सऊदी अरब में मारा गया झारखंड का मजदूर, 3 महीने बाद भी नहीं मिला शव; परिवार ने लगाई गुहार
महतो का शव अब तक भारत नहीं लाया जा सका है। इससे परेशान परिवार ने बुधवार को झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार से मुलाकात कर हस्तक्षेप की मांग की है।

सऊदी अरब में तीन महीने पहले पुलिस और अपराधियों के बीच हुई मुठभेड़ के दौरान झारखंड के एक प्रवासी मजदूर विजय कुमार महतो की मौत हो गई थी। महतो का शव अब तक भारत नहीं लाया जा सका है। इससे परेशान परिवार ने बुधवार को झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार से मुलाकात कर हस्तक्षेप की मांग की है।
परिजनों का आरोप है कि जिस निजी कंपनी में विजय कुमार महतो काम करता था, वह मुआवजा देने से बच रही है, जिसकी वजह से शव लाने में देरी हो रही है। हालांकि, इस मामले में लोक भवन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
कंपनी पर मुआवजा रोकने का आरोप
परिवार के साथ राज्यपाल से मिलने पहुंचे प्रवासी मजदूरों के मुद्दों पर काम करने वाले सोशल एक्टविस्ट सिकंदर अली ने बताया कि परिजनों ने कई बार संबंधित निजी कंपनी को मुआवजे के लिए चिट्ठी लिखी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अली के मुताबिक, मौत से पहले विजय कुमार महतो ने अपनी पत्नी को एक वीडियो संदेश भेजकर बताया था कि वह कंपनी साइट पर काम कर रहा था, तभी मुठभेड़ के दौरान पुलिस की गोली उसे लग गई। परिवार ने शव वापस लाने के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय और श्रम विभाग को भी आवेदन दिए हैं, लेकिन अब तक कोई फायदा नहीं हुआ है।
एनओसी न मिलने से अटकी प्रक्रिया
राज्य प्रवासी नियंत्रण सेल की टीम लीडर शिखा लाकड़ा ने बताया कि मामला फिलहाल सऊदी अरब के पब्लिक प्रॉसिक्यूशन ऑफिस के पास है। शव भारत लाने के लिए परिजनों की ओर से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जरूरी है। उन्होंने कहा, “एनओसी मिलने के बाद ही सऊदी पुलिस और पब्लिक प्रॉसिक्यूशन ऑफिस से क्लियरेंस मिल सकता है। दुर्भाग्य से मृतक की पत्नी एनओसी देने से हिचक रही है, जिससे प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।”
अक्टूबर में हुई थी मौत
विजय कुमार महतो गिरिडीह जिले के डुमरी प्रखंड के दूधपानिया गांव का रहने वाला था। पिछले नौ महीने से सऊदी अरब में एक निजी कंपनी में टावर लाइन फिटर के तौर पर काम कर रहा था। सोशल एक्टविस्ट सिकंदर अली ने बताया कि 16 अक्टूबर को विजय ने अपनी पत्नी को बताया था कि मुठभेड़ के दौरान वह घायल हो गया है। परिवार को लगा कि उसका इलाज चल रहा है, लेकिन 24 अक्टूबर को कंपनी ने उसकी मौत की सूचना मिली थी।
घर में नहीं जला चूल्हा
परिवार के मुताबिक, स्थानीय परंपरा के अनुसार शव का अंतिम संस्कार होने तक घर में खाना नहीं पकाया जाता। इसलिए तीन महीने से हमारे घर में चूल्हा नहीं जला है। हम सिर्फ शव के लौटने का इंतजार कर रहे हैं। परिवार ने सरकार से गुहार लगाई है कि उनके बेटे का शव जल्द से जल्द वापस लाया जाए।




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