‘मैं घोर सनातनी हूं…’ : इंदौर में उषा ठाकुर से बोले दिग्विजय सिंह, बातचीत का वीडियो वायरल
दिग्विजय सिंह ने कहा, “मैं घोषणा करता आया हूं और आज फिर कर रहा हूं कि मैं घोर सनातन धर्म को मानने वाला हूं। मेरे कहने के बाद ही आपने सनातन धर्म को स्वीकार किया है, पहले आप लोग सिर्फ हिंदू-हिंदू धर्म करती थे।”

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और मध्य प्रदेश में भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री उषा ठाकुर के बीच इंदौर में सनातन धर्म को लेकर हुई बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है। भोजशाला विवाद पर हाईकोर्ट के फैसले के बाद इंदौर पहुंचे दिग्विजय सिंह ने उषा ठाकुर से मुलाकात के दौरान खुद को ‘घोर सनातनी’ बताते हुए कई तीखे और दिलचस्प बयान दिए।
दिग्विजय सिंह ने बातचीत के दौरान कहा, “मैं घोषणा करता आया हूं और आज फिर कर रहा हूं कि मैं घोर सनातन धर्म को मानने वाला हूं। मेरे कहने के बाद ही आपने सनातन धर्म को स्वीकार किया है, पहले आप लोग सिर्फ हिंदू-हिंदू धर्म करती थे।”
उन्होंने आगे कहा, “मैं जितना सनातनी हूं… क्या तुमने कभी नर्मदा परिक्रमा की है? क्या तुम एकादशी का व्रत करती हो?” इस पर उषा ठाकुर ने जवाब दिया कि “आप व्यक्तिगत रूप से तो पक्के सनातनी हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से इसे स्वीकार नहीं करते।”
इस पर दिग्विजय सिंह ने तुरंत कहा, “मैं सार्वजनिक रूप से ही तो कह रहा हूं, अब और कैसे सार्वजनिक करूं? मैं सही सनातनी हूं।”
भोजशाला पर बोले- अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट करेगा
भोजशाला विवाद को लेकर दिग्विजय सिंह ने कहा कि अदालत के फैसले का अध्ययन किया जाएगा और देश के कानून व परंपराओं के अनुसार आगे कदम उठाए जाने चाहिए।उन्होंने कहा कि भोजशाला एक एएसआई संरक्षित स्थल है, इसलिए वहां पूजा-अनुष्ठान की अनुमति को लेकर अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट ही करेगा। दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि जामिया मस्जिद, बनारस और अन्य मामलों पर पहले से सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई लंबित है। उन्होंने कहा कि एएसआई की रिपोर्ट में कई दावों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, इसलिए पूरे फैसले की गहराई से जांच जरूरी है।
‘सौहार्द बिगाड़ना ठीक नहीं’
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में सामाजिक चेतना और सौहार्द पहले से चुनौती के दौर से गुजर रहा है, ऐसे समय में किसी एक समुदाय को निशाना बनाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी फैसले संविधान और कानून के दायरे में रहकर होने चाहिए और अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट का ही मान्य होगा।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद सियासत शुरू
बता दें कि, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच द्वारा शुक्रवार को धार में विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को वाग्देवी (सरस्वती) मंदिर घोषित किए जाने के फैसले के बाद से सियासत भी शुरू हो गई है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में भोजशाला परिसर की धार्मिक प्रकृति वाग्देवी मंदिर के रूप में निर्धारित की है। बेंच ने अपने 242 पन्नों के अपने फैसले में एएसआई के 7 अप्रैल 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें मुस्लिमों को हर शुक्रवार इस परिसर में नमाज अदा करने की इजाजत दी गई थी। इस आदेश में हिंदुओं को केवल मंगलवार को स्मारक में पूजा-अर्चना की अनुमति दी गई थी।
रिपोर्ट - हेमंत




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