jharkhand high court sent notice to ranchi administration over encroachment removal कब्जा हटाने के बजाए संरचना क्यों तोड़ी, तथ्य क्यों छुपाए गए; झारखंड हाई कोर्ट प्रशासन पर क्यों हुआ सख्त, Jharkhand Hindi News - Hindustan
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कब्जा हटाने के बजाए संरचना क्यों तोड़ी, तथ्य क्यों छुपाए गए; झारखंड हाई कोर्ट प्रशासन पर क्यों हुआ सख्त

रांची के सुखदेवनगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से जुड़े महादेव उरांव की अवमानना याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस राजेश शंकर की कोर्ट ने निर्माण ध्वस्त किए जाने पर नाराजगी जताते हुए प्रशासन से पूछा कि कब्जा हटाने के बजाय सीधे संरचना क्यों तोड़ी गई।

Sat, 11 April 2026 07:54 AMMohammad Azam हिन्दुस्तान, रांची
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कब्जा हटाने के बजाए संरचना क्यों तोड़ी, तथ्य क्यों छुपाए गए; झारखंड हाई कोर्ट प्रशासन पर क्यों हुआ सख्त

रांची के सुखदेवनगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से जुड़े महादेव उरांव की अवमानना याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस राजेश शंकर की कोर्ट ने निर्माण ध्वस्त किए जाने पर नाराजगी जताते हुए प्रशासन से पूछा कि कब्जा हटाने के बजाय सीधे संरचना क्यों तोड़ी गई। प्रार्थी से भी तथ्यों को छुपाने के आरोप पर जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान कोर्ट के पूर्व आदेश के आलोक में हेहल के अंचलाधिकारी (सीओ) की ओर से शोकॉज का जवाब दायर किया गया। इसमें बताया गया कि हस्तक्षेपकर्ताओं को तीन बार नोटिस दिया गया था, लेकिन उन्होंने आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए। इसके बाद निर्माण ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू की गई।

इस पर कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रशासन को पहले भूमि से कब्जा हटाने की कार्रवाई करनी चाहिए थी, न कि सीधे निर्माण गिराने की। साथ ही अदालत ने प्रार्थी से पूछा कि रिट याचिका दाखिल करते समय हस्तक्षेपकर्ताओं से एग्रीमेंट करने और उनसे पैसा लेने की बात क्यों छुपाई गई।

प्रतिवादी और सीओ को शोकॉज पर जवाब दाखिल करने का निर्देश

अदालत ने हस्तक्षेपकर्ताओं (पीड़ितों) की याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें मामले में प्रतिवादी बनाया और सीओ के शोकॉज पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही, हस्तक्षेपकर्ताओं को पूर्व में दी गई अंतरिम राहत यानी उनके खिलाफ किसी भी पीड़क कार्रवाई पर रोक अगले आदेश तक जारी रखने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 8 मई को निर्धारित की गई है।

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मामला मुंडारी प्रकृति की जमीन से अतिक्रमण हटाने का

यह मामला सुखदेवनगर के खादगड़ा शिव दुर्गा मंदिर रोड स्थित मुंडारी प्रकृति की जमीन पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से जुड़ा है। जिला प्रशासन ने यहां बने 12 मकानों को हटाने का आदेश दिया था, जिसके तहत बुलडोजर कार्रवाई शुरू की गई थी। हालांकि स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने प्रति कट्ठा 5.25 लाख रुपये की दर से जमीन खरीदी है और वर्षों से यहां मकान बनाकर रह रहे हैं। उनके अनुसार, 38.25 डिसमिल जमीन के लिए कुल करीब 1 करोड़ 8 लाख 93 हजार 750 रुपये का भुगतान किया गया। इसके बावजूद अब उन्हें बेदखल किया जा रहा है। हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता गौरव राज ने अदालत में पक्ष रखा।

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