samajh aa gaya ab kranti nahi chalegi what maoists said after surrendering in jharkhand 'अब समझ में आ गया कि क्रांति नहीं चलेगी', झारखंड में 27 नक्सलियों ने सरेंडर करते हुए क्या कहा, Jharkhand Hindi News - Hindustan
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'अब समझ में आ गया कि क्रांति नहीं चलेगी', झारखंड में 27 नक्सलियों ने सरेंडर करते हुए क्या कहा

गुरुवार को झारखंड में 27 माओवादियों ने एक साथ सरेंडर कर दिया। सरेंडर करने के दौरान माओवादियों ने जो कहा, वो इस बात की गवाही है कि देश के साथ अब झारखंड से भी माओवाद पूरी तरह खत्म होने की कगार पर आ गया है। माओवादियों ने सरेंडर के बाद कहा कि अब समझ में आ गया है कि क्रांति नहीं चल सकती।

Fri, 22 May 2026 08:10 AMMohammad Azam हिन्दुस्तान, रांची
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'अब समझ में आ गया कि क्रांति नहीं चलेगी', झारखंड में 27 नक्सलियों ने सरेंडर करते हुए क्या कहा

गुरुवार को झारखंड में 27 माओवादियों ने एक साथ सरेंडर कर दिया। सरेंडर करने के दौरान माओवादियों ने जो कहा, वो इस बात की गवाही है कि देश के साथ अब झारखंड से भी माओवाद पूरी तरह खत्म होने की कगार पर आ गया है। भाकपा माओवादियों के सेक्शन कमांडर रहे गुलशन मुंडा ने सरेंडर के बाद कहा कि अब समझ में आ गया है कि क्रांति नहीं चल सकती। इसलिए उसने मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया। गुलशन ने कहा कि कई मुठभेड़ में वह शामिल रहा था, अंतिम बार 2025 में उसकी मुलाकात मिसिर बेसरा से हुई थी।

संगठन अब धीरे-धीरे कमजोर, रसद तक नहीं

सरेंडर करने वाली महिला नक्सली सुनीता उर्फ बारी सरदार ने कहा कि माओवादी संगठन में वह 2018 में गई थी, संगठन में संतरी व खाना बनाने जैसे काम वह करती थी। लेकिन संगठन अब धीरे-धीरे कमजोर होता गया, रसद तक नहीं मिल पाता था। ऐसे में वह मुख्यधारा में लौटना चाहती थी।

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प्रशांत बोस की गिरफ्तारी के बाद से कमजोर होता गया संगठन

झारखंड का सारंडा भाकपा माओवादी संगठन के ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो का मुख्यालय रहा था। लेकिन 2021 में प्रशांत बोस की गिरफ्तारी के बाद सारंडा के नक्सलियों का संपर्क बाहरी माओवादियों से टूटने लगा था। इसके बाद सीआरपीएफ, झारखंड जगुआर व चाईबासा पुलिस के लगातार व टारगेट बेस्ड अभियान ने माओवादियों को लगातार कमजोर किया। 2026 में लगातार संचालित अभियान के फलस्वरूप अबतक कुल 44 नक्सलियों को गिरफ्तारी की गई, कुल 29 नक्सलियों द्वारा पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया गया, पुलिस मुठभेड़ में कुल 22 नक्सली मारे गए हैं।

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चाईबासा में ही नक्सल गतिविधि पर अंकुश लगाने के लिए नक्सल प्रभावित थाना क्षेत्र खासकर सारंडा क्षेत्र में कुल 21 नए एडवांस कैंप एवं फारवर्ड ऑपरेशन बेस स्थापित किए गए। जिन इलाकों में माओवादी खत्म होते गए, वहां कैंप स्थापित किए जाने से दुबारा संगठन की गतिविधियां शुरू नहीं हो पायीं, वहीं माओवादियों का दायरा वन क्षेत्र में सिमटता रहा।

ग्रे हाउंड की तर्ज पर अधिक जूझी जगुआर

झारखंड में नक्सलियों से मुकाबले के लिए आंध्र प्रदेश की ग्रे हाउंड की तर्ज पर जगुआर का गठन 2008 में किया गया था। नक्सल अभियान में सीआरपीएफ के साथ जगुआर सबसे अहम भूमिका में रही। 2008 से अबतक जगुआर ने 118 बार उग्रवादियों के साथ मुठभेड़ की। इन अभियानों में 48 माओवादी मारे गए। वहीं 313 उग्रवादियों की गिरफ्तारी में जगुआर की भूमिका रही। जगुआर के चलाए अभियानों में 19 एके सीरीज के हथियार, 27 इंसास, 33 एसएलआर समेत 151 हथियार की बरामदगी हुई, वहीं कुल 21368 जिंदा कारतूस व 2177 आईईडी, 4855 किलोग्राम विस्फोटक बरामद किए गए।