भोजशाला में गूंजा हनुमान चालीसा, हिंदू पक्ष की दलील यह मस्जिद नहीं, सरस्वती का मंदिर
धार की भोजशाला में परिसर के बाहर हिंदू पक्ष ने हनुमान चालीसा का पाठ किया और प्रवीण तोगड़िया ने इसे स्पष्ट रूप से मंदिर बताया। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान एएसआई की सर्वे रिपोर्ट और ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर हिन्दू पक्ष ने इसे देवी सरस्वती का मंदिर बताया है।

मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर के बाहर हिंदू समाज ने सत्याग्रह करते हुए हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया ने परिसर का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि यहां शिवलिंग, मूर्तियां और अन्य चिन्ह मौजूद हैं। इसके आधार पर यह स्थान मंदिर होने के साक्ष्य प्रस्तुत करता है। परिसर में वाग्देवी की मूर्ति स्थापित कर निर्बाध पूजा की अनुमति दी जानी चाहिए। परिसर में नमाज पर रोक लगाई जाए। वहीं इस मामले में हाईकोर्ट में नियमित सुनवाई जारी है। हिंदू पक्ष ने अपनी दलीलों में कहा है कि यह देवी सरस्वती का मंदिर है। यह मस्जिद कतई नहीं हो सकता है।
यह मस्जिद तो नहीं हो सकता
बता दें कि भोजशाला को हिंदू पक्ष वाग्देवी का मंदिर मानता है। वहीं मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह विवादित स्थान एएसआई के संरक्षण में है। हिंदू पक्ष ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में सोमवार को अपनी दलीलों में कहा कि यह परिसर मूल रूप से देवी सरस्वती का मंदिर है। यह मस्जिद तो नहीं हो सकता है। ऐतिहासिक रिकॉर्ड और एएसआई की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट मंदिर होने के दावे को सही साबित करते हैं।
परिसर का मूल स्वरूप देवी सरस्वती का मंदिर
इंदौर पीठ ने परिसर के स्वरूप से जुड़ी 4 याचिकाओं और एक रिट अपील पर सोमवार से नियमित सुनवाई शुरू कर दी है। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ सभी पक्षों की दलीलें सिलसिलेवार तरीके से सुन रही है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से वकील विष्णु शंकर जैन ने अदालत में कहा कि ऐतिहासिक रिकॉर्ड, एएसआई की सर्वेक्षण रिपोर्ट और पेश किए गए तथ्य यह साबित करते हैं कि परिसर का मूल स्वरूप देवी सरस्वती का मंदिर है।
परिसर में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां, श्लोकों के शिलालेख मौजूद
विष्णु शंकर जैन ने दावा किया कि इस परिसर में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां, संस्कृत श्लोकों वाले शिलालेख, मंडप और हवन कुंड मौजूद हैं इसलिए यह स्मारक मस्जिद तो नहीं हो सकता है। यह स्मारक उस हिंदू ढांचे का हिस्सा है जिसे धार के परमार राजवंश के राजा भोज ने 1034 ईस्वी में बनवाया था। जैन ने धार पर मुस्लिम आक्रमणकारियों के हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि हिंदू प्रतीकों को मिटाने की कोशिशों के बाद भी हिंदू धर्म से जुड़े निशान आज वहां मौजूद हैं।
एएसआई सुरक्षित स्मारक का नहीं बदला जा सकता धार्मिक स्वरूप
विष्णु शंकर जैन ने कहा कि कानूनी नियमों के अनुसार, एएसआई सुरक्षित किसी भी स्मारक का धार्मिक स्वरूप नहीं बदला जा सकता है इसलिए भोजशाला में सिर्फ हिंदुओं को पूजा का अधिकार मिलना चाहिए। दूसरी तरफ मुस्लिम पक्ष के वकील ने मांग की कि उन्हें हिंदू पक्ष की याचिका से जुड़े सभी दस्तावेजों की कॉपियां दी जाएं। हाई कोर्ट ने यह मांग मान ली। अदालत ने कहा कि सभी दलीलें पूरी होने के बाद हर पक्ष अपनी आपत्तियां रख सकता है जिन पर कोर्ट विचार करेगा।
एएसआई ने अपनी सर्वे रिपोर्ट में क्या कही थी बात?
सनद रहे कि एएसआई ने हाईकोर्ट के आदेश पर दो साल पहले विवादित परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करके अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी। एएसआई की 2,000 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि इस परिसर में धार के परमार राजाओं के शासनकाल की एक विशाल संरचना पहले से मौजूद थी वहां बना विवादित ढांचा पुराने मंदिरों के हिस्सों का इस्तेमाल करके बनाया गया है।
मुस्लिम पक्ष ने एएसआई सर्वे पर उठाए थे सवाल
इसके बाद मुस्लिम पक्ष ने एएसआई के सर्वेक्षण पर सवाल उठाया था। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि भोजशाला परिसर मूल रूप से एक मंदिर है। मुस्लिम पक्ष का आरोप है कि एएसआई ने उसकी पुरानी आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए विवादित परिसर में पीछे के रास्ते से रखी गईं चीजों को भी सर्वेक्षण में शामिल कर लिया। कुल मिलाकर इस विवादित परिसर को लेकर हिन्दू और मुस्लिम पक्ष की खींचतान जारी है। मामला अदालत में है। अदालत मामले की रोजाना सुनवाई कर रही है।
नमाज बंद करने की मांग
इस बीच भोजशाला परिसर के बाहर हिंदू समाज ने हनुमान चालीसा का पाठ और पूजा की। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया वहां पहुंचे। भोज उत्सव समिति के गोपाल शर्मा ने उन्हें इस जगह के इतिहास और अभी की स्थिति के बारे में बताया। तोगड़िया ने मीडिया से कहा कि परिसर में मौजूद शिवलिंग और मूर्तियों के चिन्ह यह साबित करते हैं कि यह एक मंदिर है। उन्होंने मांग की कि यहां वाग्देवी की मूर्ति फिर से स्थापित की जाए और केवल हिंदुओं को पूजा की अनुमति मिले जबकि नमाज बंद हो।




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