बेटे की तरह पाला, वो मेरी दुनिया था; झारखंड एयर एंबुलेंस क्रैश में सचिन को खोकर भाई का दर्द
Jharkhand Air Ambulance Crash: झारखंड एयर एंबुलेंस क्रैश ने कई परिवारों को तोड़ दिया। हादसे में जान गंवाने वालों में सचिन मिश्रा भी शामिल थे। सचिन के भाई ने रोते-रोते हुए कहा कि बेटे की तरह पाला, वो मेरी दुनिया था।

Jharkhand Air Ambulance Crash: बेटे की तरह पाला, वो मेरी दुनिया था… झारखंड विमान हादसे में जान गंवाने वाले पैरामेडिक सचिन कुमार मिश्रा को याद करते हुए उनके बड़े भाई की आवाज बार-बार भर आ रही थी। उन्होंने बताया कि पिता के निधन के बाद सचिन ही घर का सहारा था, परिवार की ताकत था और उनके जीवन की नींव था। कम उम्र में ही उसने परिवार की जिम्मेदारियां उठानी शुरू कर दी थीं। अब अचानक हुए इस हादसे ने न सिर्फ एक जिंदगी छीनी है, बल्कि पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ दी है।
झारखंड एयर एंबुलेंस हादसे ने कई परिवारों को तोड़ कर रख दिया है। जिन सात लोगों ने एक जिंदगी बचाने के उद्देश्य से विमान में सवार होकर उड़ान भरी थी, उनकी अचानक मौत से परिजन गहरे सदमे में हैं। जानकारी के अनुसार, सोमवार रात बीचक्राफ्ट C90 विमान रांची से दिल्ली एक गंभीर रूप से झुलसे मरीज को लेकर जा रहा था। टेक ऑफ के कुछ ही देर बाद झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया के पास खराब मौसम के बीच दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
हादसे में दो पायलट, डॉक्टर समेत सात की मौत
हादसे में दो पायलट, एक डॉक्टर, एक पैरामेडिक, मरीज और उसके दो परिजन समेत कुल सात लोगों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान कैप्टन विवेक विकास भगत, कैप्टन सवराजदीप सिंह, संजय कुमार, डॉ. विकास कुमार गुप्ता, सचिन कुमार मिश्रा, अर्चना देवी और धुरू कुमार के रूप में हुई। मंगलवार को उनके परिजनों ने अपना दर्द साझा किया। एक पिता जिसने बेटे को पढ़ाने के लिए अपनी खेती की जमीन बेच दी, एक परिवार जिसकी इलाज की कोशिश एक बड़े हादसे में बदल गई और एक बड़ा भाई जिसने उसे पढ़ाया-लिखाया और नौकरी के काबिल बनाया।
वह मेरी पूरी दुनिया था
पैरामेडिक सचिन कुमार मिश्रा के परिवार के सदस्य ने उन्हें अपनी पूरी दुनिया बताया। उन्होंने कहा, “मेरा छोटा भाई सचिन कुमार मिश्रा मेरे लिए सब कुछ था। वह मेरे अपने बच्चे जैसा था। पिता के न रहने के बाद वही मेरा सहारा था। वह कई वर्षों से नर्सिंग पैरामेडिकल स्टाफ के रूप में काम कर रहा था और पिछले दो-तीन वर्षों से एंबुलेंस सेवा में कार्यरत था।”
उन्होंने आगे कहा, “हमने उसे कई बार कहा कि अस्पताल में नौकरी कर ले और इतना जोखिम न उठाए। मैंने उसे अपने साथ रहने को कहा था। वह मेरे जीवन की नींव था। उसके बिना जीवन अधूरा लग रहा है। मैंने बहुत मुश्किल से उसे पढ़ाया-लिखाया। कम उम्र में ही उसने परिवार की हालत देखकर काम करना शुरू कर दिया था, जबकि उसे ऐसा करने की जरूरत नहीं थी।”
इलाज की कोशिश बनी त्रासदी
गंभीर रूप से झुलसे मरीज संजय कुमार के एक रिश्तेदार ने बताया कि रांची में हालत में सुधार नहीं होने के बाद ही एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की गई थी। बेहतर इलाज की कोशिश ही जानलेवा साबित हुई। उन्होंने कहा, “संजय प्रसाद गंभीर रूप से जल गए थे। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन हालत में सुधार नहीं हो रहा था। इसलिए हम उन्हें दिल्ली शिफ्ट करना चाहते थे। इसी प्रक्रिया में हमने एक निजी जेट की व्यवस्था की, लेकिन वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया। उनका एक छोटा होटल था, जहां गैस सिलेंडर फट गया और उसी में वे बुरी तरह झुलस गए थे।”
सरकार पर गुस्सा
पीड़ित परिवार सरकार से नाराज हैं। उन्होंने कहा, “यहां की सरकार अक्षम है और कुछ नहीं कर रही। व्यवस्था बेहद कमजोर है। निजी अस्पतालों में भी परेशानी ही झेलनी पड़ती है और आज वही परेशानी मौत में बदल गई। हमारा घर पूरी तरह उजड़ गया। सिर्फ एक नहीं, कई परिवार बर्बाद हो गए। अगर रांची में ही उचित इलाज की सुविधा होती, तो हमें दिल्ली नहीं जाना पड़ता। इस हादसे में मेरा पूरा परिवार खत्म हो गया। दो बच्चे अब अनाथ जैसे हो गए हैं। उनका क्या होगा, मुझे नहीं पता।”
हादसे के समय क्या हुआ?
डीजीसीए के अनुसार, एयर एंबुलेंस ने रांची से नई दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी, लेकिन खराब मौसम के कारण उड़ान मार्ग बदलने का अनुरोध किया। इसके तुरंत बाद विमान रडार से गायब हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसे के समय तेज हवाएं, भारी बारिश, बिजली चमकना और तेज गर्जना हो रही थी। विमान तूफान के बीच जोरदार आवाज के साथ जमीन से टकराया। बाद में सिमरिया के पास घने जंगल से विमान के हिस्से बरामद किए गए।




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