झारखंड राज्यसभा चुनाव: निर्दलीय परिमल नाथवानी का राह हो सकती है आसान, क्या समीकरण?
झारखंड में राज्यसभा चुनावी समीकरणों के बीच भाजपा ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारने का निर्णय लिया है। झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर क्या बन रहे समीकरण ताजा हाल बयां करती यह रिपोर्ट…

झारखंड में राज्यसभा चुनाव काफी रोचक हो गया है। भाजपा ने बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए अपना उम्मीदवार नहीं उतारने का निर्णय लिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी का भी समर्थन कर सकती है। यदि ऐसा हुआ तो नाथवानी की राह आसान हो सकती है। नाथवानी 8 जून को अपना नामांकन दाखिल करेंगे। वहीं कांग्रेस के सामने उसके अपने 16 विधायकों को एकजुट रखने की बड़ी चुनौती है।
BJP ने बनाए रखा है सस्पेंस
सूत्रों ने बताया कि भाजपा के लगभग एक दर्जन विधायकों के साथ जदयू, लोजपा और आजसू के विधायकों को भी नाथवानी के प्रस्तावक बनने का निर्देश दिया गया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर कोई बयान सामने नहीं आया है। कुल मिलाकर भाजपा ने सस्पेंस बनाए रखा है। परिमल नाथवानी सीएम हेमंत सोरेन से शनिवार को मुलाकात के बाद दिल्ली रवाना हो गए थे। राजनीतिक सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने साफ कर दिया था कि झामुमो उनके नामांकन में प्रस्तावक की भूमिका नहीं निभाएगी।
सीएम सोरेन की मौजूदगी में मंथन
जानकारों का मानना है कि JMM कांग्रेस के खिलाफ प्रत्यक्ष विरोधी छवि नहीं बनाना चाहती थी इसलिए उसने नाथवानी का प्रस्तावक बनने से दूरी बनाने का फैसला किया है। हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास में रविवार को मंत्रियों और विधायकों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें सभी मंत्री और विधायक मौजूद रहे। बैठक में राज्यसभा चुनाव की रणनीति समेत अन्य विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।
विधायकों को निर्देश
बैठक में कांग्रेस और जेएमएम के दोनों राज्यसभा उम्मीदवार भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री सोरेन ने सभी से एकजुट होकर चुनाव प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश दिए।
BJP के समर्थन से आसान हो सकती है नाथवानी की राह
बताया जाता है कि परिमल नाथवानी ने BJP का समर्थन हासिल करने की कोशिशें की। जानकारों की मानें तो नाथवानी को यदि भाजपा का समर्थन मिलता है तो उनकी राह कुछ आसान हो सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि नाथवानी को भाजपा का समर्थन मिला तो उन्हें जीत के लिए कुछ ही अतिरिक्त मतों की जरूरत होगी। तेजी से बदलते समीकरणों के बीच माना जा रहा है कि अतिरिक्त मतों की व्यवस्था करना बहुत कठिन भी नहीं होगा।
कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती
दूसरी ओर कांग्रेस के सामने अपने प्रत्याशी को जीत दिलाने की चुनौती और कठिन हो गई है। सनद रहे सीएम हेमंत सोरेन पहले से कांग्रेस नेतृत्व से आग्रह करते रहे हैं कि कांग्रेस अपना उम्मीदवार न उतारे और झामुमो को दोनों सीटों पर उम्मीदवार खड़ा करने दे। हालांकि इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच सहमति नहीं बन सकी। कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने 16 विधायकों को एकजुट बनाए रखना है।
टूटफूट पड़ेगी भारी
यदि कांग्रेस के भीतर टूट-फूट या क्रॉस वोटिंग होती है तो इससे उसकी राजनीतिक स्थिति कमजोर पड़ सकती है। इसका असर गठबंधन की राजनीति पर भी पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। ऐसे में इस राज्यसभा चुनाव के लिए 18 जून को होने वाले मतदान के बाद ही साफ होगा कि कांग्रेस अपने सभी विधायकों का समर्थन अपने प्रत्याशी प्रणव झा के पक्ष में सुनिश्चित कर पाई या नहीं। आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।




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