महाराष्ट्र के 5 अद्भुत शिव मंदिरों के सावन में कर आएं दर्शन, बरसती है भोले बाबा की कृपा Visit these 5 amazing Shiva temples of Maharashtra in the month of Sawan, Travel news in Hindi - Hindustan
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महाराष्ट्र के 5 अद्भुत शिव मंदिरों के सावन में कर आएं दर्शन, बरसती है भोले बाबा की कृपा

सावन के महीने में शिव भक्त भोलेनाथ के अलग-अलग मंदिरों के दर्शन करने के लिए जाते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल में हम आपको भोलेनाथ के 5 ऐसे मंदिरों के बारे में बता रहे हैं जो महाराष्ट्र में हैं। जानिए-

Wed, 16 July 2025 04:20 PMAvantika Jain लाइव हिन्दुस्तान
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महाराष्ट्र के 5 अद्भुत शिव मंदिरों के सावन में कर आएं दर्शन, बरसती है भोले बाबा की कृपा

सावन का महीना पूरी तरह से भगवान शिव को समर्पित है। इस महीने में सभी लोग रोजाना घर के पास शिव मंदिर में ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के साथ ही एक लोटा जल और बेलपत्र चढ़ाकर भोलेनाथ को प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं। कहते हैं कि सच्चे मन से जो भक्तों भोलेनाथ की पूजा करता है उसकी मनोकामना पूर्ण होती है। बहुत से भक्त सावन महीने के दौरान फेमस शिव मंदिरों के दर्शन के लिए जाते हैं। ऐसे में हम इस आर्टिकल में महाराष्ट्र के फेमस 5 शिव मंदिर के बारे में बता रहे हैं।

1) भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग

महाराष्ट्र के पांच ज्योतिर्लिंगों में से एक होने के अलावा भीमाशंकर अपने स्थान के लिए भी जाना जाता है। यह भीमा नदी के पास स्थित है। कहा जाता है कि महादेव ने जिस स्थान पर भीमा का वध किया था, उसी जगह पर देवताओं ने भगवान शिव से शिवलिंग रूप में प्रकट होने की प्रार्थना की। भोलेनाथ ने देवताओं की यह अर्जी भी मान ली और उसी स्थान पर शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए। तभी से इस स्थान को भीमाशंकर के नाम से जाना जाता है।

2) घृष्णेश्वर मंदिर

घृष्णेश्वर मंदिर अपनी नक्काशी और मूर्तियों के लिए फेमस है। मंदिर का निर्माण खासतौर से लाल ज्वालामुखीय चट्टानों से किया गया है। इस मंदिर को घुश्मेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और भगवान शिव को समर्पित है।

3) औंधा नागनाथ ज्योतिर्लिंग

औंधा नागनाथ मंदिर की एक विशिष्ट विशेषता इसका गर्भगृह है। जहां पर मुख्य देवता यानी शिव लिंग विराजमान है। यह मंदिर सुंदर नक्काशी से सजा हुआ है।

4) परली वैजनाथ ज्योतिर्लिंग

कहा जाता है कि परली वैजनाथ ज्योतिर्लिंग की कहानी रावण और भगवान शिव से जुड़ी है। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए रावण ने घोर तपस्या की। जिसके बाद रावन से प्रसन्न होकर भोलेनाथ ने उसके साथ लंका साथ जाने का वरदान दिया। लेकिन एक शर्त पर की शिवलिंग को रास्ते में कहीं भी रखा तो वह दोबारा नहीं उठेगा। रावण जब शिवलिंग को लेकर लंका जा रहा था तभी लघुशंका लगने पर उन्होंने शिवलिंग एक ग्वाले को पकड़ाया और उसने शिवलिंग को जमीन पर रख दिया, जिसके बाद वह उठ नहीं पाया। जिसके बाद परली वैजनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना हुई।

5) त्र्यंबकेश्वर मंदिर

त्र्यंबकेश्वर महाराष्ट्र के नासिक शहर के पास है। त्र्यंबकेश्वर मंदिर सभी ज्योतिर्लिंगों में अद्वितीय है क्योंकि यहां स्थित शिवलिंग के तीन मुख हैं।

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