भोजशाला पर हाई कोर्ट ने तो फैसला सुना दिया, पर अब आगे क्या करेगा मुस्लिम पक्ष? ये होगा अगला कदम
11वीं सदी के इस स्मारक पर हिंदू और मुस्लिम समुदाय लंबे समय से दावा करते रहे हैं। हिंदू समुदाय भोजशाला को वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। वहीं, जैन समुदाय का एक समूह भी इस एतिहासिक स्थल पर अपना दावा जताता है।

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर विवाद पर शुक्रवार को फैसला सुना दिया। हाईकोर्ट ने धार में भोजशाला को हिंदू मंदिर करार दिया है। कोर्ट ने फैसले सुनाते हुए कहा कि भोजशाला में संस्कृत शिक्षण केंद्र और देवी सरस्वती का मंदिर होने के संकेत मिले हैं ।
कोर्ट ने मुस्लिमों को हर शुक्रवार भोजशाला परिसर में नमाज अदा करने की इजाजत देने के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के सात अप्रैल 2003 के आदेश को भी रद्द कर दिया। कोर्ट ने धार में ही मस्जिद के लिए जमीन आवंटन का फैसला भी राज्य सरकार पर छोड़ दिया।
सुप्रीम कोर्ट में फैसले को चुनौती देगा मुस्लिम पक्ष
मुस्लिम पक्ष का कहना है कि वह इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। फैसले पर धार शहर के काजी वकार सादिक ने कहा है कि हम अपने खिलाफ दिए गए फैसले की समीक्षा करेंगे। हम इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। हाई कोर्ट के फैसले की समीक्षा करेंगे।
फैसले पर हिंदू पक्ष के वकील ने क्या कहा?
हिंदू पक्ष के वकील शिरीष दुबे ने कहा, ‘हाई कोर्ट के आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भोजशाला राजा भोज द्वारा निर्मित मां सरस्वती का मंदिर है। न्यायालय ने मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी है। हिंदू पक्ष द्वारा दायर दोनों याचिकाएं स्वीकार कर ली गई हैं और उनकी मांगें पूरी कर दी गई हैं। कई लोगों ने अपनी जवानी इस आंदोलन को समर्पित कर दी। कई लोगों ने इसके लिए अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण कई वर्षों का बलिदान किया। इस संघर्ष में तीन लोग शहीद हुए और हजारों माताओं, बहनों और अन्य महिलाओं ने परेशानी झेली। मेरा मानना है कि आज का यह फैसला उनके संघर्ष और बलिदानों का ही नतीजा है।’
क्या है विवाद?
आपको बता दें कि 11वीं सदी के इस स्मारक पर हिंदू और मुस्लिम समुदाय लंबे समय से दावा करते रहे हैं। हिंदू समुदाय भोजशाला को वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। वहीं, जैन समुदाय का एक समूह भी इस एतिहासिक स्थल पर अपना दावा जताता है। हिंदू पक्ष का दावा है कि यहां पहले मंदिर था जिसे बाद में तोड़कर मस्जिद का निर्माण कर लिया गया था। यह विवादित परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में है।
सर्वे रिपोर्ट पर सवाल उठाते थे
मुस्लिम पक्ष ने एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर भी सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए थे। मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट के सामने दावा किया था कि एएसआई की सर्वे रिपोर्ट ‘पक्षपातपूर्ण’ और इसे हिंदू याचिकाकर्ताओं के दावों का समर्थन करने मकसद से तैयार की गई है।




साइन इन