मध्य प्रदेश में बड़ा डामर घोटाला, फर्जी इनवॉइस से निकाल लिए 18 करोड़ रुपए; 44 लोगों पर केस दर्ज
मध्य प्रदेश के रीवा और मऊगंज जिले में बड़े स्तर पर सड़क निर्माण कार्यों में डामर घोटाले का मामला सामने आया है। ईओडब्ल्यू रीवा ने एमपीआरआरडीए से जुड़े अधिकारियों और संविदाकारों के खिलाफ खराब डामर के उपयोग और फर्जी इनवॉइस मामले में केस दर्ज किया है।

मध्य प्रदेश के रीवा और मऊगंज जिले में बड़े स्तर पर सड़क निर्माण कार्यों में डामर घोटाले का मामला सामने आया है। ईओडब्ल्यू रीवा ने एमपीआरआरडीए से जुड़े अधिकारियों और संविदाकारों के खिलाफ खराब डामर के उपयोगऔर फर्जी इनवॉइस के जरिए 18 करोड़ से ज्यादा के भुगतान प्राप्त करने के आरोप में, रीवा में 27 और मऊगंज में 17 कुल 44 लोगों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है। आरोप है कि गुणवत्ताविहीन डामर का उपयोग कर उसके स्थान पर उच्च गुणवत्ता के डामर का फर्जी बिल लगाकर कई करोड़ों का घोटाला किया है।
कैसे किया घोटाला
जांच में सामने आया है कि सड़क निर्माण कार्यों में वास्तविक डामर के स्थान पर निम्न गुणवत्ता का डामर इस्तेमाल किया गया। जबकि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के नाम से उच्च गुणवत्ता के डामर के फर्जी बिल लगाकर कर भारी भुगतान हासिल किया गया। दस्तावेजों के अनुसार, रीवा जिले में कुल 12 करोड़ 71 लाख 6 हजार 372 रुपये तथा मऊगंज जिले में 5 करोड़ 88 लाख 26 हजार 713 रुपये का भुगतान किया गया। यह राशि फर्जी इनवॉइस के आधार पर निकाली गई है। प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2017 से 2021 के बीच एमपीआरआरडीए की परियोजनाओं के तहत कार्यरत संविदाकारों ने। विभागीय अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए। इन दस्तावेजों के आधार पर भुगतान प्रक्रिया को अंजाम दिया गया।
44 के खिलाफ केस दर्ज
इस मामले में रीवा ईओडब्ल्यू ने, रीवा में 27 और मऊगंज में 17 कुल मिलाकर 44 आरोपियों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया है। इनमें तत्कालीन महाप्रबंधक, सहायक प्रबंधक, उपयंत्री, संविदाकार और अन्य संबंधित लोग शामिल हैं।ईओडब्ल्यू ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 (फर्जी दस्तावेज) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इतने बड़े घोटाले के उजागर होने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने पर और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। सड़क निर्माण जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं में इस तरह की धांधली न केवल सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि जनता की सुरक्षा और विश्वास दोनों पर सवाल खड़े करती है।
इनपुट: सादाब सिद्दीकी




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