बिहार के बाद झारखंड में भी लागू होगी शराबबंदी? हेमंत सोरेन के मंत्री ने दिए संकेत; रखी ये शर्त
बिहार के बाद अब झारखंड में भी शराबबंदी के संकेत मिले हैं। प्रदेश के उत्पाद एंव मद्य निषेध मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने सदन में घोषणा की है कि केंद्र सरकार उनके अलग-अलग विभागों के 2 लाख करोड़ रुपए की बकाया राशि का भुगतान कर दे तो शराब बंदी के बारे में विचार किया जा सकता है।

झारखंड के उत्पाद और मद्य निषेध मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने सदन में घोषणा की कि भाजपा केंद्र सरकार से अलग-अलग विभागों के दो लाख करोड़ रुपये की बकाया राशि का भुगतान कराए, इसके बाद सरकार झारखंड में शराबबंदी पर विचार करेगी। वे सदन में अनुदान मांगों पर चर्चा के बाद सरकार का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के पास अभी भी 6270 करोड़ रुपया बकाया है। चार बार वे केंद्रीय मंत्री से मिल चुके हैं। उन्होंने कहा कि जेलों में एक सप्ताह में फोर-जी जैमर लगाने की कार्यवाही शुरू हो जाएगी। झारखंड सरकार ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से एमओयू करेगी।शराब घोटाले मामले पर चार्जशीट की तैयारी चल रही है।
वित्तमंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि केंद्र सरकार के पास 13 हजार करोड़ रुपये बकाया है। यह राशि समय पर मिल जाती तो अब तक बजट का 90-95% तक खर्च हो जाता।
नशे के खिलाफ जिलों में बनेगी टास्कफोर्स
रांची। राज्य में नशे के कारोबार पर लगाम को हर जिले में टास्क फोर्स बनेगी। प्रभारी मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने शनिवार को सदन में यह घोषणा की। वे विधायक रोशन लाल चौधरी के अल्पसूचित प्रश्न का जवाब दे रहे थे। चौधरी ने ड्रग्स कारोबार और युवाओं में बढ़ती नशे की लत का मुद्दा उठाया था। मंत्री ने कहा कि नशे के कारण युवा पीढ़ी भटक रही है। ऐसे में नशे के खिलाफ हर जिले में विशेष टास्क फोर्स गठित की जाएगी और सख्त अभियान चलाया जाएगा।
विधायक चौधरी ने कहा था कि हजारीबाग के अलावा रामगढ़ जिले के पतरातू, बड़कागांव और केरेडारी सहित कई इलाकों में नशीले पदार्थों का धंधा तेजी से फैल रहा है। युवाओं में नशे की लत बढ़ रही है। अपराध में इजाफा देखने को मिल रहा है।
सख्ती से नशा के धंधे में कमी आई
मंत्री ने बताया कि आंकड़ों पर गौर करें तो 2026 में महज 17 केस दर्ज हुए हैं। इससे प्रतीत होता है कि नशे के कारोबार पर नियंत्रण स्थापित हुआ है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में हजारीबाग और आसपास के थाना क्षेत्रों में करोड़ों रुपये के ड्रग्स की बरामदगी से ड्रग माफिया की गहरी पैठ का संकेत भी मिला है। सदन में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, 2019 से 2023 के बीच एनडीपीएस एक्ट के तहत राज्य में 2396 मामले दर्ज हुए थे।




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