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बंधक मजदूर पिता चार दिन बाद गोद में नवजात का शव लेकर पहुंचा, MP में इंसानियत शर्मसार

मध्य प्रदेश के सीहोर जिला अस्पताल से शुक्रवार को एक मार्मिक मामला सामने आया। कर्ज में बंधक बनाए जाने का आरोप लगाने वाला एक मजदूर पिता चार दिन बाद अपनी नवजात बेटी का शव गोद में लेकर अस्पताल से निकला। बच्ची का शव चार दिनों तक अस्पताल की मर्चुरी में रखा रहा।

Fri, 8 May 2026 04:05 PMSubodh Kumar Mishra वार्ता, सिहोर
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बंधक मजदूर पिता चार दिन बाद गोद में नवजात का शव लेकर पहुंचा, MP में इंसानियत शर्मसार

मध्य प्रदेश के सीहोर जिला अस्पताल से शुक्रवार को एक मार्मिक मामला सामने आया। कर्ज में बंधक बनाए जाने का आरोप लगाने वाला एक मजदूर पिता चार दिन बाद अपनी नवजात बेटी का शव गोद में लेकर अस्पताल से निकला। बच्ची का शव चार दिनों तक अस्पताल की मर्चुरी में रखा रहा।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, आष्टा तहसील के ग्राम हकीमाबाद निवासी रवि रघुवंशी और उसकी पत्नी अंजलि के यहां 24 मार्च को जुड़वा बच्चियों का जन्म हुआ था। प्रसव के दौरान एक बच्ची की मौत हो गई थी, जबकि दूसरी बच्ची समय से पहले जन्म लेने के कारण बेहद कमजोर थी। उसका वजन मात्र 1.4 किलोग्राम था, जिसके चलते उसे जिला अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था।

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डॉक्टरों के अनुसार बच्ची का पिछले 40 दिनों से उपचार चल रहा था, लेकिन हालत लगातार गंभीर बनी रही। तीन मई को उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन अस्पताल रिकॉर्ड में माता-पिता का मोबाइल नंबर दर्ज नहीं था। केवल खेत मालिक का नंबर उपलब्ध था। चार दिन तक कोई परिजन अस्पताल नहीं पहुंचा, जिसके बाद अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को सूचना दी।

पुलिस जांच में पता चला कि बच्ची के माता-पिता मजदूरी के लिए देवास जिले के सोनकच्छ क्षेत्र के जालेरिया गांव में थे। पुलिस टीम उन्हें वहां से सीहोर लेकर आई, जिसके बाद बच्ची का शव परिजनों को सौंपा गया।

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पिता रवि रघुवंशी ने आरोप लगाया कि वह किसान मनोज जाट के यहां मजदूरी करता था और उस पर करीब 70 हजार रुपए का कर्ज था। उसने आरोप लगाया कि कर्ज के बदले उसे और उसके साथी को जबरन रोककर रखा गया था तथा कई बार अस्पताल जाने की अनुमति मांगने के बावजूद जाने नहीं दिया गया। रवि ने कहा कि यदि उसे समय पर अस्पताल पहुंचने दिया जाता तो शायद उसकी बच्ची की जान बच सकती थी।

सीहोर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. यू.के. श्रीवास्तव ने बताया कि बच्ची प्रीमैच्योर थी और जन्म से ही उसकी स्थिति बहुत कमजोर थी। डॉक्टरों ने उसे बचाने का पूरा प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी।

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सीएसपी अभिनंदना शर्मा ने कहा कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि मजदूर को वास्तव में बंधक बनाकर रखा गया था या नहीं। आरोप सही पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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