झारखंड बनने के बाद ट्रेजरी से सभी निकासी की जांच, वित्त मंत्री ने दिए आदेश
झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने खजाने से अवैध निकासी मामले में बड़ा कदम उठाते हुए घोषणा की है कि राज्य गठन के समय से लेकर अब तक प्रदेश के सभी 24 जिलों की 33 ट्रेजरियों की सघन जांच की जाएगी। दोषियों से राशि की रिकवरी भी होगी।

झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने ट्रेजरी से अवैध निकासी मामले में कहा है कि झारखंड गठन से अब तक 24 जिलों के 33 ट्रेजरी की जांच की जाएगी। इसमें जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। राशि की भी रिकवरी की जाएगी। वित्त मंत्री ने सोमवार को सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत की।
उन्होंने कहा कि हजारीबाग और बोकारो ट्रेजरी से अवैध निकासी मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री ने एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के नेतृत्व में टीम गठित की है। इसमें महालेखाकार कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी भी रहेंगे। टीम हर बिंदु पर जांच करेगी। उन्होंने कहा कि सालों से चल रही यह गड़बड़ी अब पकड़ी गई है। इसलिए राज्य गठन के बाद से अब तक ट्रेजरी से हुई निकासी की जांच कराने का निर्णय लिया गया है।
हेमंत सरकार भ्रष्टाचार पर लगातार लगा रही अंकुश
वित्त मंत्री ने कहा कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार में भ्रष्टाचार पर लगातार अंकुश लगाया जा रहा है। वर्षों से हो रहे अवैध निकासी वर्तमान सरकार के कार्यकाल में पकड़ी गई है।
मामले की सीबीआई और ईडी जांच को पीआईएल दाखिल
ट्रेजरी से अवैध निकासी मामले की सीबीआई और ईडी से जांच कराने की मांग को लेकर सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका (पीआईएल) दाखिल की गई। प्रार्थी दानियल दानिश ने अपनी याचिका में पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने और मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए हैं। कहा है कि सभी जिलों में टीए, डीए एवं अन्य को भुगतान के नाम पर हुई फर्जी निकासी की जांच की जाए। झारखंड पुलिस उन सभी बॉडीगार्ड्स और स्टाफ की टीए-डीए की जांच करे, जो गलत तरीके से अपने को मुख्यालय से दूर दिखाकर अवैध रूप से भत्ते की वसूली कर रहे हैं। इसके अलावा याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया है कि आरोपी कौशल पांडेय को कई आईपीएस अधिकारियों से सराहनीय सेवा प्रमाणपत्र मिले थे।
खुलासा : 10 वर्ष से लेखा कार्य देख रहे थे सिपाही
ट्रेजरी मामले से जुड़ा एक और नया खुलासा हुआ है। वेतन निकासी में फर्जीवाड़ा के आरोपी गिरफ्तार सिपाही शंभु कुमार, रजनीश सिंह और धीरेंद्र सिंह पुलिस मैन्युअल के खिलाफ हजारीबाग एसपी ऑफिस में 10 साल से लेखा कार्य देख रहे थे। इस खुलासे के बाद उन अधिकारियों की तलाश तेज कर दी गई है, जिन्होंने इन सिपाहियों को अकाउंट सेक्शन में रखकर कार्य कराया जा रहा था। पुलिस मैन्युअल के अनुसार, लेखा कार्य हेड क्लर्क एवं अकाउंटेंट की जिम्मेदारी होती है।




साइन इन