दिल्ली सरकार कराएगी बिजली कंपनियों का CAG ऑडिट, ₹38,000 करोड़ के घाटे का खुलेगा राज?
दिल्ली की जनता को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने बिजली कंपनियों (डिस्कॉम) के ₹38,000 करोड़ के घाटे के दावों की सच्चाई जानने के लिए सीएजी (CAG) ऑडिट कराने का बड़ा फैसला लिया है।

दिल्ली सरकार जल्द ही बिजली कंपनियों (डिस्कॉम) का सीएजी से ऑडिट करवाएगी। ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने गुरुवार को यह जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी हाल में इस राशि का बोझ दिल्ली की जनता पर नहीं डालेगी और इसके लिए सभी कानूनी विकल्प अपनाए जाएंगे।
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि बिजली कंपनियों द्वारा घाटे के रूप में 38 हजार करोड़ रुपये की मांग की जा रही है। ऐसे में यह पता लगाना बेहद आवश्यक है कि कंपनियों को वास्तव में इतना घाटा हुआ भी है या नहीं, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने डिस्कॉम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कंपनियां इतने बड़े घाटे में थीं, तो उन्होंने पहले इसकी जानकारी क्यों नहीं दी? और घाटा होने के बावजूद ये कंपनियां अब तक कैसे चल रही थीं? इन सभी सवालों का पता लगाने के लिए ही दिल्ली सरकार ने सीएजी ऑडिट कराने का फैसला किया है। ऊर्जा मंत्री ने दिल्ली की जनता को आश्वस्त किया है कि वह बिजली के बिलों में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं होने देंगे।
निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए सरकार का मास्टर प्लान तैयार
राजधानी में बिजली की निर्बाध आपूर्ति के लिए सरकार ने मास्टर प्लान तैयार किया है। इसके तहत वर्ष 2030 से पहले दिल्ली सरकार बिजली से संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर को मबजूत करने के लिए लगभग 17 हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी।
सरकार का मानना है कि बिजली की मांग सामान्य स्थिति में 2030 तक 11,600 मेगावाट एवं विकसित दिल्ली के रोडमैप से 13,100 मेगावाट तक पहुंच सकती है। सूद ने बताया कि ऑर्डर देने के तीन से चार साल बाद कंपनी ट्रांसफॉर्मर देती है। ऐसे में पूर्व सरकार की ओर से नए ट्रांसफॉर्मर नहीं खरीदने के चलते मौजूदा सरकार के समक्ष निर्बाध बिजली आपूर्ती बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है। दिल्ली सरकार अपनी पूरी क्षमता के साथ इसका समाधान कर रही है।
पिछली सरकारों पर निशाना साधा
मंत्री ने बताया कि दिल्ली में बिजली आपूर्ति की व्यवस्था को बेहतर करने के लिए पिछले एक दशक में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पिछली सरकार ने ना तो ट्रांसफॉर्मर बढ़ाने की दिशा में काम किए और ना ही पुराने हो चुके ट्रांसफॉर्मर बदले। इसकी जगह उन्होंने उधार लेकर ट्रांसफॉर्मर लगा दिए। पिछली सरकार ने ट्रांसफॉर्मर लगाने के लिए कई बार टेंडर भी निकाले, लेकिन अधिकांश को पूरा नहीं किया गया। इसके चलते दिल्ली में लगभग 50 फीसदी ट्रांसफॉर्मर 25 साल से अधिक पुराने हो चुके हैं।
ये हैं मास्टर प्लान की मुख्य बातें
● 24 घंटे नागरिकों को निर्बाध आपूर्ति होगी
● नया कनेक्शन जल्द मिले और पारदर्शिता से बिल आएं
● मांग के अनुसार ग्रिड की क्षमता बढ़ाई जाएगी
● एचवीडीएस ट्रांसफॉर्मर की जगह एलवीडीएस ट्रांसफॉर्मर लगाएगी सरकार
● लोकल खराबी आने पर उसे तुरंत ठीक कराया जा सकेगा
● गलियों एवं मकानों को सुरक्षित रखा जाएगा
● लटकी हुई तारों को भूमिगत किया जाएगा
● रूफटॉप सोलर पैनल को बढ़ावा दिया जाएगा




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