महाकाल रूप में प्रकट हुए थे भगवान शिव, क्या पता है महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की कहानी?
12 ज्योर्तिलिंगों में से एक महाकाल मंदिर उज्जैन में है। ये मंदिर पूरी दुनिया में काफी मशहूर है। आइए, इस आर्टिकल में जानते हैं महाकालेश्वर मंदिर की दिलचस्प कहानी-

मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी कहा जाने वाला उज्जैन पूरी दुनिया में काफी मशहूर है। यहां 12 ज्योर्तिलिंगों में से एक महाकाल मंदिर शिप्रा नदी के तट पर स्थित है। ये जगह महाकालेश्वर मंदिर के अलावा हर 12 साल में लगने वाले कुंभ मेले के लिए भी फेमस है। ये मंदिर आध्यात्मिक पर्यटन स्थलों में शामिल रहा है। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव मृत्यु और समय के देवता हैं। इसी कारण उन्हें महाकालेश्वर कहा जाता है और इस मंदिर को महाकाल मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। आइए, जानते हैं इस मंदिर से जुड़ी कहानी।
स्वयंभू है महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग
हिंदू मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर में स्थित महाकाल लिंग स्वयंभू हैं। महाकालेश्वर के लिंग को दक्षिण मुखी भी कहा जाता है। अलग-अलग पुराणों के अनुसार, महाकाल मंदिर देश के उन बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है जहां भगवान शिव ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हैं। कहा जाता है कि यहां भगवान की पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है।
महाकालेश्वर मंदिर का इतिहास
कहा जाता है कि उज्जैन के राजा चंद्रसेन भगवान शिव के भक्त थे और प्रार्थना में लीन थे। उनकी पूजा के दौरान श्रीखर नाम के एक बालक ने उनके साथ शामिल होने की कोशिश की लेकिन उसे मना कर दिया गया और शहर के बाहरी इलाके में भेज दिया गया। वहां श्रीखर ने शत्रु राजाओं, रिपुदमन और सिंहादित्य द्वारा दूषणन नामक राक्षस की मदद से उज्जैन पर आक्रमण करने की साजिश के बारे में सुना। जिसके बाद श्रीखर ने भगवान शिव से शहर की रक्षा के लिए प्रार्थना की। जब राक्षसों ने अपना आक्रमण शुरू किया और शहर पर विजय प्राप्त करने के कगार पर थे, तब भगवान शिव अपने महाकाल रूप में उज्जैन को बचाने के लिए प्रकट हुए। जिसके बाद भगवान शिव ने उज्जैन के फेमस महाकालेश्वर मंदिर में शिवलिंग के रूप में निवास करना चुना।
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