झारखंड में बालू की रॉयल्टी हो गई फिक्स, अब प्रति घन मीटर देने होंगे इतने रुपए
झारखंड में सामान्य बालू के लिए रॉयल्टी अब 50 रुपये प्रति घन मीटर तय की गई है। वहीं, अन्य श्रेणियों के बालू के लिए यह दर 25 रुपये प्रति टन होगी। अब बालू घाट के आवंटन की अवधि यानी ‘वर्ष’ की गिनती लीज डीड के निष्पादन और उसके रजिस्ट्रेशन की तारीख से की जाएगी। बालू की तय रॉयल्टी दर पूर्व के समान ही है।

झारखंड में सामान्य बालू के लिए रॉयल्टी अब 50 रुपये प्रति घन मीटर तय की गई है। वहीं, अन्य श्रेणियों के बालू के लिए यह दर 25 रुपये प्रति टन होगी। अब बालू घाट या डिपॉजिट के आवंटन की अवधि यानी ‘वर्ष’ की गिनती लीज डीड के निष्पादन और उसके रजिस्ट्रेशन की तारीख से की जाएगी। बालू की तय रॉयल्टी दर पूर्व के समान ही है। पहले यह दर सभी खनिजों के लिए बनाई नियमावली के तहत थी। पहली बार बालू घाटों के लिए अलग से नियमावली बनाकर दर अलग से निर्धारित की गई है।
खान एवं भूतत्व विभाग ने राज्य में बालू खनन को अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए ‘झारखंड बालू खनन (संशोधन) नियमावली, 2026’ लागू कर दी है। इस नियमावली को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने भी मंजूरी दे दी है। नए नियमों के तहत बालू घाटों के आवंटन, किस्तों के भुगतान और लेटलतीफी पर जुर्माने के कड़े प्रावधान किए गए हैं। नए नियमों के उल्लंघन या किसी भी अवैध गतिविधि के लिए पूरी तरह से पट्टाधारक ही जिम्मेदार होगा। नए नियम में पहले वर्ष के लिए बोली की राशि पंजीकरण की तारीख से ही शुरू होगी। दूसरे और उसके बाद के वर्षों के लिए बोली की राशि पिछले वित्तीय वर्ष के ‘वार्षिक खनिज रियायती मूल्य’ का 110 प्रतिशत तय की गई है।
मासिक रिटर्न में देरी पर प्रतिदिन 25 रुपये जुर्माना
खनन पट्टाधारकों के लिए अब हर महीने का रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य कर दिया गया है। पट्टाधारक को संबंधित महीने का मासिक रिटर्न अगले महीने की 10 तारीख के भीतर जमा करना होगा। यदि कोई इसमें विफल रहता है, तो उस पर 25 रुपये प्रतिदिन की दर से जुर्माना लगाया जाएगा। हालांकि, जुर्माने की यह अधिकतम राशि 2,500 रुपये तक ही सीमित होगी। नियमावली के शेड्यूल-2 के तहत ई-ऑक्शन के माध्यम से सफल रहे बोलीदाताओं को 5 वर्ष की अवधि के लिए बालू खनन की अनुमति दी जाएगी। खनन पट्टा रजिस्ट्रीकरण की तिथि से अगले पांच वर्षों के लिए वैध होगा।
तीन किस्तों में होगा भुगतान
● पहली किस्त (50%) : पहले वर्ष के लिए पहला परमिट जारी होने से पहले, और दूसरे या आगामी वर्षों के लिए वर्ष की पहली तिमाही में देनी होगी।
● दूसरी किस्त (25%) : वर्ष की तीसरी तिमाही में देय होगी।
● तीसरी किस्त (25%) : वर्ष की चौथी तिमाही में जमा करनी होगी।
इसके साथ ही रॉयल्टी, डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) का अंशदान सामान्य बालू और अन्य श्रेणी के लिए रॉयल्टी की निर्धारित दर के आधार पर होगा। आयकर, पर्यावरण उपकर (सेस), प्रबंधन शुल्क, जीएसटी, स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क लागू कानूनों के तहत चुकाने होंगे।
पेसा नियम और ग्रामसभा की सहमति अनिवार्य
राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में बालू खनन के लिए सरकार ने नियमों को और सख्त किया है। अब पेसा नियमावली के तहत संबंधित ग्राम सभा की सहमति और अन्य सभी आवश्यक स्वीकृतियां लेनी होंगी। इसके बाद ही नियमावली के शेड्यूल-2 के प्रारूप में लीज डीड का निष्पादन किया जा सकेगा। किसी भी दुर्घटना या नुकसान की स्थिति में क्षतिपूर्ति की जिम्मेदारी पट्टाधारक की होगी। साथ ही, पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधरोपण और प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों का खर्च भी लीजधारक को उठाना होगा।




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