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कर्ज लेकर एयर एंबुलेंस का हुआ था इंतजाम; झारखंड में प्लेन क्रैश की दर्दनाक कहानी

वह परिवार दुख में पहले से ही था, अब तो दर्द का पहाड़ टूट पड़ा है। झारखंड में हुए एयर एंबुलेंस क्रैश की कहानी बेहद दर्दनाक है। ढाबे में लगी आग से झुलसे इसके मालिक को बचाने की वह कोशिश ही नाकामयाब नहीं हुई, बल्कि 6 और लोगों की जिंदगी खौफनाक तरीके से छिन गई।

Tue, 24 Feb 2026 12:33 PMSudhir Jha लाइव हिन्दुस्तान, रांची
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कर्ज लेकर एयर एंबुलेंस का हुआ था इंतजाम; झारखंड में प्लेन क्रैश की दर्दनाक कहानी

वह परिवार दुख में पहले से ही था, अब तो दर्द का पहाड़ टूट पड़ा है। झारखंड में हुए एयर एंबुलेंस क्रैश की कहानी बेहद दर्दनाक है। ढाबे में लगी आग से झुलसे इसके मालिक को बचाने की वह कोशिश ही नाकामयाब नहीं हुई, बल्कि 6 और लोगों की जिंदगी खौफनाक तरीके से छिन गई। मरीज की जान बचाने के लिए परिवार ने लाखों रुपये कर्ज लेकर और दोस्तों-रिश्तेदारों की मदद से एयर एंबुलेंस का इंतजाम किया था।

रांची से दिल्ली जा रही एयर एंबुलेंस सोमवार की देर शाम करीब 7:30 बजे चतरा में क्रैश हो गई। विमान में मरीज समेत कुल सात लोग सवार थे। एयर एंबुलेंस में सवार मरीज संजय कुमार के साथ उनकी पत्नी, दो पायलट और डॉक्टर समेत सभी 7 लोगों की मौत हो गई। चतरा एसपी सुमित अग्रवाल ने बताया कि एयर एंबुलेंस क्रैश होकर सिमरिया के जंगल में गिरी। लातेहार के चंदवा निवासी संजय कुमार पलामू के बकोरिया में ढाबा चलाते थे। वे ढाबे में लगी आग के कारण झुलस गए थे। उनका इलाज रांची के देवकमल अस्पताल से सोमवार को दिल्ली रेफर किया था।

इसके बाद रांची से रेड बर्ड एविएशन की एयर एंबुलेंस ने सोमवार की देर शाम 7:10 बजे दिल्ली के लिए उड़ान भरी। सूचना के अनुसार, रात करीब 7.34 बजे इस फ्लाइट का संपर्क एटीसी से टूट गया। उसके बाद सिमरिया की कसारी पंचायत में चरकी टोंगरी स्थित करमटांड़ जंगल में विमान के क्रैश होने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही चतरा जिला प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू शुरू कर दिया। परिजनों ने बताया कि संजय कुमार को दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल ले जाया रहा था।

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ढाबे में भीषण आग लगने से झुलस गए थे संजय कुमार

संजय कुमार मूल रूप से चंदवा के रखात गांव के रहने वाले थे। वर्तमान में चंदवा स्थित गायत्री मोहल्ले में मकान बनाकर परिवार के साथ रह रहे थे। वे पलामू के बकोरिया में ढाबा चलाते थे। चार दिन पहले उनके ढाबे में भीषण आग लग गई थी, जिसमें वे गंभीर रूप से झुलस गए थे। इसके बाद उन्हें रांची स्थित देवकमल अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका इलाज चल रहा था। सोमवार को हालत नाजुक होने पर चिकित्सकों ने उन्हें दिल्ली रेफर किया था।

पिता की हत्या के बाद की थी नई शुरुआत

चंदवा की गलियों में सन्नाटा है। हर आंख नम है। एयर एंबुलेंस हादसे ने एक साथ छह घरों में मातम बिखेर दिया। सबसे ज्यादा टूट गया है वह आंगन, जहां 13 वर्षीय शिवम और 17 वर्षीय शुभम अब मां-बाप के साये से महरूम हो गए हैं। मृतक संजय साव मूल रूप से चंदवा थाना क्षेत्र के रखात गांव के निवासी थे। वर्ष 2004 में नक्सलियों ने उनके पिता की हत्या कर दी थी। भय के माहौल में परिवार 2001 में ही चंदवा आ बसा और 2002 में यहां घर बनाकर नई शुरुआत की।

दो बेटे हो गए अनाथ

रोजगार की तलाश में संजय ने 2003 से बकोरिया में किराये पर ढाबा चलाना शुरू किया। अपने मिलनसार और मृदुभाषी स्वभाव से उन्होंने लोगों के बीच खास पहचान बनाई। हाल ही में ढाबे में लगी आग में गंभीर रूप से झुलसने के बाद भी चंदवा के पड़ोसियों ने उनकी भरपूर मदद की थी। संजय पांच भाइयों में दूसरे स्थान पर थे। सबसे बड़े भाई विजय साव बकोरिया में ही ढाबा संचालित करते हैं। संजय से छोटे भाई अरविंद साव का वर्ष 2022 में बालूमाथ में झोला छाप डॉक्टर से इलाज के दौरान निधन हो गया था। अजय साव हरियाणा रोडवेज में जूनियर इंजीनियर हैं, जबकि सुजीत ऑटो चलाकर परिवार का सहारा बने हुए हैं। मां चिंता देवी जीवित हैं और बेटे के असमय निधन से बेसुध हैं। हादसे में संजय की पत्नी अर्चना देवी और 17 वर्षीय ध्रुव कुमार की भी मौत हो गई।

कर्ज लेकर किया था पैसों का इंतजाम

अजय ने बताया कि झुलसने के बाद उनके भाई अजय की हालत गंभीर थी। परिवार को उम्मीद थी कि दिल्ली में इलाज से वह ठीक हो सकते हैं। एयर एंबुलेंस के इंतजाम और आगे के इलाज के लिए बड़ी रकम की जरूरत थी। परिवार ने जमीन बेचने का फैसला किया। लेकिन तुरंत ऐसा नहीं हो सकता था। इसलिए लोगों से उधार लेकर, ब्याज पर भी पैसा लेकर और दोस्तों-रिश्तेदारों की मदद से करीब 8 लाख रुपये का इंतजाम किया गया था।

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