यूपी में राष्ट्रपति शासन की मांग, झारखंड के मंत्री इरफान अंसारी का राष्ट्रपति को लेटर
झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर यूपी समेत अन्य राज्यों में अल्पसंख्यकों और उलेमाओं के खिलाफ हो रही हिंसा पर चिंता जताई है। उन्होंने इसे संवैधानिक मूल्यों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।

झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर यूपी समेत अन्य राज्यों में अल्पसंख्यकों और उलेमाओं के साथ हो रही हिंसा पर गहरी चिंता जताई है। इसको लेकर उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र भी लिखा है। उन्होंने अपने लेटर में कहा है कि ऐसी घटनाएं संवैधानिक मूल्यों और देश की गंगा-जमुनी तहजीब के खिलाफ हैं। इरफान अंसारी ने राष्ट्रपति से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। इरफान अंसारी ने आग्रह किया है कि इन घटनाओं की विस्तृत रिपोर्ट मांगी जानी चाहिए।
यूपी की कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल
झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने यूपी की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे लेटर में कहा है कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को बराबरी और सुरक्षा का अधिकार देता है लेकिन हाल की घटनाएं संविधान की इस भावना को नुकसान पहुंचा रही हैं।
राष्ट्रपति से दखल देने की अपील
इरफान अंसारी ने राष्ट्रपति से यूपी की कानून-व्यवस्था पर दखल देने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि यदि किसी राज्य में धर्म के आधार पर खुलेआम हिंसा, अपमान और भय का माहौल बनता है और दोषियों पर ऐक्शन नहीं होता है तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों के लिए बड़ा खतरा और गंभीर चुनौती बनता है।
राष्ट्रपति शासन की मांग
इरफान अंसारी ने अपने लेटर में आगे कहा है कि रमजान के महीने में यदि कोई समुदाय खुद को असुरक्षित महसूस करता है तो यह पूरे राष्ट्र के लिए चिंताजनक बात है। ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार से विस्तृत और सार्वजनिक रिपोर्ट तलब की जानी चाहिए। यदि उठाई गई बातों पर संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन पाया जाता है तो कड़े संवैधानिक कदम उठाए जाने चाहिए। इन कदमों में राष्ट्रपति शासन लगाना भी शामिल है।
गंगा-जमुनी तहजीब का दिया हवाला
इरफान अंसारी ने आगे कहा है कि भारत की पहचान उसकी विविधता और आपसी भाईचारे से है। इसे कमजोर करने वाली किसी भी प्रवृत्ति को रोका जाना बेहद जरूरी है। यह किसी दल विशेष के विरोध का सवाल नहीं है। यह संविधान, न्याय, समानता और देश की गंगा-जमुनी तहजीब की रक्षा का सवाल है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई है कि राष्ट्रपति शांति, सद्भाव और न्याय के लिए जरूरी हस्तक्षेप करेंगी।




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