Quote of the day: सिर्फ सोच बदलने से कैसे बदल सकता है आपका जीवन? पढ़ें परमहंस योगानंद जी का खास संदेश!
Quote of the day: परमहंस योगानंद जी मनाते थे कि मन और शरीर के बीच गहरा संबंध है। मन केवल सोचने का साधन नहीं है, बल्कि शरीर को संचालित करने वाली शक्ति है। जब मन डर और सीमाओं से जुड़े विचारों से भर जाता है, तो शरीर भी वैसी ही प्रतिक्रिया देने लगता है।

स्वामी परमहंस योगानंद जी एक आध्यात्मिक गुरु थे, जिन्होंने क्रिया योग को जन-जन तक पहुंचाया। उनकी लिखी किताब 'एक योगी की आत्मकथा' दुनियाभर में आज भी लोकप्रिय है। उन्होंने अपने विचारों से आत्मा, मन और शरीर के संतुलन को समझाने और लोगों तक पहुंचाने का काम किया। उनका मानना था कि हमारे शरीर और मन के बीच गहरा संबंध है। आपके शरीर की स्थिति केवल बाहरी कारणों से तय नहीं होती बल्कि आपके मन में चल रहे विचार भी इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं। कुल मिलाकर कहें तो मन ही शरीर को संचालित करने वाली शक्ति है। आज के सुविचार में भी परमहंस योगानंद जी यही बात कहते हैं।
आज का सुविचार (In English)
Never allow your mind to entertain thoughts of illness or limitation; you will see your body change for the better. Remember that mind Is the power that is creating this body and if the mind is weak, the body becomes weak. Don't grieve or worry about anything.
हिंदी अनुवाद
परमहंस योगानंद जी कहते हैं -
अपने मन को कभी भी बीमारी या सीमाओं से जुड़े विचारों में उलझने मत दो। जब तुम ऐसा करना बंद कर दोगे, तो खुद देखोगे कि तुम्हारा शरीर बेहतर होने लगेगा। यह याद रखो कि मन ही वह शक्ति है, जो शरीर का निर्माण कर रही है। ऐसे में अगर मन कमजोर पड़ जाता है, तो शरीर भी कमजोर हो जाता है। इसलिए किसी भी बात को ले कर ज्यादा शोक या चिंता मत करो।
आसान शब्दों में समझें इसका अर्थ
मन और शरीर का गहरा संबंध
परमहंस योगानंद जी मनाते थे कि मन और शरीर के बीच गहरा संबंध है। मन केवल सोचने का साधन नहीं है, बल्कि शरीर को संचालित करने वाली शक्ति है। जब मन डर और सीमाओं से जुड़े विचारों से भर जाता है, तो शरीर भी वैसी ही प्रतिक्रिया देने लगता है।
नकारात्मक सोच से बढ़ती है कमजोरी
अगर कोई भी इंसान बार बार केवल अपनी परेशानियों के बारे में सोचता है, उसका ध्यान लक्ष्य पर नहीं बल्कि सीमाओं पर होता है तो धीरे-धीरे उसका आत्मविश्वास कमजोर होने लगता है। यही मानसिक कमजोरी धीरे धीरे शरीर को भी कमजोर करने लगती है।
विचारों से होती है किसी भी बदलाव की शुरुआत
यह विचार सिखाता है कि जीवन में कोई भी सकारात्मक बदलाव लाने के लिए सबसे पहले अपने विचारों को बदलना जरूरी है। जब व्यक्ति पॉजिटिव सोचता है, आत्मविश्वास से भरपूर रहता है और उसका दिमाग कमियों में नहीं बल्कि लक्ष्य पर होता है, तो इसका असर उसके पूरे व्यक्तित्व पर दिखाई पड़ता है।
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