Women Empowerment Discussion on Nari Shakti Vandan Act-2023 Held at Central University of Jharkhand नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर बहस में अर्चना सर्वश्रेष्ठ वक्ता, Ranchi Hindi News - Hindustan
More

नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर बहस में अर्चना सर्वश्रेष्ठ वक्ता

रांची में केंद्रीय विश्वविद्यालय, झारखंड में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023’ पर परिचर्चा आयोजित की गई। इसमें छात्राओं ने महिलाओं की भूमिका और 33 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधानों पर चर्चा की। कुलपति ने शिक्षा को महिलाओं की शक्ति और विकास का माध्यम बताया। कार्यक्रम में 14 छात्राओं ने विचार साझा किए और सर्वश्रेष्ठ वक्ता का पुरस्कार भी दिया गया।

Mon, 13 April 2026 06:18 PMNewswrap हिन्दुस्तान, रांची
share
नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर बहस में अर्चना सर्वश्रेष्ठ वक्ता

रांची, विशेष संवाददाता। केंद्रीय विश्वविद्यालय, झारखंड (सीयूजे) में सोमवार को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023’ विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। वीमेन एम्पावरमेंट सेल (डब्ल्यूईसी) की ओर से आयोजित कार्यक्रम में छात्राओं ने विकसित भारत के परिप्रेक्ष्य में महिलाओं की भूमिका पर स्पष्ट और नीतिगत दृष्टिकोण प्रस्तुत किए। यह परिचर्चा 128वें संवैधानिक संशोधन ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के संदर्भ में आयोजित की गई, जिसमें संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान, उसकी व्यवहारिक चुनौतियां और सामाजिक-राजनीतिक प्रभावों पर गहन चर्चा हुई। कार्यक्रम में 14 छात्राओं ने भाग लेते हुए चार केंद्रीय विषयों- सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाएं, संस्थागत अवरोध, कम प्रतिनिधित्व के निहितार्थ और विकसित भारत में नारी की भूमिका-पर अपने विचार साझा किए।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:नैनीताल में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर मंथन

छात्राओं का उत्साहवर्द्धन करने के लिए कुलपति प्रो सारंग मेधकर, रजिस्ट्रार केके राव, कार्यक्रम समन्वयक डॉ शशि सिंह उपस्थित थे। वहीं, निर्णायक मंडल में डॉ अनीता शुक्ला और डॉ मालिनी शामिल थीं। मौके पर कुलपति ने कहा कि महिलाएं सिर्फ विकास की सहभागी नहीं, बल्कि विकसित भारत की दिशा निर्धारित करनेवाली शक्ति हैं। कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है जो सोच और व्यवस्था दोनों को बदल सकती है।जनसंचार विभाग की छात्रा अर्चना कुमारी ने बहस में हिस्सा लेते हुए कहा कि नारी का विकास ही राष्ट्र के विकास की आधारशिला है। उन्होंने कॉलेज स्तर पर राजनीतिक इकाई, महिला नेतृत्व क्लब और महिला सांसदों के साथ इंटर्नशिप जैसे सुझाव प्रस्तुत किए। उनकी प्रभावी अभिव्यक्ति और तार्किकता के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ वक्ता चुना गया। अन्य वक्ताओं में आयशा गुप्ता ने निर्भया कांड और सरपंच पति, जैसी प्रवृत्तियों पर प्रहार करते हुए वास्तविक महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता पर बल दिया। श्रेया कुमारी ने ऐतिहासिक दृष्टांतों के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन की शुरुआत घर से होने की बात कही। बरीरा अख्तर ने निर्णय-प्रक्रिया में महिलाओं की वास्तविक भागीदारी और स्टेम व एआई क्षेत्रों में नेतृत्व की वकालत की। रायना खान ने भारत की वैश्विक लैंगिक अंतर रैंकिंग का उल्लेख करते हुए- नारी चुनाव निधि और शैडो पार्लियामेंट, जैसे नवाचारी प्रस्ताव रखे, जबकि रोमा मंडल ने राजनीति और नौकरशाही में महिलाओं की कम भागीदारी पर ठोस आंकड़ों के साथ चिंता जताई।परिचर्चा से पॉलिटिकल फेलोशिप प्रोग्राम, राजनीतिक दलों में महिलाओं के लिए समर्पित फंड और प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व पर नियंत्रण, जैसे सुझाव उभरकर सामने आए। सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। आयोजन में डॉ हिना फिरदौस, डॉ प्रतिभा वारवाड़े, डॉ निर्मली बोरदोलोई, एंजेल नाग और डॉ तनुश्री कुंडू का योगदान रहा।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:भाजपा ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम की बताई खूबियां
read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:छात्र-छात्राओं को दिलाई गई सशक्तिकरण की शपथ

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।