One of 51 Shakti Peeth: राक्षसों का संहार कर यूपी के पहाड़ों में बस गई थीं मां दुर्गा, जानें कहां हैं विंध्याचल मंदिर one of 51 shakti peeth vindhyachal dham maa durga temple devotees come during navratri travel tips how to reach, Travel news in Hindi - Hindustan
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One of 51 Shakti Peeth: राक्षसों का संहार कर यूपी के पहाड़ों में बस गई थीं मां दुर्गा, जानें कहां हैं विंध्याचल मंदिर

51 Shaktipeeth Of Maa Durga: दुर्गा के 51 शक्तिपीठों में से एक जिन्हें स्वयं जाग्रत स्वरूप माना गया है। उत्तर प्रदेश के छोटे से जिले मिर्जापुर में विंध्याचल धाम हैं। जहां पर हर रोज हजारो-लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। जानें दर्शन के लिए कैसे पहुंचे।

Fri, 20 March 2026 01:43 PMAparajita लाइव हिन्दुस्तान
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One of 51 Shakti Peeth:  राक्षसों का संहार कर यूपी के पहाड़ों में बस गई थीं मां दुर्गा, जानें कहां हैं विंध्याचल मंदिर

नवरात्रि के दिनों में मां दुर्गा के मंदिरों में अपार भीड़ होती है। खासतौर पर देवी दुर्गा के शक्तिपीठ में मैया के जयकारे गूंजते रहते हैं। उत्तर प्रदेश के छोटे से जिले मिर्जापुर में विंध्य रेंज के पहाड़ों में बसी मां दुर्गा की हिंदूओं में गहरी आस्था है। यहां पर हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। खासतौर पर नवरात्रि के नौ दिनों में पूरा विंध्याचल धाम रोशनी और फूलों से जगमगाता रहता है। केवल भारत ही नहीं बल्कि जर्मनी, जापान जैसे देशों से भी भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

पुराणों में है मंदिर का जिक्र

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार दुर्गा सप्तशती में विंध्याचल माता का जिक्र यशोदा की पुत्री के रूप में किया गया है। महाभारत काल में जब भगवान कृष्ण ने देवकी के गर्भ से आंठवें पुत्र के रूप में जन्म लिया तो पिता वासुदेव ने जान बचाने के लिए उन्हें यशोदा के घर छोड़ दिया और यशोदा की पुत्री को साथ लाए। देवकी के बाकी पुत्रों की तरह जब कंस ने यशोदा की पुत्री को हाथ में लेकर पत्थर पर पटकना चाहा तो वो हाथ से छूटकर आसमान में चली गईं और अदृश्य हो गई। दुर्गा सप्तशती के अनुसार ये वहीं योगमाया है। वहीं एक और पौराणिक मान्यता के अनुसार महिषासुर का वध करने के बाद देवी दुर्गा ने विंध्य पर्वत पर आकर अपना निवास स्थान बनाया था। मान्यतानुसार इस मंदिर में मां स्वयं जाग्रत स्वरूप में विराजमान है। 51 शक्तिपीठों में से एक विंध्याचल धाम में मां सती का कोई अंग नहीं गिरा। हालांकि कुछ मान्यतानुसार यहां पर बांए अंगूठे को गिरा माना जाता है। इसलिए मां विंध्यवासिनी पर भक्तों की अटूट श्रद्धा है और वो मन की मुरादें पूरी करने के लिए इस मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। नवरात्रि के दिनों में इस मंदिर में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ती है।

विंध्याचल मंदिर के साथ दो और मंदिरों में दर्शन की है मान्यता

विंध्याचल माता के दर्शन के साथ ही 8 किमी पहाड़ी रास्तों पर बनी अष्टभुजी देवी टेंपल और काली खो टेंपल में दर्शन के लिए भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।

कहां है विंध्याचल मईया का मंदिर

उत्तर प्रदेश के छोटे से जिले मिर्जापुर में विंध्याचल माता का मंदिर बना है। हालांकि इस मंदिर की मान्यता लोकल लोगों में काफी ज्यादा है। जिससे यहां पर पहुंचना बहुत आसान है।

ट्रेन से पहुंचना है आसान

मंदिर से मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर विंध्याचल रेलवे स्टेशन है जो दिल्ली-हावड़ा और मुंबई-हावड़ा रूट से कनेक्टेड है।

वहीं मिर्जापुर रेलवे स्टेशन से भी मंदिर पहुंचा जा सकता है। स्टेशन से 9 किमी की दूरी पर बने मंदिर तक जाने के लिए आसानी से साधन उपलब्ध होते हैं। यहां पर ऑटो, रिक्शा आसानी से मिल जाते हैं।

नजदीकी एयरपोर्ट

विंध्याचल धाम जाने के लिए नजदीकी एयरपोर्ट वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट है। जिसकी मंदिर से दूरी करीब 72 किमी है। शहर से आसानी से बस और टैक्सी मंदिर जाने के लिए मिल जाते हैं।

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नेशनल हाईवे से कनेक्टेड है विंध्याचल धाम

अगर आप एयरपोर्ट या ट्रेन से ट्रैवल नहीं करना चाहते हैं तो ये मंदिर पूरी तरह से नेशनल हाइवे से कनेक्टेड है। नजदीकी शहरों प्रयागराज, वाराणसी से कई प्राइवेट बस, टैक्सी और लोकल कार मंदिर तक पहुंचा सकती हैं।

कहां पर रुकें

विंध्याचल मंदिर के आसपास कई होटल और धर्मशाला बजट में और आसानी से मिल जाएंगे। आमतौर पर इस मंदिर में लोकल श्रद्धालुओं की भीड़ होती है, जो दर्शन के बाद चली जाती है। नवरात्रि के दिनों यहां विशेष भीड़ होती है।

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