला के आसपास लकड़ी जलाकर वह उसे पॉलिथिन ओढ़ाकर कड़ाके की ठंड से उसे और उसके नवजात को बचाया। अंत में एक स्थानीय निवासी ने रात 3 बजे निजी वाहन से प्रसूतो को अस्पताल पहुंचाया।

ना तो जननी एक्सप्रेस आई, ना 108 एंबुलेंस

प्राप्त जानकारी के अनुसार छपारा गांव निवासी संध्या आदिवासी को देर रात जब प्रसव पीड़ा होने लगी तो परिजनों ने रात करीब 12 बजे 108 एंबुलेंस और जननी एक्सप्रेस को कई बार फोन किया, लेकिन काफी इंतजार के बावजूद कोई सहायता नहीं पहुंची। ऐसे में प्रसूता की लगातार बिगड़ रही हालत को देखते हुए और कोई साधन नहीं होने के कारण परिजन मजबूरी में प्रसूता को पैदल ही अस्पताल ले जाने के लिए निकले, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही गढ़ी मोहल्ला स्थित शासकीय राशन दुकान के सामने संध्या को तेज प्रसव पीड़ा होने लगी और उसके लिए चलना मुश्किल हो गया। ऐसे में महिला सड़क पर ही लेट गई।

कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे हुई डिलीवरी

महिला दर्द से तड़प रही थी, जिसके बाद उसकी आवाज सुनकर आसपास के लोग वहां पहुंच गए और इसी दौरान पठारी की महिला चौकीदार हरी बाई मौके पर पहुंचीं और मानवता की मिसाल पेश करते हुए हालात संभाले। उनकी मदद से रात करीब दो बजे महिला की डिलीवरी कराई गई। कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे महिला ने सड़क पर बच्ची को जन्म दिया। नवजात की नाल जुड़ी होने के कारण प्रसूता को असहनीय पीड़ा झेलनी पड़ी और वह लंबे समय तक सड़क पर तड़पती रही।

तिरपाल ओढ़ाकर बचाई जच्चा-बच्चा की जान

महिला को ठंड से बचाने के लिए ग्रामीण अपने घर से कपड़े, कागज और पन्नी समेत आग जलाने के लिए कई सामान लेकर आ गए। इस बीच हरी बाई ने प्लास्टिक की पन्नी ओढ़ाकर किसी तरह मां और नवजात को बचाने का प्रयास किया। स्थानीय दाई राज बाई की मदद से सुरक्षित डिलीवरी कराई गई। ठंड से बचाव के लिए सिगड़ी जलाकर आग तापने की व्यवस्था की गई।

मदद को आगे आए स्थानीय निवासी, निजी कार से अस्पताल छोड़ा

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय निवासी संजय जैन मदद के लिए आगे आए और उन्होंने रात करीब 3.20 बजे अपनी मारुति वैन से प्रसूता और नवजात को अस्पताल पहुंचाया। इस दौरान हरी बाई के साथ रवि पंथी, मुकेश पंथी और संजय जैन की तत्परता से मां और बच्चे की जान बच सकी।

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प्रसूता के पति संजय आदिवासी ने बताया कि समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण यह भयावह स्थिति बनी। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और आपातकालीन सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों ने दोषियों पर कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

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