नीतीश के दांव पर झारखंड में भी बढ़ी सियासी गहमागहमी, क्या बोली JMM-कांग्रेस
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के राजनीतिक निर्णय पर उनके पुराने मित्र सरयू राय ने सवाल खड़े किए हैं। वहीं, प्रदेश भाजपा ने इसे स्वाभाविक कदम माना है, जबकि कांग्रेस ने इस राजनीतिक फैसले पर बीजेपी को घेरा है।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के राजनीतिक निर्णय पर उनके पुराने मित्र सरयू राय ने सवाल खड़े किए हैं। वहीं, प्रदेश भाजपा ने इसे स्वाभाविक कदम माना है, जबकि कांग्रेस ने इस राजनीतिक फैसले पर भाजपा को घेरा है। आइए जानते हैं भाजपा और कांग्रेस ने इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया दी है।
कांग्रेस विधायक व मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि नीतीश कुमार का निर्णय अत्यंत आश्चर्यजनक और चिंताजनक है। मुख्यमंत्री पद जैसे महत्वपूर्ण दायित्व को छोड़ राज्यसभा जाने का कदम कहीं न कहीं आत्मघाती राजनीतिक फैसला प्रतीत हो रहा है। आखिर क्या परिस्थिति आई कि उन्हें यह निर्णय लेना पड़ा। क्या राजनीतिक दबाव है? क्या उन्हें मजबूर किया जा रहा है? यदि ऐसा है तो यह न केवल उनके लिए, बल्कि लोकतंत्र की भावना के लिए भी गंभीर विषय है। इरफान ने कहा कि अगर नेतृत्व परिवर्तन ही करना था, तो नीतीश के पास विकल्प मौजूद थे। वह अपने उत्तराधिकारी को आगे बढ़ाते। उन्हें उपमुख्यमंत्री या मुख्यमंत्री बनाते और स्वयं मार्गदर्शक की भूमिका निभाते। फिर राज्यसभा जाने की इतनी जल्दबाजी क्यों?
‘नीतीश कुमार से राजनीतिक छल’
झारखंड प्रदेश राजद प्रवक्ता डॉ मनोज कुमार ने प्रेस बयान जारी कर कहा कि भाजपा ने राजनीतिक छल के तहत बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हटाने की साजिश रची। उन्होंने कहा कि भाजपा लंबे समय से प्रयास कर रही थी, आखिरकर उन्हें अपने चंगुल में फंसा ही लिया।
भाजपा ने कुचक्र और राजनीति के तहत इतना मानसिक दबाव बनाया ताकि उन्हें कुर्सी छोड़ने पर मजबूर होना पड़े। जनता द्वारा चुनी हुई सरकार के मुखिया को प्रेशर पॉलिटिक्स कर जबरदस्ती कुर्सी से हटाना अन्यायपूर्ण। बिहार की जनता के साथ धोखा है। भाजपा जब-जब किसी दल को अपने साथ रखकर राजनीति की है, तब-तब उस पार्टी को बर्बाद करने का साजिश की। बिहार में भाजपा ने यही कुचक्र किया ताकि जदयू वहां से समाप्त हो जाए।
राज्यसभा होगा गौरवान्वित: भाजपा
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि नीतीश कुमार पिछले तीन-चार दशकों से बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे हैं। बिहार को जंगलराज से बाहर निकालकर सुशासन की स्थापना में उनका योगदान सर्वोच्च रहा है। उनके नेतृत्व में राज्य को स्थिरता, विकास और व्यवस्था की नई दिशा मिली। उन्होंने हमेशा सुचिता, सम्मान और नैतिकता के मूल्यों को स्थापित किया। अब राज्यसभा सदस्य के रूप में भी सदन नीतीश कुमार के अनुभव, दृष्टि और नेतृत्व से निश्चित रूप से गौरवान्वित होगा।




साइन इन