51 शक्तिपीठों में से एक है अमरनाथ, जानिए यहां बनने वाले बर्फ के शिवलिंग का रहस्य
भारत के सबसे पवित्र धामों में से एक अमरनाथ को तीर्थों का तीर्थ भी जाता है। इस जगह पर बर्फ से बने शिवलिंग के दर्शन होते हैं। हालांकि, बहुत से लोगों को यहां की कहानी के बारे में नहीं पता है। आइए, इस आर्टिकल में जानते हैं अमरनाथ में बनने वाले बर्फ के शिवलिंग का रहस्य।

भारत के सबसे पूजनीय और रहस्यमय तीर्थस्थलों में से एक अमरनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। जम्मू और कश्मीर के बीच में स्थित यह मंदिर 3,888 मीटर की ऊंचाई पर है। इतनी ऊंचाई पर होने की वजह से अमरनाथ को एक चुनौतीपूर्ण तीर्थयात्रा माना जाता है। अमरनाथ मंदिर जाने का पारंपरिक रास्ता लगभग 45 किलोमीटर लंबा है, जो पहलगाम शहर से शुरू होकर चंदनवाड़ी, शेषनाग, पंचतरणी होते हुए फिर पवित्र स्थल तक पहुंचता है। इस आर्टिकल में जानते हैं अमरनाथ मंदिर और बर्फ के शिवलिंग की कहानी।
क्या है अमरनाथ मंदिर की खासियत?
अमरनाथ मंदिर किसी भी दूसरे मंदिर जैसा नहीं है, क्योंकि यहां शिवलिंग और गुफा दोनों ही प्रकृति द्वारा निर्मित हैं। ये 40 मीटर ऊंची प्राकृतिक गुफा है, जो अधिकांश समय बर्फ से ढकी रहती है और इसी गुफा के अंदर बर्फ से बना एक मनमोहक स्वयंभू शिवलिंग है।
कैसे बना मंदिर?
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार देवी पार्वती ने भगवान शिव से पूछा कि वे मुंडों की माला क्यों पहनते हैं। भगवान शिव ने उत्तर दिया कि जब भी पार्वती का पुनर्जन्म होता है, वे अपनी माला में एक सिर जोड़ लेते हैं। ये जानकर देवी ने पूछा कि वे अमर क्यों हैं, जबकि वह मरकर फिर से जन्म लेती हैं। इस पर भगवान शिव देवी पार्वती से कहते हैं कि इस रहस्य को समझने के लिए अमर कथा सुननी होगी। देवी को अमर कथा सुनाने के लिए भगवान शिर सभी की पहुंच से दूर एकांत जगह खोजते हैं और अंत में पवित्र अमरनाथ गुफा को चुनते हैं। सभी चीजों से मुक्त होने के बाद भगवान शिव ने देवी पार्वती के साथ पवित्र अमरनाथ गुफा में प्रवेश किया और समाधि की अवस्था में लीन हो गए और फिर अमरता का रहस्य बताना शुरू किया। जिसके बाद से यह गुफा शिव-पार्वती का एक पवित्र स्थल और हिंदू धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में से एक बन गई। इस गुफा को 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।
कैसे बनता है ये शिवलिंग?
कहा जाता है कि गुफा की छत से जमीन पर टपकने वाली पानी की बूंदों के जमने से शिवलिंग बन जाता है। शिवलिंग चंद्र चक्र के साथ घटता-बढ़ता रहता है और सावन महीने की पूर्णिमा पर अपने अधिकतम आकार तक पहुंचता है। माना जाता है कि प्राकृतिक तरीके से बर्फ से बनने वाला यह शिवलिंग भगवान शिव, उनकी अमरता और समय पर विजय पाने की उनकी शक्ति का प्रतीक है। गुफा में दो छोटी बर्फ की आकृतियां हैं, जिन्हें देवी पार्वती और भगवान गणेश का प्रतीक माना जाता है।
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