रांची फिर बनेगा झरनों का शहर, जिला प्रशासन ने कसी कमर; पहचान दिलाने की तैयारी शुरू
रांची को झरनों का शहर के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और पर्यटन के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए जिला प्रशासन लगातार प्रयासरत है।

रांची में मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में सोमवार को समाहरणालय ब्लॉक-ए स्थित सभागार में जिला पर्यटन संवर्धन परिषद की शासी निकाय एवं कार्यकारिणी समिति की संयुक्त वार्षिक बैठक हुई। बैठक में सांसदों और विधायकों के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न विभागों के वरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में रांची जिले को झारखंड के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने, पर्यटकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने और सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया गया। उपायुक्त ने कहा कि रांची को झरनों का शहर के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और पर्यटन के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए जिला प्रशासन लगातार प्रयासरत है।
सभी अधिसूचित पर्यटन स्थलों पर सौर ऊर्जा आधारित लाइटें लगाने का निर्णय लिया गया, जिससे रात्रिकालीन सुविधाएं बेहतर होंगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। मारसिल्ली पहाड़ के समग्र विकास के लिए विस्तृत योजना तैयार करने तथा वहां हाई मास्ट लाइट लगाने की अनुशंसा की गई। प्रसिद्ध दिउड़ी मंदिर के विकास के लिए अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव भी रखा गया, ताकि सुविधाओं का विस्तार किया जा सके।
रांची के प्रमुख झरने
हुंडरू जलप्रपात (Hundru Falls) रांची-पुरुलिया मार्ग पर स्थित यह राज्य का सबसे प्रसिद्ध झरना है, जो सुवर्णरेखा नदी पर लगभग 320 फीट की ऊँचाई से गिरता है।
दशम जलप्रपात (Dassam Falls) कांची नदी पर स्थित यह 144 फीट ऊँचा झरना, अपने 10 धाराओं के लिए जाना जाता है, जो एक मनोरम दृश्य बनाता है।
जोन्हा जलप्रपात (Jonha Falls) इसे 'गौतमधारा' के नाम से भी जाना जाता है और यह रांची से लगभग 40 किमी दूर स्थित है, जहाँ रारू नदी गिरती है।
पंचघाघ जलप्रपात (Panch Gagh Falls) यह पाँच अलग-अलग धाराओं का एक अनूठा समूह है, जो पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।




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