ट्विशा शर्मा मौत मामले में CBI जांच की सिफारिश करेगी MP सरकार, CM मोहन यादव का बड़ा बयान
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हुई ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत मामले में हर दिन एक नया मोड़ देखने को मिल रहा है। अब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार नोएडा की बेटी की मौत की सीबीआई जांच की सिफारिश करेगी।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हुई ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत मामले में हर दिन एक नया मोड़ देखने को मिल रहा है। अब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार नोएडा की बेटी की मौत की सीबीआई जांच की सिफारिश करेगी। मुख्यमंत्री का यह बयान उस फैसले के बाद आया है, जिसमें भोपाल की एक अदालत ने ट्विशा के शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने की उसके परिजनों की मांग को खारिज कर दिया था। इस दौरान मजिस्ट्रेट ने मौखिक रूप से यह भी कहा कि अब तक हुई जांच के आधार पर दूसरी बार पोस्टमॉर्टम करवाने की जरूरत नहीं है।
दरअसल मुख्यमंत्री ने सीबीआई जांच का आश्वासन उस वक्त दिया, जब ट्विशा के परिजन बुधवार को राज्य सचिवालय में मुख्यमंत्री मोहन यादव से मिलने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने ट्विशा की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग की। इसी दौरान मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया कि मध्य प्रदेश सरकार महिला की मौत की CBI जांच की सिफारिश करेगी। इस बारे में जारी एक आधिकारिक बयान में बताया गया कि मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने उन्हें राज्य सरकार की ओर से हर संभव मदद देने का भरोसा दिलाया। CM ने कहा कि वह CBI (केंद्रीय जांच एजेंसी) को पत्र लिखकर इस मामले की जांच अपने हाथ में लेने का आग्रह करेंगे। यादव से मिलने वालों में ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा और उसके भाई शामिल थे। मुख्यमंत्री ने उनसे यह भी कहा कि यदि परिजन चाहते हैं तो पार्थिव शरीर को दिल्ली स्थित एम्स ले जाने के लिए परिवहन सुविधा भी उपलब्ध करा दी जाएगी।
अदालत ने ट्विशा का शव सुरक्षित रखने को कहा
उधर भोपाल की एक अदालत ने बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान ट्विशा शर्मा के शव को सुरक्षित रखने का आदेश दिया। ट्विशा ने पिछले हफ्ते अपने भोपाल स्थित अपने ससुराल में कथित रूप से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। हालांकि महिला के परिजनों ने इस मामले को संदिग्ध बताते हुए उसके ससुराल वालों पर बेटी की हत्या करने का शक जताया है। उनका आरोप था कि ट्विशा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उसके शरीर पर मारपीट के निशान मिले हैं, जो कि मामले को संदिग्ध बना रहे हैं। इसी वजह से उन्होंने ट्विशा के दोबारा पोस्टमॉर्टम की मांग की थी, लेकिन अदालत ने उनकी इस अर्जी को खारिज कर दिया।
शव को सुरक्षित रखने वाली मोर्चरी का पता लगाने को कहा
इस बारे में एक आदेश जारी करते हुए JMFC (न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी) अनुदिता गुप्ता ने कहा कि पुलिस को एक पत्र जारी किया जाए, जिसमें उसे निर्देश दिया जाए कि वे मध्यप्रदेश में शवों को सुरक्षित रखने की (-80 डिग्री सेल्सियस तापमान) व्यवस्था वाले मोर्चरी की तुरंत जानकारी प्राप्त करे और बिना किसी देरी के अदालत में इस संबंध में एक लिखित रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
भोपाल एम्स में है शव के खराब होने का खतरा
दरअसल अदालत ने ऐसा निर्देश से इस वजह से जारी किया, क्योंकि इससे कुछ घंटे पहले ही भोपाल पुलिस ने ट्विशा शर्मा के परिवार से शव के खराब होने की आशंकाओं के मद्देनजर उसे कब्जे में लेने का अनुरोध किया था। पुलिस ने इसकी वजह AIIMS भोपाल में बहुत कम तापमान पर शव को सुरक्षित रखने की सुविधाओं की कमी के कारण शव के सड़ने की आशंका बताई थी।
भोपाल एम्स में नहीं है -80 डिग्री के तापमान की सुविधा
इस बारे में ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा को लिखे एक पत्र में पुलिस ने बताया था कि ट्विशा की मौत के बाद 13 मई को उसका पोस्टमॉर्टम किया गया था, और फिलहाल शव को एम्स भोपाल के शवगृह में शून्य से चार डिग्री सेल्सियस नीचे (माइनस -4 डिग्री) तापमान पर सुरक्षित रखा गया है। जबकि शव को खराब होने से रोकने के लिए शून्य से 80 डिग्री सेल्सियस (-80 डिग्री) नीचे का तापमान चाहिए और यह सुविधा एम्स भोपाल में नहीं है।
ट्विशा के परिजनों को भोपाल में न्याय मिलने की उम्मीद नहीं
बता दें कि ट्विशा 12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स इलाके स्थित अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं। इसके बाद पुलिस ने महिला के परिजनों की शिकायत पर मृतका के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज मृत्यु तथा प्रताड़ना का मामला दर्ज किया था। मृतका की सास गिरिबाला सिंह सेवानिवृत्त न्यायाधीश हैं और ट्विशा के परिजनों ने इसी कारणवश उन्होंने भोपाल में बेटी को न्याय नहीं मिलने की आशंका जताई है।
अबतक नहीं हुआ है ट्विशा का अंतिम संस्कार
इससे पहले एम्स भोपाल की प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शव पर कई चोटों के निशान होने के बारे में बताया गया था, इसी आधार पर मृतका के परिजन बेटी की हत्या होने की आशंका जता रहे हैं। साथ ही मृतका के परिजनों का यह भी आरोप है कि पोस्टमार्टम प्रक्रिया के दौरान गंभीर लापरवाही बरती गई। उनका कहना है कि जिस बेल्ट से ट्विशा के फांसी लगाने की बात कही गई, उसे जांच अधिकारी समय पर एम्स नहीं ले गए, जिसके कारण डॉक्टर उस बेल्ट और गर्दन के निशानों का वैज्ञानिक परीक्षण नहीं कर सके। इसके अलावा परिजनों ने यह भी कहा कि ट्विशा के मृत पाए जाने के तीन दिन बाद FIR दर्ज की गई। इन्हीं सब वजहों से मौत के नौ दिन बाद भी ट्विशा का अंतिम संस्कार नहीं किया गया है।
पहले पोस्टमॉर्टम में लगाया गड़बड़ी का आरोप
इससे पहले ट्विशा के परिजनों ने दिल्ली एम्स में अपनी बेटी के शव का पोस्टमॉर्टम कराने की मांग करते हुए अर्जी लगाई थी। इस बारे में उनके वकील ने कहा था कि ट्विशा के माता-पिता को आशंका है कि उसकी सास सेवानिवृत्त अतिरिक्त जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की बहन भोपाल की सर्जन हैं, जिन्हें पहला पोस्टमार्टम किए जाने के दौरान एम्स भोपाल के आसपास देखा गया था। इसी आधार पर उन्होंने शक जताया कि अगर दूसरा पोस्टमॉर्टम भी शहर के किसी अस्पताल में होता है तो वह दूसरी रिपोर्ट को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि कोर्ट ने दोबारा पोस्टमॉर्टम की उनकी मांग को खारिज कर दिया।




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