18 साल में झारखंड में हुए 6 हवाई हादसे, 2 बार तो बाल-बाल बचे मुख्यमंत्री; कैसे बची जान
झारखंड में सोमवार की रात दर्दनाक हवाई हादसा सामने आया है। यहां एक एयर एंबुलेंस क्रैश हो गया और 7 लोगों की मौत हो गई। इससे पहले भी झारखंड में हवाई हादसे हुए हैं। आइए जानते हैं झारखंड में हवाई हादसों का इतिहास।

झारखंड के रांची से दिल्ली जा रही एयर एंबुलेंस सोमवार की देर शाम करीब 7:30 बजे चतरा में क्रैश हो गई। विमान में मरीज समेत कुल सात लोग सवार थे। इस हादसे में सातों यात्रियों की दर्दनाक मौत हो गई। चतरा में हुए इस हादसे ने पिछले 18 साल में हुए कई हादसों की यादेंताजा कर दीं। दो बार तो तत्कालीन मुख्यमंत्री हवाई हादसे में बाल-बाल बच गए थे।
2008 - बाबूलाल मरांडी, बोकारो
साल 2008 में पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी का हेलीकॉप्टर बोकारो में दुर्घटनाग्रस्त होने से बाल-बाल बचा था। तकनीकी खराबी के कारण हेलीकॉप्टर की आपात लैंडिंग करनी पड़ी। हालांकि घटना में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
2010 - अर्जुन मुंडा, खूंटी
वर्ष 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के हेलीकॉप्टर को खूंटी में आपात स्थिति में उतारना पड़ा। खराब मौसम और तकनीकी कारणों को इस इमरजेंसी लैंडिंग की वजह माना गया था। घटना में सभी यात्री सुरक्षित रहे।
2022 में हेमंत सोरेन, रांची
वर्ष 2022 में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का हेलीकॉप्टर रांची में इमरजेंसी लैंडिंग के लिए मजबूर हुआ। उड़ान के दौरान तकनीकी गड़बड़ी की आशंका के चलते पायलट ने सतर्कता बरतते हुए हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतार लिया।
2022 में गोड्डा में निजी हेलीकॉप्टर क्रैश
साल 2022 में गोड्डा में एक निजी हेलीकॉप्टर हादसे का शिकार हो गया। यह वीआईपी उड़ान नहीं थी।
2023 में देवघर में चार्टर प्लेन हार्ड लैंडिंग
साल 2023 में देवघर में एक चार्टर विमान की हार्ड लैंडिंग हुई। विमान उतरते समय संतुलन बिगड़ने से यह हादसा हुआ। राहत की बात यह रही कि सभी यात्री सुरक्षित बच गए।
क्या बताई गई हादसे की वजह
हादसे के पीछे मौसम खराब होना भी बताया जा रहा है। एयरपोर्ट निदेशक विनोद कुमार ने बताया कि घटना के कारणों की जांच की जा रही है। इधर, डीजीसीए ने बताया कि हादसे की जांच काे एयर क्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो की टीम भेजी गई है।
संजय के परिजनों ने उठाए सवाल
संजय के परिजनों ने सवाल उठाया है कि जब मौसम खराब हो गया था तो एयर एंबुलेंस को उड़ान की अनुमति कैसे दी गई? क्या सुरक्षा मानकों का पालन हुआ? पूरा मामला गंभीर लापरवाही की आशंका पैदा करता है। इसकी उच्चस्तरीय जांच जरूरी है।




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