झारखंड में भी मिक्स्ड लैंड यूज व्यवस्था लागू करने की तैयारी, एक ही छत के नीचे स्कूल, अस्पताल और दुकान; और क्या फायदे?
झारखंड में वर्तमान मास्टर प्लान के अनुसार, मिश्रित भूमि उपयोग की मंजूरी सीमित दायरे में दी जाती है। यह मंजूरी मास्टर प्लान व संबंधित जोन के आधार पर तय होती है, जहां पहले से निर्धारित रहता है कि किसी क्षेत्र में कौन-कौन सी गतिविधियां संचालित की जा सकती हैं।

केंद्र सरकार की डीरेगुलराइजेशन नीति के तहत झारखंड के शहरों में भी मिक्स्ड लैंड यूज (मिश्रित भूमि उपयोग) व्यवस्था लागू करने की तैयारी तेज हो गई है। इस व्यवस्था के तहत शहरी क्षेत्र में एक ही आवासीय परिसर में स्कूल, अस्पताल, कार्यालय, दुकानें, सेवा केंद्र समेत अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इस व्यवस्था से शहरों के अनावश्यक विस्तार पर नियंत्रण तो लगेगा ही प्रदूषण की समस्या से भी निजात मिलेगी।
झारखंड में वर्तमान मास्टर प्लान के अनुसार, मिश्रित भूमि उपयोग की मंजूरी सीमित दायरे में दी जाती है। यह मंजूरी मास्टर प्लान व संबंधित जोन के आधार पर तय होती है, जहां पहले से निर्धारित रहता है कि किसी क्षेत्र में कौन-कौन सी गतिविधियां संचालित की जा सकती हैं। लेकिन, केंद्र सरकार की नई मिक्स्ड लैंड यूज नीति लागू होने के बाद मौजूदा शहरों के साथ-साथ नई टाउनशिप में भी इस व्यवस्था को व्यापक रूप से लागू किया जा सकेगा। झारखंड में इसे लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ संबंधित विभागों का मंथन शुरू हो गया है।
ग्रुप ऑफ सेक्रेट्रीज का गठन
गौरतलब है कि मिक्स्ड लैंड यूज नीति के क्रियान्वयन की निगरानी स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय ने इसके लिए सचिवों के समूह (ग्रुप ऑफ सेक्रेट्रीज) का गठन किया है। यह समूह विभिन्न राज्यों से समन्वय कर रहा है। समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय को उपलब्ध करा रहा है। केंद्र सरकार इसे कारोबार में सुगमता के साथ - साथ शहरी सुधारों से जुड़े प्रमुख एजेंडे के रूप में देख रही है।
नीति के पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा
झारखंड में फिलहाल इस नीति के पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है। यदि इसे प्रभावी रूप से लागू किया जाता है तो रांची, जमशेदपुर, धनबाद और बोकारो जैसे शहरों में शहरी विकास का नया मॉडल विकसित हो सकता है, जहां नागरिकों को अधिकांश सुविधाएं एक ही क्षेत्र में मिलेंगी और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।
पॉजिटिव लिस्ट से नेगेटिव लिस्ट मॉडल की ओर
वर्तमान शहरी नियोजन व्यवस्था में भूमि उपयोग के लिए पॉजिटिव लिस्ट प्रणाली लागू है। इसमें मास्टर प्लान और जोनिंग नियमों के तहत यह निर्धारित किया जाता है कि किसी क्षेत्र में कौन-कौन सी गतिविधियां संचालित की जा सकती हैं। यानी अनुमति प्राप्त गतिविधियों की सूची पहले से तय रहती है।
नेगेटिव लिस्ट मॉडल अपनाने पर विचार
प्रस्तावित मिक्स्ड लैंड यूज नीति में नेगेटिव लिस्ट मॉडल अपनाने पर विचार किया जा रहा है। इसके तहत केवल उन गतिविधियों का उल्लेख किया जाएगा, जिन्हें किसी क्षेत्र में संचालित करने की अनुमति नहीं होगी। इनमें मुख्य रूप से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली, प्रदूषण फैलाने वाली, खतरनाक रसायनों से जुड़ी या जनस्वास्थ्य पर प्रभाव डालने वाली गतिविधियां शामिल हो सकती हैं। शेष गतिविधियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित करने की अनुमति होगी। इससे अनुमोदन प्रक्रिया सरल होगी, निवेश बढ़ेगा और शहरी विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
पर्यावरण संरक्षण के साथ ही यातायात पर लोड घटेगा
नीति का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य पर्यावरणीय दृष्टि से टिकाऊ शहरी विकास को बढ़ावा देना भी है। वर्तमान में लोगों को स्कूल, अस्पताल, कार्यालय और बाजार जैसी सुविधाओं तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इससे वाहनों की संख्या और ईंधन खपत बढ़ती है। मिक्स्ड लैंड यूज व्यवस्था से आवश्यक सेवाएं एक ही क्षेत्र में उपलब्ध होंगी।
इससे वाहनों की आवाजाही कम होगी, ट्रैफिक पर दबाव घटेगा और वायु प्रदूषण में कमी आएगी। शहरी योजनाकार इसे भविष्य के लिए वॉक-टू-वर्क और वॉक-टू-सर्विस मॉडल की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।
निवेश को बढ़ावा मिलेगा
नीति के तहत यह भी तय किया जाएगा कि किन गतिविधियों को अनुमति दी जाएगी और किन पर प्रतिबंध रहेगा। प्रारंभिक स्तर पर प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग, खतरनाक रसायनों से जुड़े प्रतिष्ठान, अत्यधिक शोर उत्पन्न करने वाली इकाइयां तथा पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा करने वाली गतिविधियां प्रतिबंधित श्रेणी में रखी जा सकती हैं। राज्यों से इस संबंध में सुझाव भी मांगे गए हैं। केंद्र सरकार का मानना है कि इस नीति से निवेश को बढ़ावा मिलेगा और परियोजनाओं के लिए अनुमति लेने की प्रक्रिया सरल होगी।
इसके तहत उद्योग, वन, राजस्व, नगर विकास, आवास, प्रदूषण नियंत्रण, ऊर्जा, श्रम और अग्निशमन जैसे विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। साथ ही सिंगल विंडो सिस्टम को अधिक प्रभावी बनाकर विभिन्न मंजूरियों को एकीकृत करने की तैयारी की जा रही है।
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