BPL student seeks info by RTI in MP, power distribution company asked to pay 4 Lacs fee MP में कानून के छात्र ने RTI के तहत मांगी जानकारी, बिजली कंपनी बोली- पहले 4 लाख रुपए जमा कराओ, Madhya-pradesh Hindi News - Hindustan
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MP में कानून के छात्र ने RTI के तहत मांगी जानकारी, बिजली कंपनी बोली- पहले 4 लाख रुपए जमा कराओ

शिकायत मिलते ही राज्य मानवाधिकार आयोग ने इसे गंभीरता से लिया और जबलपुर जिला कलेक्टर को मामले की निष्पक्ष जांच करने और उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही इस पूरे मामले को लेकर आयोग ने एक रिपोर्ट भी मांगी है।

Tue, 3 Feb 2026 05:20 PMSourabh Jain लाइव हिन्दुस्तान, जबलपुर, मध्य प्रदेश
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MP में कानून के छात्र ने RTI के तहत मांगी जानकारी, बिजली कंपनी बोली- पहले 4 लाख रुपए जमा कराओ

MP के जबलपुर से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, यहां पर एक BPL (गरीबी रेखा से नीचे) कार्ड धारक छात्र को सूचना के अधिकार (RTI) कानून के तहत जानकारी मांगना भारी पड़ गया, क्योंकि संबंधित विभाग ने जानकारी देने के एवज में छात्र को 4.08 लाख रुपए की फीस जमा करने को कहा है। जिसके बाद राज्य मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए कलेक्टर को जांच कर कार्रवाई करने के लिए कहा है।

कर्मचारियों के बारे में मांगी थी जानकारी

TOI की रिपोर्ट के अनुसार कानून की पढ़ाई कर रहे अमन वंशकार ने मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (पॉवर डिस्कॉम) जबलपुर के मानेगांव पिपरिया वितरण केंद्र (DC) में एक RTI आवेदन लगाया था, और इसके जरिए विभाग से नियमित और आउटसोर्स कर्मचारियों की जानकारी के साथ-साथ रजिस्टर्ड उपभोक्ताओं की प्रमाणिक जानकारी भी मांगी थी।

BPL कार्डधारी छात्र से मांगी फीस, जबकि नियम कुछ और

अमन ने अपने RTI आवेदन के साथ वो सभी जरूरी कागजात भी जमा किए थे, जिनसे पता चल रहा था कि वह गरीबी रेखा के नीचे (BPL) वाली श्रेणी के परिवार से आता है, क्योंकि ऐसे आवेदकों को RTI एक्ट के तहत मुफ्त में जानकारी मांगने का अधिकार है। RTI अधिनियम, 2005 की धारा 7(5) के अनुसार, बीपीएल श्रेणी के आवेदकों से सूचना प्रदान करने के लिए कोई भी शुल्क नहीं लिया जा सकता है।

छात्र ने खटखटाया मानवाधिकार आयोग का दरवाजा

हालांकि BPL वर्ग के व्यक्ति को निःशुल्क जानकारी देने का नियम होने के बावजूद संबंधित लोक सूचना अधिकारी और संबंधित असिस्टेंट इंजीनियर ने नियम विरूद्ध जाकर मांगी गई जानकारी देने के बदले छात्र को 4.08 लाख रुपए जमा करने का नोटिस दे दिया। जिसके बाद विभाग की इस मांग से परेशान होकर वंशकार ने राज्य मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया और इसे RTI एक्ट, 2005 के प्रावधानों का सीधा उल्लंघन बताया।

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मानवाधिकार आयोग ने कलेक्टर से कार्रवाई करने को कहा

शिकायत मिलते ही राज्य मानवाधिकार आयोग ने इसे गंभीरता से लिया और जबलपुर जिला कलेक्टर को मामले की निष्पक्ष जांच करने और उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही इस पूरे मामले को लेकर आयोग ने एक रिपोर्ट भी मांगी है। उधर लोगों का कहना है कि इस मामले ने सरकारी विभागों द्वारा RTI नियमों के पालन में मानदंडों की अनदेखी और इस कानून के तहत जानकारी मांगने वाले आर्थिक रूप से कमजोर आवेदकों के साथ किए जाने वाले व्यवहार पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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