DGP नियुक्ति पर SC सख्त! 1 महीना में प्रक्रिया पूरी करने का आदेश, नियमों से हटे तो नहीं बख्शेंगे
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि डीजीपी की नियुक्ति प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों और यूपीएससी (संघ लोक सेवा आयोग) की निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप ही की जानी चाहिए।

सर्वोच्च न्यायालय ने झारखंड सरकार को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति प्रक्रिया का एक माह में पालन करने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि डीजीपी की नियुक्ति प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों और यूपीएससी (संघ लोक सेवा आयोग) की निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप ही की जानी चाहिए।
सीनियर अधिकारियों की भेजें लिस्ट
सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने कहा कि डीजीपी की नियुक्ति में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना अनिवार्य है। राज्य सरकार को इसके लिए पहले पात्र और वरिष्ठतम आईपीएस अधिकारियों की सूची यूपीएससी को भेजनी होगी। यूपीएससी उस सूची में से तीन योग्य अधिकारियों का पैनल तैयार करेगा। इसके बाद राज्य सरकार को उनमें से एक को कम-से-कम दो वर्ष के निर्धारित कार्यकाल के लिए डीजीपी के पद पर नियुक्त करना होगा।
बाबूलाल मरांडी ने दायर की थी याचिका
झारखंड में डीजीपी की नियुक्ति को लेकर बाबूलाल मरांडी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है नियुक्ति प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित मानकों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया गया है।
इससे जुड़ेे एक मामले में पिछली सुनवाई के दौराने सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि राज्यों में नियमावली बदल कर डीजीपी नियुक्ति की परंपरा खत्म होनी चाहिए। उस दौरान शीर्ष कोर्ट की टिप्पणी पर बाबूलाल मरांडी ने कहा था कि डीजीपी पद पर चयन में राज्यों को जवाबदेह ठहराने का जो आदेश कोर्ट ने दिया है, वह उनके द्वारा उठाए गए हर मुद्दे पर एक तरह से मुहर है। उन्होंने कहा था सेवानिवृत्ति के बाद सर्विस बढ़ाने का अधिकार केवल केंद्र के पास है।
तमिलनाडू सरकार को भी मिले आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तमिलनाडु सरकार को डीजीपी नियुक्ति के लिए एक सप्ताह के भीतर संघ यूपीएससी को संशोधित प्रस्ताव पेश करने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा, यूपीएससी इसके बाद दो सप्ताह के भीतर अंतिम सिफारिश देगा। पीठ ने तेलंगाना के लिए डीजीपी की नियुक्ति से संबंधित एक अलग मामले में पांच फरवरी को दिए आदेश का हवाला दिया। उसमें कई राज्यों की ओर से डीजीपी की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव भेजने में हुई अत्यधिक देरी का गंभीर संज्ञान लिया था।
प्रक्रिया में किसी प्रकार का विचलन स्वीकार्य नहीं
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया से किसी भी प्रकार का विचलन स्वीकार्य नहीं होगा। तमिलनाडु से जुड़े एक विशेष मामले को छोड़कर सभी राज्यों को समान रूप से इन दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। झारखंड के संदर्भ में अदालत ने विशेष रूप से कहा कि राज्य एक माह के भीतर पूरी प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप पूरा करे।




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