अयोध्या फैसले के सिद्धांतों से कैसे भोजशाला में खुला मंदिर निर्माण का रास्ता? श्रद्धालुओं ने शुरू की पूजा
इंदौर पुलिस के ग्रामीण रेंज के डीआईजी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि धार में हालात शांतिपूर्ण हैं और श्रद्धालु भोजशाला में दर्शन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए धार में 1,200 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा धार में विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को वाग्देवी (सरस्वती) मंदिर घोषित किए जाने के फैसले से हिन्दू समुदाय में भारी खुशी है। हाईकोर्ट के फैसले के अगले दिन शनिवार को यहां सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लग गया और वे पूजा-अर्चना के लिए पहुंचने लगे।
फूल-मालाएं लेकर पहुंचे श्रद्धालुओं को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के संरक्षित इस स्मारक में सरस्वती वंदना और मंत्रोच्चार करते देखा गया। इन्हीं श्रद्धालुओं में से एक गोकुल नागर ने कहा, ''हमने यह दिन देखने के लिए कई साल संघर्ष किया है। हम बहुत खुश हैं कि अब हम हर दिन भोजशाला में पूजा-अर्चना कर सकेंगे, जबकि पहले हमें केवल मंगलवार को इसका मौका मिलता था।''
एक अन्य श्रद्धालु संजय ने बताया कि वह वाग्देवी की एक तस्वीर को भोजशाला में स्थापित करने की इच्छा के साथ उसे स्मारक में ले जा रहे थे, लेकिन अधिकारियों ने यह कहते हुए उन्हें रोक दिया कि इस विषय में एएसआई के नियम-कायदे अभी तय किए जाने बाकी हैं।उन्होंने कहा कि वह विवादित स्मारक की कानूनी स्थिति को समझते हैं और भोजशाला परिसर में एएसआई अधिकारियों के निर्देशों का पालन करेंगे।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने शुक्रवार को अपने फैसले में भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर की धार्मिक प्रकृति वाग्देवी (सरस्वती) मंदिर के रूप में निर्धारित की। हाईकोर्ट ने अपने 242 पृष्ठों के फैसले में एएसआई के 7 अप्रैल 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें मुस्लिमों को हर शुक्रवार इस परिसर में नमाज अदा करने की इजाजत दी गई थी। इस आदेश में हिंदुओं को केवल मंगलवार को स्मारक में पूजा-अर्चना की अनुमति दी गई थी।
अयोध्या मामले के सिद्धांतों का हवाला देते हुए
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने कहा कि धार में स्थित भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर का धार्मिक स्वरूप "संस्कृत शिक्षा के केंद्र और देवी वाग्देवी/सरस्वती को समर्पित हिंदू मंदिर" का है। अयोध्या मामले के सिद्धांतों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने माना कि पुरातत्व में बहु-विषयक व्याख्या शामिल होती है और कहा कि उसने एएसआई के निष्कर्षों के साथ-साथ ऐतिहासिक और साहित्यिक सामग्री पर भी भरोसा किया है।
हाईकोर्ट ने अपने अवलोकन में कहा कि ऐतिहासिक रिकॉर्ड इस बात का संकेत देते हैं कि यह स्थल परमार वंश के राजा भोज से जुड़ा था और इसमें देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर के संदर्भ मिलते हैं।
कोर्ट ने इस स्थल को 'प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम' के तहत 18 मार्च 1904 से प्रभावी एक संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि इस स्थल के परिरक्षण, संरक्षण और यहां पहुंच के नियमन पर एएसआई का पर्यवेक्षी नियंत्रण जारी रहेगा।
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और एएसआई से कहा है कि वे इस स्थल का प्रशासन और प्रबंधन एक भोजशाला मंदिर और संस्कृत शिक्षा के केंद्र के रूप में अपने हाथ में ले लें और साथ ही धार जिले में मस्जिद के निर्माण के लिए वैकल्पिक जमीन का सुझाव दें।
हम अब से पहले कभी इतने खुश नहीं थे : अशोक कुमार जैन
भोज उत्सव समिति के संरक्षक अशोक कुमार जैन ने कहा, "कल हम जितने खुश थे, उतने पहले कभी नहीं थे। हिंदू समुदाय लंबे समय से संघर्ष कर रहा था और इस संघर्ष में हमारे तीन भाई शहीद हो गए। उन्हीं की वजह से और अनगिनत अन्य लोगों के प्रयासों से ही भोजशाला में मां सरस्वती मंदिर के ताले खुले हैं। आज सुबह, मैं यहां पहुंचने वाला पहला व्यक्ति था और इस उद्देश्य के लिए आंदोलन कर रहे अन्य लोगों के साथ मिलकर, मंदिर में सुबह की पूजा की।"
भोजशाला मुक्ति यज्ञ के कॉर्डिनेटर गोपाल शर्मा ने कहा, "यह मेरी लड़ाई नहीं थी, बल्कि पूरे हिंदू समुदाय की लड़ाई थी। यह सिर्फ एक जगह के लिए नहीं थी, बल्कि हिंदू और सनातन संस्कृति की जीत थी। 720 सालों तक यहां के हिंदू समुदाय ने अपमान महसूस किया और हर तरह का बलिदान दिया, लेकिन कल जो कोर्ट का फैसला आया, वह इस बड़े संघर्ष में सिर्फ एक पड़ाव है। जब तक भोजशाला की गरिमा पूरी तरह से बहाल नहीं हो जाती और यह जगह राजा भोज के समय वाले अपने स्वरूप को फिर से प्राप्त नहीं कर लेती, तब तक धार का हिंदू समुदाय अपने प्रयास जारी रखेगा।
उन्होंने आगे कहा, "मुझे उन सभी लोगों की याद आती है, जिन्होंने सालों तक इस आंदोलन का नेतृत्व किया और जिन्होंने इसे आम लोगों तक पहुंचाने में मार्गदर्शन किया। उनके प्रयासों की वजह से ही यह आंदोलन दूर-दूर तक पहुंचा। भोजशाला अब मां सरस्वती-कंठाभरण के नाम से जानी जाएगी।"
गोपाल शर्मा ने कहा कि मैं हिंदू समुदाय से अपील करता हूं कि वे यहां आएं, पूजा-अर्चना करें और इसे एक मंदिर की तरह मानें, ताकि इसका पूरी तरह से जीर्णोद्धार हो सके।
धार में 1,200 पुलिसकर्मियों की तैनाती
इंदौर पुलिस के ग्रामीण रेंज के डीआईजी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि धार में हालात शांतिपूर्ण हैं और श्रद्धालु भोजशाला में दर्शन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए धार में 1,200 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।
मुस्लिम पक्ष ने घोषणा की है कि वह हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा। वहीं हिंदू पक्ष के एक याचिकाकर्ता की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में 'कैविएट' दाखिल की गई है, जिसमें अनुरोध किया गया है कि भोजशाला विवाद मामले में हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ किसी भी अपील पर कोई भी आदेश उसका पक्ष सुने बिना पारित नहीं किया जाए।




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