चलती गाड़ी में क्यों आने लगती है गहरी नींद? थकान नहीं, इसके पीछे छिपी हैं 6 बड़ी वजह why do we fall asleep in moving vehicles bus car not fatigue but 6 major reasons chalti gadi mein kyun ati hai neend, हेल्थ टिप्स - Hindustan
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चलती गाड़ी में क्यों आने लगती है गहरी नींद? थकान नहीं, इसके पीछे छिपी हैं 6 बड़ी वजह

Reasons For Sleep While Travelling : आखिर क्यों चलती गाड़ी की हल्की थरथराहट हमें किसी लोरी जैसी लगती है और क्यों हमारा दिमाग सफर के दौरान 'स्लीप मोड' में चला जाता है? डॉ. चिराग टंडन से जानते हैं क्यों चलती बस या ट्रेन में झपकी लेना बन जाता है मजबूरी।

Thu, 19 Feb 2026 06:18 PMManju Mamgain लाइव हिन्दुस्तान
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चलती गाड़ी में क्यों आने लगती है गहरी नींद? थकान नहीं, इसके पीछे छिपी हैं 6 बड़ी वजह

क्या आपने कभी गौर किया है कि जैसे ही बस या ट्रेन अपनी रफ्तार पकड़ती है, आपकी पलकें खुद-ब-खुद भारी होने लगती हैं? भले ही आप पूरी नींद लेकर घर से निकले हों, लेकिन सफर शुरू होते ही आंखों का नींद से भर जाना कोई इत्तेफाक नहीं है। कुछ लोग इसे 'ट्रैवलिंग फटीग' यानी सफर की थकान मानते हैं, तो कुछ इसे ताजी हवा का असर समझते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं असलियत में इसके पीछे आपके दिमाग की दिलचस्प इंजीनियरिंग और शरीर का कुदरती रिस्पॉन्स छिपा हुआ रहता है। आइए जानते हैं आखिर क्यों चलती गाड़ी की हल्की थरथराहट हमें किसी लोरी जैसी लगती है और क्यों हमारा दिमाग सफर के दौरान 'स्लीप मोड' में चला जाता है? इस खबर में सफर की थकान और सुकून के पीछे के असली विज्ञान को करीब से समझने के लिए हमने बात की शारदाकेयर-हेल्थसिटी के आंतरिक चिकित्सक डॉ. चिराग टंडन से।

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डॉ. चिराग टंडन कहते हैं कि अक्सर लोग यह सोचते हैं कि सफर के दौरान नींद आना सिर्फ बोरियत या थकान की वजह से होता है, लेकिन सच यह है कि इसके पीछे कई वैज्ञानिक और शरीर से जुड़े प्राकृतिक कारण काम करते हैं। यात्रा के दौरान नींद आना हमारे शरीर की एक सामान्य और प्राकृतिक प्रतिक्रिया भी हो सकती है, जिसे 'ट्रैवल-इंड्यूस्ड स्लीप रिस्पॉन्स' कहा जा सकता है।

रिलैक्स होता है दिमाग

जब हम कार, ट्रेन या फ्लाइट में सफर करते हैं, तो शरीर लगातार हल्की और नियमित गति (rhythmic motion) महसूस करता है। यह वही हल्का झूला जैसा प्रभाव पैदा करता है जो दिमाग को शांत करता है और रिलैक्सेशन बढ़ाता है, जिससे नींद आने की संभावना बढ़ जाती है।

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व्हाइट नॉइज

सफर के दौरान नींद आने का दूसरा बड़ा कारण 'व्हाइट नॉइज' और कम मानसिक उत्तेजना है। सफर के दौरान गाड़ी के इंजन की लगातार आवाज, सीमित दृश्य बदलाव और कम सक्रियता दिमाग को संकेत देती है कि वातावरण सुरक्षित और शांत है। ऐसे माहौल में दिमाग की अलर्टनेस धीरे-धीरे कम हो जाती है और शरीर आराम की ओर बढ़ता है।

बायोलॉजिकल क्लॉक

इसके अलावा, हमारे शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक यानी सर्केडियन रिद्म भी नींद आने के पीछे बड़ी भूमिका निभाती है। प्राकृतिक रोशनी की कमी या बंद वातावरण में रहने से शरीर को दिन-रात का सही संकेत नहीं मिल पाता, जिससे मेलाटोनिन हार्मोन बढ़ सकता है और नींद का एहसास होता है। खासकर सुबह जल्दी या शाम के समय यात्रा करने पर यह प्रभाव ज्यादा महसूस होता है।

मानसिक उत्तेजना में कमी

कई बार लोग कहते हैं कि उन्होंने अच्छी नींद ली थी फिर भी यात्रा में उनींदापन महसूस हुआ। इसका कारण यह है कि लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठना, कम शारीरिक गतिविधि और यात्रा की एकरसता (monotony) दिमाग को कम सक्रिय बनाती है। जब मानसिक उत्तेजना कम होती है, तो शरीर ऊर्जा बचाने के मोड में चला जाता है, जिससे नींद आने लगती है।

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थकान

नींद आने के पीछे यात्रा से पहले की थकान भी एक बड़ा कारण है। अक्सर लोग सफर के लिए जल्दी उठते हैं, पैकिंग करते हैं या मानसिक तनाव में रहते हैं। जब वे वाहन में बैठते हैं और शरीर को आरामदायक माहौल मिलता है, तो शरीर तुरंत 'रिकवरी मोड' में जाकर नींद को प्राथमिकता देने लगता है।

ऑक्सीजन स्तर कम होना

फ्लाइट यात्रा के दौरान कुछ अतिरिक्त कारण भी नींद आने के पीछे का कारण हो सकते हैं, जैसे ऑक्सीजन का स्तर हल्का कम होना, कम ह्यूमिडिटी और डिहाइड्रेशन, जो थकान और उनींदापन को बढ़ा सकते हैं।

हालांकि, हर व्यक्ति को सफर में नींद आए ऐसा जरूरी नहीं है। यह व्यक्ति की नींद की आदत, तनाव स्तर, यात्रा का समय, आराम की स्थिति और शरीर की संवेदनशीलता पर निर्भर करता है। अच्छी नींद लेने वाले या यात्रा में सक्रिय रहने वाले लोगों में नींद कम आ सकती है।

सलाह

अगर सफर के दौरान बहुत ज्यादा नींद आती है, खासकर ड्राइविंग करते समय, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए क्योंकि यह सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है। यात्रा से पहले पर्याप्त नींद लेना, हल्का भोजन करना, पानी पीते रहना, बीच-बीच में ब्रेक लेना और खुद को मानसिक रूप से सक्रिय रखना मददगार हो सकता है। सफर में नींद आना कोई कमजोरी नहीं बल्कि शरीर और दिमाग की प्राकृतिक प्रतिक्रिया है। यह हमारे शरीर का एक तरीका है यह बताने का कि वह रिलैक्स अवस्था में है या उसे आराम की जरूरत है। सही तैयारी और जागरूकता से हम इसे बेहतर तरीके से समझते हुए अपनी यात्रा को ज्यादा आरामदायक बना सकते हैं।

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