Preparations underway to cancel the registration of 2500 pharmacists झारखंड सरकार हजारों फार्मासिस्ट का रजिस्ट्रेशन क्यों रद्द कर रही? 15 दिन में मांगा जबाव, Jharkhand Hindi News - Hindustan
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झारखंड सरकार हजारों फार्मासिस्ट का रजिस्ट्रेशन क्यों रद्द कर रही? 15 दिन में मांगा जबाव

झारखंड स्टेट फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार सह सचिव प्रशांत कुमार पांडेय ने इस बाबत आदेश जारी करते हुए ऐसे सभी फार्मासिस्टों से स्पष्टीकरण मांगा है।

Fri, 23 Jan 2026 07:55 AMRatan Gupta हिन्दुस्तान, रांची
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झारखंड सरकार हजारों फार्मासिस्ट का रजिस्ट्रेशन क्यों रद्द कर रही? 15 दिन में मांगा जबाव

झारखंड स्टेट फार्मेसी काउंसिल राज्य के वैसे फार्मासिस्टों के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी में है, जिन्होंने अपने रजिस्ट्रेशन का नवीकरण बीते दो सालों से या उससे अधिक समय से नहीं कराया है। ऐसे फार्मासिस्टों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है। झारखंड स्टेट फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार सह सचिव प्रशांत कुमार पांडेय ने इस बाबत आदेश जारी करते हुए ऐसे सभी फार्मासिस्टों से स्पष्टीकरण मांगा है।

15 दिन में सौंपे जबाव

अपने आदेश में काउंसिल के निबंधक ने कहा है कि ऐसे सभी फार्मासिस्ट 15 दिनों के अंदर अपना स्पष्टीकरण काउंसिल कार्यालय में समर्पित करें कि किस परिस्थिति में उन्होंने अपने रजिस्ट्रेशन का नवीकरण नहीं कराया है। हर वर्ष रजिस्ट्रेशन का नवीकरण कराने का प्रावधान है।

स्पष्टीकर प्राप्त नहीं होने की स्थिति में माना जाएगा कि इस संबंध में आपको कुछ नहीं कहना है तथा काउंसिल अग्रेतर प्रक्रिया अपनाने के लिए स्वतंत्र है। निबंधक ने कहा है कि बीते दिनों झारखंड स्टेट फार्मेसी काउंसिल की बैठक में लिए गए निर्णय के आलोक में यह आदेश जारी किया गया है।

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2500 फार्मासिस्ट नहीं करा रहे नवीकरण

बता दें कि काउंसिल में वर्तमान में 16787 फार्मासिस्ट निबंधित हैं, जिनमें लगभग 2500 फार्मासिस्ट नवीकरण नहीं करा रहे हैं। वहीं, सैकड़ों फार्मासिस्ट ऐसे हैं, जिनका निबंधन दो राज्यों की काउंसिल में है। यानी जिन्होंने एक राज्य से अपना निबंधन स्थानांतरण कराए बगैर झारखंड काउंसिल में निबंधन करा लिया है।

रजिस्ट्रेशन के नवीकरण में ये समस्या आ रही

अरबिंद प्रसाद सिंह लगभग 30 वर्षों तक रिम्स में बतौर फार्मासिस्ट कार्यरत रहते हुए 2016 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं। प्रसाद ने बताया कि उनका झारखंड स्टेट फार्मेसी काउंसिल में दिसंबर 2025 तक निबंधन है। बीते एक सप्ताह से अधिक समय से वह अपने निबंधन का ऑनलाइन नवीकरण कराने के लिए प्रयास कर रहे हैं, लेकिन नहीं हो पा रहा है।

रजिस्ट्रेशन नवीकरण के लिए आवेदन करने के बाद उनका ओटीपी ही नहीं आ रहा है। अरबिंद प्रसाद ऐसे अकेल नहीं हैं, हजारों फार्मासिस्टों के साथ यही समस्या हो रही है। फार्मासिस्टों के अनुसार काउंसिल द्वारा जानबूझकर ओटीपी नहीं भेजा जाता है, ताकि फार्मासिस्ट काउंसिल कार्यालय आने को मजबूर हो।

बगैर चढ़ावा दिए न रजिस्ट्रेशन और न ही नवीकरण

फार्मासिस्ट कार्यालय आने से डरते हैं, उनका कहना है कि कार्यालय आने पर बगैर चढ़ावा दिए न तो निबंधन होता है, न ही नवीकरण किया जाता है। इस संबंध में काउंसिल के निबंधक सह सचिव प्रशांत कुमार पांडेय ने बताया कि फार्मासिस्ट अपनी गलतियों का ठीकरा कार्यालय पर फोड़ते हैं। निबंधन एवं नवीकरण से प्राप्त शुल्क की राशि ही काउंसिल के राजस्व का स्रोत है।

नवीकरण नहीं होने से सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है। साथ ही सरकार के पास सही डेटा भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। जानबूझकर ओटीपी नहीं भेजने के बारे में उन्होंने बताया कि पहली बार ऑनलाइन निबंधन/नवीकरण के समय प्राप्त पासवर्ड सुरक्षित रखना होता है। फार्मासिस्ट उसे सुरक्षित नहीं रखते हैं, जिस कारण ओटीपी में परेशानी होती है। कई बार फोन पर भी ओटीपी मांगा जाता है, लेकिन फोन पर इसलिए नहीं दिया जा सकता, क्योंकि कई फार्मासिस्ट दवा दुकानों से संबद्ध हैं। ऐसे में फोन पर पता करना मुश्किल होता है कि फोन करने वाला दुकानदार है या फार्मासिस्ट।