MP में एक IPS समेत चार पुलिसकर्मियों पर लूट व डकैती का केस, अदालत ने हाजिर होने को कहा
मामले में रेडियो पुलिस अधीक्षक की जांच का भी जिक्र सामने आया, जिसमें थाने के स्टाफ को पहले ही कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके थे। अदालत ने इसे भी रिकॉर्ड पर लिया। पुलिस का दावा है कि यह मामला नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह की जांच से जुड़ा है।

मध्य प्रदेश में ग्वालियर की विशेष सत्र अदालत के कहने पर दो साल पुराने के मामले को लेकर एक IPS अधिकारी समेत चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ डकैती, लूट और साजिश रचने का मामला दर्ज किया गया है। आरोपी पुलिसकर्मियों में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक राजेश चंदेल, तत्कालीन थाटीपुर थाना प्रभारी सुरेंद्र नाथ सिंह, सब इंस्पेक्टर अजय सिंह और हवलदार संतोष वर्मा शामिल हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने इन चारों आरोपियों को 22 जून 2026 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए समन भी जारी किया है।
यह मामला साल 2024 का है, जब अनूप राणा नाम के शख्स ने कोर्ट में शिकायत करते हुए आरोप लगाया था कि पुलिसकर्मियों ने उसके परिवार से करीब 30 लाख रुपए की अवैध वसूली की है। जिसके बाद पिछले दो साल से कोर्ट में इस केस की सुनवाई चल रही थी, जिस पर सोमवार को आदेश सुनाया गया।
पीड़ितों के घर से लिए थे कुल 24.5 लाख रुपए
शिकायतकर्ता पक्ष के अधिवक्ता अशोक प्रजापति ने मामले ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि अनूप राणा के भाई पर थाटीपुर थाने में धोखाधड़ी का केस दर्ज था, जिसमें फरियादी से समझौता हो चुका था। आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस ने पहले 5 लाख रुपए लिए और बाद में और पैसों की मांग करने लगी। कोर्ट में दी गई दलील के अनुसार तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेंद्र नाथ सिंह के इशारे पर हवलदार संतोष वर्मा ने अनूप राणा के घर से 9.50 लाख रुपए और मामले से जुड़ी एक महिला आरोपी के घर से 15 लाख रुपए लिए।

SP से शिकायत की तो शिकायतकर्ता को ही गिरफ्तार कर लिया गया
अनूप राणा ने जब तत्कालीन SP राजेश चंदेल से इस मामले की लिखित शिकायत की, तो कार्रवाई करने के बजाय उनके द्वारा यह मामला दोबारा थाटीपुर थाना भेज दिया गया। आरोप है कि इसके बाद पुलिस ने अनूप राणा को ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने साल 2024 में अदालत का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने थाटीपुर थाने के CCTV फुटेज मांगे, इस पर पुलिस की ओर से कहा गया कि 3 जनवरी 2024 से पहले के फुटेज डिलीट हो चुके हैं। जिसके बाद कोर्ट ने पुलिस के इस जवाब पर सख्त नाराजगी जताई।
पुलिस के अनुसार मामला नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह से जुड़ा
मामले में रेडियो पुलिस अधीक्षक की जांच का भी जिक्र सामने आया, जिसमें थाने के स्टाफ को पहले ही कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके थे। अदालत ने इसे भी रिकॉर्ड पर लिया। पुलिस का दावा है कि यह मामला नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह की जांच से जुड़ा है और अनूप राणा व उसका भाई उसी रैकेट का हिस्सा थे। वहीं, अनूप राणा का कहना है कि वह खुद ठगी का शिकार हुआ था और अपने भाई की मदद के लिए थाने पहुंचा था, लेकिन पुलिस ने उसे ही आरोपी बना दिया। आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों को बचाते हुए उससे और उसके भाई से लाखों रुपए वसूले थे।




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