मंदिर की जमीन पर मस्जिद? प्रशासन की क्लीनचिट से भड़का हिंदू संगठन, कलेक्टर का अर्थी जुलूस निकाला
हिन्दू पक्ष के लोगों का आरोप है कि मुस्लिम समाज के लोगों ने गायत्री मंदिर की जमीन पर कब्जा करके अवैध रूप से मस्जिद का निर्माण किया है। निकाले गए जुलूस की भीड़ को नियंत्रण में करने के लिए पुलिस ने पानी की बौछारों का भी इस्तेमाल किया।

मध्य प्रदेश के जबलपुर में मस्जिद निर्माण को लेकर प्रशासन की तरफ से मस्जिद कमेटी को क्लीनचिट दे दी गई है। गुस्साए हिन्दू संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए सड़कों पर कलेक्टर का अर्थी जुलूस निकाला। हिन्दू पक्ष के लोगों का आरोप है कि मुस्लिम समाज के लोगों ने गायत्री मंदिर की जमीन पर कब्जा करके अवैध रूप से मस्जिद का निर्माण किया है। निकाले गए जुलूस की भीड़ को नियंत्रण में करने के लिए पुलिस ने पानी की बौछारों का भी इस्तेमाल किया।
सूत्र से मिली जानकारी के के मुताबिक हिंदू वादी संगठन मस्जिद को तोड़ने जा रहा था। पुलिस को इसकी भनक लगते ही भारी पुलिस बल तैनात किया गया, रोकने के क्रम में दोनों तरफ से झड़प भी हुई। पुलिस ने बेकाबू भीड़ को काबू में करने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। गुस्साए लोगों ने जिला कलेक्टर का अर्थी जुलूस निकालकर पुतला फूंका। इसके अलावा कलेक्टर को हटाने की मांग भी की गई।
काफी समझाने के बाद हिंदू वादी संगठन ने जिला प्रशासन को चरमबद्ध तरीके से आंदोलन का अल्टीमेटम दिया है और 16 तारीख को जबलपुर बंद का आह्वान किया है। इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है। किसी भी तरह की हिंसा ना हो, इसके लिए प्रशासन ने मौके पर पुलिस बल तैनात किया हुआ है।
पूरा मामला जबलपुर के मड़ई इलाके में मस्जिद निर्माण से जुड़ा है। इसे लेकर ही हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन किया है। हिन्दू संगठन का आरोप है कि गायत्री मंदिर की जमीन पर अवैध रूप से मस्जिद का निर्माण किया गया है। हिंदू वादी संगठन के मुताबिक राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज खसरा नंबर 169 पर मस्जिद का निर्माण कैसे कर लिया गया। वक्फ बोर्ड के नाम पर मात्र 1000 वर्ग फीट भूमि का आवंटन है।
मस्जिद का निर्माण करीब 3000 वर्ग फीट में कर दिया गया है। मस्जिद की आड़ में अवैध रूप से मदरसा संचालित होने के भी आरोप लगाए गए है। मिली जानकारी के अनुसार गायत्री बाल मंदिर ट्रस्ट या कोरी परिवार की ओर से किसी प्रकार की कोई शिकायत दर्ज नहीं करवाई गई है।
मस्जिद कमेटी ने मामला हाईकोर्ट में दायर किया था, लेकिन दस्तावेज न होने के चलते केस वापस लेना पड़ा। विवाद 2021 से चल रहा है। प्रशासन ने मस्जिद को लेकर क्लीनचिट दे दी है। इसके बाद हिंदू वादी संगठन के लोग भड़क गए और सूत्र अनुसार मस्जिद के अवैध हिस्से को तोड़ने की मांग करने लगे।
रिपोर्ट- विजेन्द्र यादव




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