बेकार की बहस से कैसे बचें? नित्यानंद चरण दास ने बताई दिलचस्प कहानी How to avoid pointless arguments by Nityanand Charan Das
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बेकार की बहस से कैसे बचें? नित्यानंद चरण दास ने बताई दिलचस्प कहानी

बेकार की बहसें हमारी मानसिक शांति और ऊर्जा दोनों छीन लेती हैं। आध्यात्मिक काउंसलर नित्यानंद चरण दास समझाते हैं कि कब तर्क छोड़ देना ही समझदारी है और कैसे अनावश्यक विवादों से बचा जा सकता है।

Wed, 4 Feb 2026 12:30 PMShubhangi Gupta लाइव हिन्दुस्तान
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बेकार की बहस से कैसे बचें? नित्यानंद चरण दास ने बताई दिलचस्प कहानी

जिंदगी में हम अक्सर ऐसे तर्क-वितर्क में उलझ जाते हैं जिनका ना कोई नतीजा निकलता है और ना ही मन को शांति मिलती है। आध्यात्मिक काउंसलर और लेखक नित्यानंद चरण दास कहते हैं कि हर बहस जीतने लायक नहीं होती। हमारा झूठा अहंकार (False Ego) हमें सही साबित होने के लिए लड़ने को उकसाता है, जबकि हमारी आत्मा शांति और ऊर्जा की रक्षा करना चाहती है। सच्ची समझ यह जानने में है कि कब बोलना है और कब चुप रहना ही बुद्धिमानी है।

नित्यानंद चरण दास इस बात को एक बेहद सरल लेकिन गहरे उदाहरण से समझाते हैं - गधे और बाघ की कहानी।

STORY: एक बार एक गधा और बाघ घास के रंग को लेकर बहस करने लगे।

गधा कहता है, 'घास नीली है।'

बाघ कहता है, 'घास हरी है।'

दोनों अपनी-अपनी बात पर अड़े रहे। बहस बढ़ती गई और वे फैसला कराने शेर के पास जा पहुंचे। शेर ने सोच-समझकर कहा, 'हां, घास नीली है।'

बाघ हैरान रह गया और उसने शेर से पूछा, 'आप जानते हैं कि घास हरी है, फिर आपने ऐसा क्यों कहा?'

शेर ने जवाब दिया, 'जो सुनना ही नहीं चाहता, उससे सच पर बहस करना बुद्धिमानी नहीं है।'

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इससे कहानी से आप क्या समझते हैं ?

  • हर बहस जीतने लायक नहीं होती: अगर सामने वाला व्यक्ति सुनने या समझने को तैयार ही नहीं है, तो तर्क देना बेकार है। ऐसी बहस में आप जीतते नहीं, सिर्फ अपना समय और ऊर्जा खोते हैं।
  • अहंकार VS आत्मा: अहंकार हमें सही साबित होना सिखाता है, जबकि आत्मा हमें शांत रहना सिखाती है। शांति चुनना कमजोरी नहीं, बल्कि आत्म-परिपक्वता है।
  • हर किसी को समझाना जरूरी नहीं: जो लोग आपको गलत समझने का फैसला पहले ही कर चुके हों, उन्हें सफाई देना आत्म-थकान का कारण बनता है।
  • शांति सबसे बड़ी जीत है: बहस से निकलने वाला 'संतोष' क्षणिक होता है, लेकिन शांति लंबे समय तक साथ रहती है।
  • अपनी ऊर्जा की रक्षा करें: हर अनावश्यक तर्क आपकी मानसिक ऊर्जा को खींच लेता है। बुद्धिमान वही है जो जानता है कि कहां रुकना है।

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नित्यानंद चरण दास कहते हैं - 'जब आप ऐसे व्यक्ति से बहस करते हैं जो सुनने से इनकार करता है, तो आप बहस नहीं हारते, आप सिर्फ अपना समय हारते हैं।' कभी-कभी चुप रहना ही सबसे ऊंचा उत्तर होता है।

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