सावधान! क्या होली के पक्के रंग बिगाड़ सकते हैं मेनोपॉज के लक्षण? ये है एक्सपर्ट की सलाह beware holi 2026 colours and hormones can chemical exposure worsen menopausal symptoms know what expert advice, पेरेंटिंग टिप्स - Hindustan
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सावधान! क्या होली के पक्के रंग बिगाड़ सकते हैं मेनोपॉज के लक्षण? ये है एक्सपर्ट की सलाह

Holi Colours & Hormones : पसीने के साथ सोखे गए ये केमिकल न केवल आपके हॉट फ्लैशेस (Hot Flashes) को बढ़ा सकते हैं, बल्कि आपकी रातों की नींद और मानसिक शांति में भी खलल डाल सकते हैं। मेनोपॉज कोच तमन्ना सिंह से जानने की कोशिश करते हैं कि गुलाल के चटख रंगकैसे आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

Mon, 2 March 2026 10:00 PMManju Mamgain लाइव हिन्दुस्तान
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सावधान! क्या होली के पक्के रंग बिगाड़ सकते हैं मेनोपॉज के लक्षण? ये है एक्सपर्ट की सलाह

रंगोहोली खुशियों और रंगों का त्योहार है, लेकिन क्या आप जानते हैं इस दिन त्वचा पर लगाए जाने वाले केमिकल्स भरे रंग आपके मूड स्विंग और हॉट फ्लैशेस को बढ़ाने का कारण भी बन सकते हैं? खासकर उन महिलाओं के लिए जो रजोनिवृत्ति (Menopause) के दौर से गुजर रही हैं, यह केवल त्वचा की जलन का मामला नहीं है। शरीर में पहले से ही हो रहे हार्मोनल बदलावों के बीच, इन सिंथेटिक रंगों में मौजूद 'एंडोक्राइन डिसरप्टर्स' (Endocrine Disruptors) आग में घी डालने का काम कर सकते हैं। पसीने के साथ सोखे गए ये केमिकल न केवल आपके हॉट फ्लैशेस (Hot Flashes) को बढ़ा सकते हैं, बल्कि आपकी रातों की नींद और मानसिक शांति में भी खलल डाल सकते हैं। मेनोवेदा की संस्थापक और मेनोपॉज कोच तमन्ना सिंह से जानने की कोशिश करते हैं कि गुलाल के चटख रंगों के पीछे छिपे रसायन आखिर कैसे आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

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'एंडोक्राइन डिसरप्टर्स' और हॉट फ्लैशेस

गुलाल के चटख रंगों के पीछे छिपे रसायन आपकी सेहत के साथ खिलवाड़ कर सकते हैं? खासकर उन महिलाओं के लिए जो रजोनिवृत्ति (Menopause) के दौर से गुजर रही हैं, यह केवल त्वचा की जलन का मामला नहीं है। इन रंगों में छिपे रसायन 'एंडोक्राइन डिसरप्टर्स' की तरह काम करते हैं। पसीने के साथ सोखे गए ये केमिकल आपके शरीर के पहले से ही अस्थिर हार्मोन्स के साथ छेड़छाड़ कर हॉट फ्लैशेस, रात में पसीना और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याओं को ट्रिगर कर सकते हैं। तो चलिए, इस होली रंगों की मस्ती के साथ-साथ अपनी अंदरूनी सेहत और नाजुक हार्मोनल संतुलन का ख्याल रखना भी सीखते हैं।

चालीस की उम्र के बाद की महिलाओं के लिए बढ़ा खतरा

होली का त्योहार रंगों और खुशियों से भरा होता है, लेकिन पिछले कुछ सालों में इन रंगों में होने वाली केमिकल्स की मिलावट सेहत के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रही है। यह खतरा खासतौर पर उन महिलाओं के लिए ज्यादा समस्या पैदा कर सकता है, जो चालीस की उम्र के बाद कई तरह के हार्मोनल बदलावों से गुजर रही होती हैं।

मेनोपॉज और पेरिमेनोपॉज के दौरान महिला का शरीर पहले से ही कई तरह के बदलावों (जैसे ड्राई स्किन, थकान और हार्मोनल उतार-चढ़ाव) से जूझ रहा होता है। ऐसे में होली के केमिकल वाले रंग उनकी मुश्किलों को और बढ़ा सकते हैं। मेनोपॉज और पेरिमेनोपॉज के दौरान, शरीर में एस्ट्रोजन के उतार-चढ़ाव की वजह से त्वचा, ऊर्जा, नींद और मूड पर असर पड़ सकता है। यही वो समय होता है जब त्वचा और शरीर बाहरी रसायनों के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं।

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रंगों से हो सकती हैं ये समस्याएं

कई रंग जो हम होली पर इस्तेमाल करते हैं, उनमें भारी धातुएं, औद्योगिक डाई और अन्य हानिकारक रसायन मौजूद होते हैं। जब ये रंग त्वचा से संपर्क करते हैं, तो एलर्जी, खुजली, रैशेज या जलन जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। जो महिलाएं पहले से ही संवेदनशील त्वचा या हार्मोनल बदलावों का सामना कर रही होती हैं, उनके लिए ये समस्याएं और बढ़ सकती हैं।

हार्मोनल असंतुलन

कुछ रसायनों को एंडोक्राइन डिसरप्टर माना जाता है, जिसका मतलब होता है कि ये शरीर के हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि त्योहार के दौरान कम समय में इनके संपर्क में रहने से कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, लेकिन बार-बार रसायनों के संपर्क में रहने से शरीर में सूजन, त्वचा की समस्याएं, या थकान जैसी दिक्कतें महसूस हो सकती हैं।

मेनोपॉज और पेरिमेनोपॉज के दौरान कई महिलाएं पहले से ही हॉट फ्लैश, मूड स्विंग, थकान और त्वचा के रूखेपन जैसी समस्याओं का सामना कर रही होती हैं। ऐसे में ये रासायनिक रंग इन समस्याओं को और बढ़ा सकते हैं।

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बचाव के स्मार्ट तरीके

रंगों के साइड इफेक्ट्स से बचने के लिए होली खेलते समय कुछ आसान सावधानियां बरती जा सकती हैं। ऐसे में कोशिश करें कि होली खेलने के लिए हर्बल या फूलों से बने प्राकृतिक रंगों का ही इस्तेमाल करें। रंग खेलने से पहले अपने चेहरे और बालों पर नारियल या तिल का तेल लगाकर एक सुरक्षा परत बना सकते हैं, जिससे रंग आपकी त्वचा में गहराई से नहीं समाएंगे।

हाइड्रेशन है जरूरी: मेनोपॉज में 'हॉट फ्लैशेस' की समस्या आम है। इससे बचने के लिए खूब पानी पिएं ताकि शरीर का तापमान स्थिर बना रहे।

हल्का भोजन: भारी और ज्यादा मीठे पकवानों की जगह संतुलित आहार लें ताकि एनर्जी लेवल बना रहे और थकान महसूस न हो।

सलाह- मेनोपॉज लाइफ का एक नया चरण है। थोड़ी सी सावधानी बरतकर आप बिना अपनी सेहत से समझौता किए होली की खुशियों का पूरा आनंद ले सकती हैं।

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